हीरा ग्रुप मनी लॉन्ड्रिंग: ईडी ने ₹159 करोड़ की 23 संपत्तियाँ नीलाम कीं, पीड़ित निवेशकों को मिलेगा मुआवज़ा
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 20 जून 2026 को हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹159 करोड़ मूल्य की 23 अटैच की गई अचल संपत्तियों की नीलामी सफलतापूर्वक पूरी कर ली। ईडी के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने यह कदम मुख्य आरोपी नोहेरा शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और उससे संबद्ध संस्थाओं के विरुद्ध उठाया है। नीलामी से प्राप्त धनराशि उन हज़ारों निवेशकों को लौटाई जाएगी जिनके साथ कथित तौर पर धोखाधड़ी हुई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
जांच के दौरान सामने आया कि नोहेरा शेख और उनकी कंपनियों ने देशभर के निवेशकों को सालाना 36 प्रतिशत से अधिक रिटर्न का प्रलोभन देकर ₹5,978 करोड़ से अधिक की राशि एकत्र की थी। हालांकि, बाद में निवेशकों को उनकी मूल राशि तक वापस नहीं मिल सकी, जिससे हज़ारों परिवार आर्थिक संकट में पड़ गए। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पोंज़ी और अनियमित निवेश योजनाओं के खिलाफ नियामकीय शिकंजा कसता जा रहा है।
नीलामी प्रक्रिया और कानूनी आधार
ईडी ने बताया कि 19 जून 2026 को मेटल स्क्रैप ट्रेड कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MSTC) के माध्यम से इन संपत्तियों की नीलामी कराई गई। नीलामी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी तरीके से आयोजित की गई, ताकि अधिकतम मूल्य सुनिश्चित किया जा सके। ये संपत्तियाँ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत अटैच की गई थीं और जांच में इन्हें अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) से खरीदी गई संपत्ति के रूप में चिन्हित किया गया था। PMLA की निर्णायक प्राधिकरण (एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी) ने भी इन संपत्तियों की जब्ती की पुष्टि की थी। गौरतलब है कि पूरी प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और निगरानी में संचालित हुई।
नोहेरा शेख की गिरफ्तारी और न्यायिक कार्रवाई
जांच के दौरान नोहेरा शेख पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन न करने का आरोप लगा, जिसके बाद न्यायालय ने उनकी जमानत रद्द कर दी। हैदराबाद की विशेष PMLA अदालत ने 7 मई 2026 को उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया। इसके बाद ईडी ने 21 मई 2026 को उन्हें गुरुग्राम से गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
सहयोगी की गिरफ्तारी
ईडी ने नोहेरा शेख की निजी सहायक नाजनीन अंसारी उर्फ अबीदा को भी गिरफ्तार किया है। एजेंसी का आरोप है कि वह अपराध से अर्जित धन के प्रबंधन और संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया में बाधा डालने में सक्रिय रूप से शामिल थी। फिलहाल वह भी न्यायिक हिरासत में हैं।
आगे की राह
ईडी ने स्पष्ट किया है कि नीलामी से प्राप्त धनराशि का उपयोग वास्तविक निवेशकों और पीड़ितों को मुआवज़ा देने के लिए किया जाएगा। अपराध से अर्जित संपत्तियों के प्रभावी परिसमापन और शेष निवेशकों को राशि वापस दिलाने के लिए आगे की जांच जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई अनियमित जमा योजनाओं के खिलाफ एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित करती है।