नासिक धर्मांतरण विवाद: एनएचआरसी ने टीसीएस से एफआईआर की जानकारी मांगी
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नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने महाराष्ट्र के अधिकारियों और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के प्रबंधन को कंपनी के नासिक कार्यालय में कथित धर्मांतरण और यौन शोषण से संबंधित एक संगठित रैकेट के आरोपों पर नोटिस जारी किया है।
एनएचआरसी के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता में बनी पीठ ने लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी द्वारा दायर शिकायत का संज्ञान लिया, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि टीसीएस की नासिक शाखा में वरिष्ठ मानव संसाधन अधिकारियों की कथित मिलीभगत से ये गतिविधियां चल रही थीं।
शिकायत में कहा गया है कि शीर्ष स्तर के अधिकारियों को इन गतिविधियों के बारे में जानकारी थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे कॉर्पोरेट गवर्नेंस में गंभीर चूक का संकेत मिलता है।
यह भी आरोप लगाया गया कि नासिक शाखा में विशाखा दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते कर्मचारियों के पास प्रभावी आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) या शिकायतें दर्ज करने का कोई सुरक्षित तंत्र नहीं था।
यदि आरोप सही हैं, तो यह पीड़ितों के मानवाधिकारों का उल्लंघन है। इस पर सर्वोच्च मानवाधिकार निकाय ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत नोटिस जारी किए हैं।
एनएचआरसी ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), नासिक के पुलिस आयुक्त, श्रम आयुक्त और टीसीएस के सीईओ से इन आरोपों की गहन जांच करने का निर्देश दिया है।
एनएचआरसी ने डीजीपी से मामले में दर्ज एफआईआर का विवरण भी मांगा है।
इसके अलावा, टीसीएस प्रबंधन से यौन उत्पीड़न रोकथाम (पीओएसएच) तंत्रों के संबंध में विस्तृत जानकारी देने को कहा गया है, जिसमें आंतरिक समितियों का गठन, पिछले तीन वर्षों में प्राप्त शिकायतों का रिकॉर्ड और कार्रवाई की रिपोर्ट शामिल हैं।
मानवाधिकारों के सर्वोच्च संस्थान ने शिकायत में उल्लिखित कर्मचारियों, पूर्व कर्मचारियों और समिति सदस्यों के बयानों की प्रतियां और कार्यस्थल पर शिकायतों के निवारण के लिए उठाए गए कदमों के दस्तावेज भी मांगे हैं।
एनएचआरसी ने सभी संबंधित अधिकारियों से सात दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है और निर्देश दिया है कि रिपोर्ट की एक प्रति ईमेल के माध्यम से समीक्षा हेतु प्रस्तुत की जाए।
इस बीच, यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय में भी पहुंच गया है, जहां 'धार्मिक धर्मांतरण का मुद्दा' शीर्षक से एक नया आवेदन दायर किया गया है।
अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि नासिक कार्यालय में लगे आरोपों से बलपूर्वक या धोखाधड़ी से धर्मांतरण को रोकने के लिए सख्त कानूनी उपायों की आवश्यकता है।
याचिका में कहा गया है कि नासिक में संगठित धार्मिक धर्मांतरण ने पूरे देश के नागरिकों की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। यह सांविधानिक मूल्यों के लिए गंभीर खतरा है।
याचिका में सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह किया गया है कि वह गैरकानूनी धार्मिक धर्मांतरण पर कड़े कानून बनाने पर विचार करे और यह जांच करे कि क्या संगठित जबरन धर्मांतरण मौजूदा कानूनों के तहत गंभीर अपराधों के दायरे में आते हैं।
आवेदक ने केंद्र सरकार से गैरकानूनी धार्मिक धर्मांतरण को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की है।