हीरा ग्रुप घोटाला: ईडी ने ₹159 करोड़ की 23 संपत्तियाँ नीलाम कीं, हजारों निवेशकों को मिलेगी राहत
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज की प्रमुख नोहेरा शेख और उनसे जुड़ी संस्थाओं की ₹159 करोड़ मूल्य की 23 अचल संपत्तियों की नीलामी सम्पन्न कर दी है। यह नीलामी 19 जून 2026 को मेटल स्क्रैप ट्रेड कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएसटीसी) के माध्यम से कराई गई, और इससे प्राप्त राशि देशभर के उन हजारों निवेशकों को लौटाई जाएगी जो कथित तौर पर इस निवेश घोटाले में ठगे गए थे।
नीलामी का आधार और कानूनी प्रक्रिया
ईडी के अनुसार, नीलाम की गई संपत्तियाँ पहले धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत जब्त की गई थीं और इन्हें अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) के रूप में चिह्नित किया गया था। पीएमएलए के तहत न्यायनिर्णायक प्राधिकरण ने भी इनकी जब्ती को विधिवत मंजूरी दी थी।
यह पूरी कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के उन निर्देशों के अनुपालन में की गई है जो मामले की चल रही सुनवाई के दौरान दिए गए थे। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि नीलामी प्रक्रिया पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी ढंग से पूरी की गई।
घोटाले का मूल स्वरूप
ईडी की हैदराबाद यूनिट ने नोहेरा शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और अन्य संबद्ध व्यक्तियों के विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की थी। जाँच एजेंसियों का आरोप है कि आरोपियों ने आम निवेशकों को 36 प्रतिशत से अधिक वार्षिक रिटर्न का प्रलोभन देकर ₹5,978 करोड़ से अधिक का निवेश जुटाया। कथित तौर पर निवेशकों को मूलधन तक वापस नहीं किया गया, जिससे कई राज्यों के हजारों परिवारों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
गौरतलब है कि यह मामला उन पोंजी-शैली के निवेश घोटालों की श्रृंखला का हिस्सा है जिनमें अत्यधिक रिटर्न के वादे कर आम जनता से पैसा जुटाया जाता है और बाद में भुगतान ठप हो जाता है।
नोहेरा शेख की गिरफ्तारी और न्यायिक स्थिति
सर्वोच्च न्यायालय ने नोहेरा शेख की जमानत इसलिए रद्द कर दी क्योंकि उन्होंने अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया था। इसके बाद हैदराबाद की विशेष पीएमएलए अदालत ने 7 मई 2026 को उनके विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी किया।
विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर ईडी अधिकारियों ने 21 मई 2026 को हरियाणा के गुरुग्राम से नोहेरा शेख को गिरफ्तार किया। अदालत में पेश किए जाने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और वह फिलहाल जेल में बंद हैं।
सहायक की गिरफ्तारी और नीलामी में बाधा
ईडी ने आरोप लगाया है कि नोहेरा शेख की निजी सहायक नाजनीन अंसारी उर्फ आबिदा ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की जानकारी होने के बावजूद नीलामी प्रक्रिया में जानबूझकर बाधा डाली। एजेंसी के अनुसार, उन्होंने जब्त संपत्तियों के निरीक्षण में रुकावट पैदा की और उन्हें अपराध से असंबंधित बताने की कोशिश की।
इस आरोप के बाद नाजनीन अंसारी को भी गिरफ्तार कर लिया गया और विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले की आगे की जाँच जारी है।
निवेशकों को राहत की राह
नीलामी से प्राप्त समस्त राशि सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में वास्तविक पीड़ित निवेशकों को लौटाई जाएगी। ईडी का कहना है कि इस कदम से कथित निवेश घोटाले से प्रभावित हजारों परिवारों को मुआवजा मिलने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। आने वाले समय में अतिरिक्त संपत्तियों की पहचान और नीलामी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।