एनसीडब्ल्यू ने टीसीएस नासिक को पॉश अनुपालन पर दिए सख्त निर्देश, 4 हफ्तों में 127 यूनिट्स में बनें अलग कमेटियाँ
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के नासिक कार्यालय में कार्यस्थल सुरक्षा और पॉश अधिनियम के क्रियान्वयन में गंभीर खामियाँ पाए जाने के बाद कंपनी को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। 22 मई को एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष विजया रहाटकर की अध्यक्षता में हुई सुनवाई में टीसीएस के वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअली उपस्थित रहे। आयोग ने स्पष्ट किया कि देश की एक अग्रणी कॉर्पोरेट संस्था होने के नाते टीसीएस से पॉश कानून का पूरी जिम्मेदारी के साथ पालन अपेक्षित है।
सुनवाई का पृष्ठभूमि और प्रक्रिया
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की जाँच रिपोर्ट मिलने के बाद यह सुनवाई आयोजित की गई। बैठक में एनसीडब्ल्यू की अतिरिक्त सचिव बी. राधिका चक्रवर्ती, फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्य और आयोग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल रहे। टीसीएस के विशेष अनुरोध पर उनके प्रतिनिधियों को ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित होने की अनुमति दी गई थी।
नासिक यूनिट में पाई गई खामियाँ
आयोग ने नासिक कार्यालय में कई गंभीर कमियाँ चिह्नित कीं। स्थानीय स्तर पर एचआर इंफ्रास्ट्रक्चर और शिकायत निवारण तंत्र पर्याप्त नहीं पाया गया। नासिक के लिए अलग इंटरनल कमेटी का गठन नहीं किया गया था — पुणे और नासिक दोनों यूनिट्स के लिए एक ही संयुक्त कमेटी बनाई गई थी, जो पॉश कानून के प्रावधानों के विरुद्ध है।
इसके अतिरिक्त सीसीटीवी सिस्टम सही तरीके से काम नहीं कर रहा था, पॉश शिकायत दर्ज कराने की उचित व्यवस्था नहीं थी और सुपरवाइजरी जवाबदेही पर भी सवाल उठाए गए। आयोग ने यह भी पूछा कि जाँच के दौरान उठाए गए गंभीर मुद्दों के बावजूद किसी वरिष्ठ अधिकारी ने नासिक केंद्र जाकर कर्मचारियों से सीधे संवाद क्यों नहीं किया।
एनसीडब्ल्यू के निर्देश
आयोग ने टीसीएस को निर्देश दिया कि उसकी सभी 127 यूनिट्स, जहाँ 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहाँ चार सप्ताह के भीतर अलग-अलग इंटरनल कमेटियाँ गठित की जाएँ। साथ ही व्यापक पॉश प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएँ और वार्षिक पॉश रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को जमा कराई जाए।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली समीक्षा बैठक, जो चार सप्ताह बाद निर्धारित है, उसमें संबंधित अधिकारियों की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य होगी — वर्चुअल उपस्थिति स्वीकार नहीं की जाएगी।
आयोग का व्यापक संदेश
एनसीडब्ल्यू ने टाटा समूह के देश के विकास में योगदान की सराहना करते हुए भी यह रेखांकित किया कि एक प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट संस्था से पॉश कानून के प्रति उच्चतम मानकों की अपेक्षा की जाती है। आयोग ने दोहराया कि किसी भी संगठन को पॉश पीड़ितों के साथ संवेदनशीलता, सहानुभूति और मानवीय दृष्टिकोण से पेश आना चाहिए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आपराधिक मामले कानूनी प्रक्रिया के तहत स्वतंत्र रूप से चलते रहेंगे, और आयोग का प्राथमिक उद्देश्य कार्यस्थलों को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाना है।