हैदराबाद: ईडी ने हीरा ग्रुप की ₹159 करोड़ की 23 संपत्तियाँ नीलाम कीं, निवेशकों को मिलेगा मुआवजा
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और आरोपी नोहेरा शेख से जुड़ी संस्थाओं की ₹159 करोड़ मूल्य की 23 अटैच्ड अचल संपत्तियों की नीलामी सफलतापूर्वक संपन्न की है। यह नीलामी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में मेटल स्क्रैप ट्रेड कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएसटीसी) के माध्यम से आयोजित की गई। नीलामी से प्राप्त राशि उन हजारों निवेशकों को लौटाई जाएगी, जिन्हें कथित तौर पर ₹5,978 करोड़ से अधिक की पोंजी योजना में ठगा गया था।
मुख्य घटनाक्रम
ईडी के अनुसार, नोहेरा शेख और हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज पर आरोप है कि उन्होंने देशभर के निवेशकों को सालाना 36 प्रतिशत से अधिक रिटर्न का लालच देकर ₹5,978 करोड़ से अधिक की राशि एकत्र की। जाँच एजेंसी के अनुसार, आरोपी न तो वादा किया गया ब्याज दे पाए और न ही निवेशकों की मूल रकम वापस कर पाए, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी हुई।
इन संपत्तियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' के रूप में अटैच किया गया था। पीएमएलए की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने इन संपत्तियों की पहचान की पुष्टि की थी।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पारदर्शी प्रक्रिया
नीलामी की पूरी प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय की सीधी देखरेख में संपन्न हुई। न्यायालय के रिट पिटीशन में दिए गए मिसलेनियस एप्लीकेशन के निर्देशों का पालन करते हुए एमएसटीसी लिमिटेड के जरिए प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी बोली प्रक्रिया अपनाई गई। नीलामी से प्राप्त धनराशि पूर्णतः न्यायालय के निर्देशानुसार पीड़ित निवेशकों के मुआवजे में लगाई जाएगी।
नोहेरा शेख की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत
जाँच के दौरान नोहेरा शेख सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करने में विफल रहीं, जिसके बाद न्यायालय ने उनकी जमानत रद्द कर दी। हैदराबाद की पीएमएलए स्पेशल कोर्ट ने 7 मई को उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया। इसके बाद ईडी ने 21 मई को उन्हें गुरुग्राम, हरियाणा से गिरफ्तार कर संबंधित अदालत के समक्ष पेश किया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और वे अभी भी हिरासत में हैं।
सहयोगी भी जाँच के दायरे में
ईडी की जाँच के अनुसार, नोहेरा शेख की पर्सनल असिस्टेंट नाजनीन अंसारी उर्फ अबीदा भी अपराध से अर्जित धन को रखने, उपयोग करने और उसे बढ़ाने से जुड़ी गतिविधियों में कथित तौर पर शामिल थीं। यह मामला दर्शाता है कि हीरा ग्रुप का कथित वित्तीय नेटवर्क कितना व्यापक था।
आगे क्या होगा
नीलामी से मिली राशि से पीड़ित निवेशकों को मुआवजा देने की प्रक्रिया अब सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में आगे बढ़ेगी। यह कार्रवाई पीएमएलए के तहत बड़े पैमाने पर निवेशक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। गौरतलब है कि इस तरह के पोंजी घोटालों में पीड़ितों को राहत दिलाने की प्रक्रिया अक्सर वर्षों तक खिंचती है, इसलिए यह नीलामी हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है।