ईडी ने गौरव डावर को हेरोइन तस्करी व मनी लॉन्ड्रिंग में गिरफ्तार किया, ₹89 करोड़ की अपराध-कमाई उजागर
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 17 सितंबर 2026 को गौरव डावर को प्रिवेंशन ऑफ मनी-लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया। ईडी के अनुसार, यह मामला हेरोइन की बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय तस्करी, हवाला लेनदेन और उससे अर्जित रकम की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। जाँच में अब तक ₹89 करोड़ की 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' (अपराध-कमाई) का पता लगाया जा चुका है।
गिरफ्तारी और अदालती कार्यवाही
18 सितंबर 2026 को आरोपी गौरव डावर को तीस हजारी कोर्ट (वेस्ट डिस्ट्रिक्ट), नई दिल्ली में स्पेशल जज (पीएमएलए) के सामने पेश किया गया। कोर्ट ने ईडी की माँग को स्वीकार करते हुए आरोपी को पाँच दिन की ईडी कस्टडी में भेजने का आदेश दिया। ईडी ने यह जाँच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) द्वारा पहले से दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी।
मामले की पृष्ठभूमि और एनआईए की जाँच
एनआईए ने यह एफआईआर हरप्रीत सिंह तलवार और अन्य आरोपियों के खिलाफ यूएपीए, 1967, एनडीपीएस एक्ट, 1985 और आईपीसी, 1860 के तहत ड्रग तस्करी की गतिविधियों को लेकर दर्ज की थी। एनआईए अब तक इस मामले में छह चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
इन चार्जशीट में कई आरोपियों पर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुबई से संचालित अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। कथित तौर पर यह सिंडिकेट वांटेड आरोपी वितायश कोसर उर्फ राजू दुबई, पाकिस्तानी आईएसआई एजेंटों और अफगान नागरिकों के साथ मिलकर सक्रिय था।
ड्रग्स की तस्करी और आतंकी फंडिंग का संबंध
जाँच एजेंसियों के अनुसार, ड्रग्स को सेमी-प्रोसेस्ड टैल्क (पाउडर) में छिपाकर बड़े पैमाने पर आयात किया गया। इसके बाद दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में नारकोटिक्स की बरामदगी हुई। जाँच में यह भी सामने आया है कि नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री से अर्जित ₹74 करोड़ की रकम को हवाला के माध्यम से अफगानिस्तान भेजा गया और कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया।
गौरव डावर की भूमिका और मनी लॉन्ड्रिंग
ईडी के अनुसार, गौरव डावर ने अपने साथी आरोपी हरप्रीत सिंह तलवार के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट द्वारा भेजी गई नशीले पदार्थों की खेप की तस्करी में मदद की और इसके बदले सामान तथा हवाला के ज़रिये भुगतान लिया।
डावर ने अपने सह-आरोपी के साथ मिलकर न्यूएरा फीस्ट एंड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड (एनएफएचपीएल) के माध्यम से संचालित नई दिल्ली के नाइट क्लबों 'प्लेबॉय क्लब' और 'व्हाइट क्लब' में नकद निवेश किया। ईडी ने जाँच में कुल ₹89 करोड़ की अपराध-कमाई की पहचान की है, जिसमें प्रतिबंधित सामान की तस्करी, ड्रग्स से हुई कमाई का बंटवारा और हवाला ऑपरेशन शामिल हैं।
तलाशी अभियान और आगे की जाँच
इस मामले में पीएमएलए के तहत कई बार तलाशी अभियान चलाए गए हैं। सबसे हालिया तलाशी 15 जुलाई से 17 सितंबर 2026 के बीच की गई। ईडी के अनुसार, यह गिरफ्तारी ड्रग तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला ट्रांजेक्शन में शामिल नेटवर्क को तोड़ने के लिए 'होल ऑफ द गवर्नमेंट' दृष्टिकोण का हिस्सा है। आगे की जाँच में अपराध से जुड़ी और रकम का पता लगाने का काम जारी है।