क्या गिग वर्कर्स को इंसान समझना चाहिए, न कि सिर्फ डेटा पॉइंट्स? - राघव चड्ढा
सारांश
Key Takeaways
- गिग वर्कर्स को इंसान समझा जाना चाहिए।
- उन्हें सही वेतन और सोशल सिक्योरिटी की आवश्यकता है।
- गिग वर्कर्स की मेहनत से ही कंपनियाँ सफल होती हैं।
- उन्हें इंसानों के रूप में सम्मान मिलना चाहिए।
- गिग इकॉनमी को शोषण का माध्यम नहीं बनना चाहिए।
नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को यह स्पष्ट किया कि गिग वर्कर्स को केवल उपयोग करके फेंकने वाले डेटा पॉइंट्स के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
राघव चड्ढा ने उन गिग वर्कर्स का समर्थन किया, जिन्होंने नए साल की पूर्व संध्या पर देशव्यापी सांकेतिक हड़ताल की थी। इन वर्कर्स ने बड़ी डिलीवरी और ई-कॉमर्स कंपनियों से उचित वेतन, बेहतर कार्य स्थिति और सोशल सिक्योरिटी की मांग की।
आप सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, "मैं जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट आदि के डिलीवरी राइडर्स के साथ बैठा। यह किसी शिकायत का विषय नहीं है, बल्कि उन लोगों के साथ बातचीत है, जो हमारे रोजमर्रा के आराम को संभव बनाते हैं।"
तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (टीजीपीडब्ल्यूयू) और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (आईएफएटी) द्वारा आयोजित इस हड़ताल में कई राज्यों में हजारों डिलीवरी पार्टनर्स ने अपने ऐप्स बंद कर दिए या कार्य में कमी की।
इस विरोध-प्रदर्शन का प्रभाव साल के सबसे व्यस्त व्यावसायिक दिनों में से एक पर पड़ा, जिसके कारण कई शहरों में देरी और ऑर्डर कैंसिल होने की घटनाएँ सामने आईं।
राज्यसभा सांसद ने कहा कि यह दुखद है कि लाखों डिलीवरी राइडर्स, जिन्होंने इंस्टेंट-कॉमर्स कंपनियों को इस स्तर तक पहुँचाने में सहायता की, उन्हें अब अपनी आवाज उठाने के लिए प्रदर्शन करना पड़ रहा है। क्विक डिलीवरी प्लेटफॉर्म केवल राइडर्स की मेहनत से सफल हुए हैं और इसलिए उनके साथ इंसानों जैसा व्यवहार होना चाहिए।
आप सांसद ने यह भी कहा कि ये प्लेटफॉर्म केवल एल्गोरिदम के कारण सफल नहीं हुए हैं, बल्कि ये इंसानों की मेहनत की वजह से सफल हुए हैं। अब समय है कि कंपनियां राइडर्स को इंसान के रूप में समझें, न कि केवल उपयोग होने वाले डेटा पॉइंट्स के रूप में। गिग इकॉनमी को शोषण की इकॉनमी नहीं बनना चाहिए।
इससे पहले, समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए राज्यसभा सांसद ने कम और अनिश्चित वेतन, लंबे काम के घंटे, सोशल सिक्योरिटी की कमी और काम पर सम्मान की कमी पर चिंता व्यक्त की थी।
उन्होंने कहा कि वे इंसान हैं, रोबोट या बंधुआ मजदूर नहीं। वे भी किसी के पिता, बेटे, पति या भाई हैं। उन्होंने अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी मॉडल से संबंधित दबाव के खिलाफ भी बात की थी, यह बताते हुए कि 10 मिनट की डिलीवरी का दबाव कर्मचारियों की शारीरिक और मानसिक सेहत को प्रभावित कर रहा है।