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ईडी ने गौरव डावर को हेरोइन तस्करी व मनी लॉन्ड्रिंग में गिरफ्तार किया, ₹89 करोड़ की अपराध-कमाई उजागर

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ईडी ने गौरव डावर को हेरोइन तस्करी व मनी लॉन्ड्रिंग में गिरफ्तार किया, ₹89 करोड़ की अपराध-कमाई उजागर

सारांश

ईडी ने हेरोइन तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में गौरव डावर को गिरफ्तार किया है। ₹89 करोड़ की अपराध-कमाई, दिल्ली के नाइट क्लबों में नकद निवेश और ₹74 करोड़ की कथित आतंकी फंडिंग — यह मामला ड्रग्स, हवाला और आतंक के खतरनाक गठजोड़ की परतें खोलता है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गौरव डावर को 17 सितंबर 2026 को पीएमएलए, 2002 के तहत हेरोइन तस्करी व मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया।
तीस हजारी कोर्ट, नई दिल्ली ने आरोपी को पाँच दिन की ईडी कस्टडी में भेजा।
जाँच में कुल ₹89 करोड़ की अपराध-कमाई उजागर; इसमें से ₹74 करोड़ हवाला के ज़रिये अफगानिस्तान भेजे गए।
डावर ने दिल्ली के नाइट क्लबों 'प्लेबॉय क्लब' और 'व्हाइट क्लब' में अपराध की नकदी निवेश की।
मामले में एनआईए छह चार्जशीट दाखिल कर चुकी है; वांटेड आरोपी वितायश कोसर उर्फ राजू दुबई अभी फरार है।
ड्रग्स को सेमी-प्रोसेस्ड टैल्क में छिपाकर लाया गया; दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में बरामदगी हुई।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 17 सितंबर 2026 को गौरव डावर को प्रिवेंशन ऑफ मनी-लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया। ईडी के अनुसार, यह मामला हेरोइन की बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय तस्करी, हवाला लेनदेन और उससे अर्जित रकम की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। जाँच में अब तक ₹89 करोड़ की 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' (अपराध-कमाई) का पता लगाया जा चुका है।

गिरफ्तारी और अदालती कार्यवाही

18 सितंबर 2026 को आरोपी गौरव डावर को तीस हजारी कोर्ट (वेस्ट डिस्ट्रिक्ट), नई दिल्ली में स्पेशल जज (पीएमएलए) के सामने पेश किया गया। कोर्ट ने ईडी की माँग को स्वीकार करते हुए आरोपी को पाँच दिन की ईडी कस्टडी में भेजने का आदेश दिया। ईडी ने यह जाँच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) द्वारा पहले से दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी।

मामले की पृष्ठभूमि और एनआईए की जाँच

एनआईए ने यह एफआईआर हरप्रीत सिंह तलवार और अन्य आरोपियों के खिलाफ यूएपीए, 1967, एनडीपीएस एक्ट, 1985 और आईपीसी, 1860 के तहत ड्रग तस्करी की गतिविधियों को लेकर दर्ज की थी। एनआईए अब तक इस मामले में छह चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

इन चार्जशीट में कई आरोपियों पर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुबई से संचालित अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। कथित तौर पर यह सिंडिकेट वांटेड आरोपी वितायश कोसर उर्फ राजू दुबई, पाकिस्तानी आईएसआई एजेंटों और अफगान नागरिकों के साथ मिलकर सक्रिय था।

ड्रग्स की तस्करी और आतंकी फंडिंग का संबंध

जाँच एजेंसियों के अनुसार, ड्रग्स को सेमी-प्रोसेस्ड टैल्क (पाउडर) में छिपाकर बड़े पैमाने पर आयात किया गया। इसके बाद दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में नारकोटिक्स की बरामदगी हुई। जाँच में यह भी सामने आया है कि नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री से अर्जित ₹74 करोड़ की रकम को हवाला के माध्यम से अफगानिस्तान भेजा गया और कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया।

गौरव डावर की भूमिका और मनी लॉन्ड्रिंग

ईडी के अनुसार, गौरव डावर ने अपने साथी आरोपी हरप्रीत सिंह तलवार के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट द्वारा भेजी गई नशीले पदार्थों की खेप की तस्करी में मदद की और इसके बदले सामान तथा हवाला के ज़रिये भुगतान लिया।

डावर ने अपने सह-आरोपी के साथ मिलकर न्यूएरा फीस्ट एंड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड (एनएफएचपीएल) के माध्यम से संचालित नई दिल्ली के नाइट क्लबों 'प्लेबॉय क्लब' और 'व्हाइट क्लब' में नकद निवेश किया। ईडी ने जाँच में कुल ₹89 करोड़ की अपराध-कमाई की पहचान की है, जिसमें प्रतिबंधित सामान की तस्करी, ड्रग्स से हुई कमाई का बंटवारा और हवाला ऑपरेशन शामिल हैं।

तलाशी अभियान और आगे की जाँच

इस मामले में पीएमएलए के तहत कई बार तलाशी अभियान चलाए गए हैं। सबसे हालिया तलाशी 15 जुलाई से 17 सितंबर 2026 के बीच की गई। ईडी के अनुसार, यह गिरफ्तारी ड्रग तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला ट्रांजेक्शन में शामिल नेटवर्क को तोड़ने के लिए 'होल ऑफ द गवर्नमेंट' दृष्टिकोण का हिस्सा है। आगे की जाँच में अपराध से जुड़ी और रकम का पता लगाने का काम जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हवाला नेटवर्क और कथित आतंकी फंडिंग एक ही धागे से बँधे हैं। ₹74 करोड़ का अफगानिस्तान में कथित स्थानांतरण दर्शाता है कि घरेलू नशा तस्करी का असर सीमा पार सुरक्षा पर भी पड़ता है। गौरतलब है कि एनआईए की छह चार्जशीट के बावजूद मास्टरमाइंड वितायश कोसर उर्फ राजू दुबई अभी तक फरार है — यह सवाल उठाता है कि इतने लंबे समय में प्रत्यर्पण प्रयास कहाँ हैं। दिल्ली के नामी नाइट क्लबों में नकद निवेश का खुलासा यह भी बताता है कि वित्तीय जाँच तंत्र को लाइसेंसिंग और कर अनुपालन की परतों को भी खँगालना होगा।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौरव डावर को ईडी ने किस मामले में गिरफ्तार किया?
ईडी ने गौरव डावर को 17 सितंबर 2026 को पीएमएलए, 2002 के तहत हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय तस्करी, हवाला लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया। जाँच में उन पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट की खेप को तस्करी करने में मदद का आरोप है।
इस मामले में कितनी अपराध-कमाई का पता चला है?
ईडी की जाँच में कुल ₹89 करोड़ की 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' यानी अपराध-कमाई का पता चला है। इसमें से ₹74 करोड़ हवाला के ज़रिये अफगानिस्तान भेजे गए और कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल हुए।
गौरव डावर को कितने दिन की कस्टडी दी गई और क्यों?
तीस हजारी कोर्ट (वेस्ट डिस्ट्रिक्ट), नई दिल्ली ने 18 सितंबर 2026 को आरोपी को पाँच दिन की ईडी कस्टडी में भेजा। यह कस्टडी आगे की पूछताछ और अपराध-कमाई की पहचान के लिए माँगी गई थी।
इस ड्रग सिंडिकेट में पाकिस्तान और अफगानिस्तान की क्या भूमिका बताई गई है?
एनआईए की चार्जशीट के अनुसार, यह सिंडिकेट अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुबई से संचालित होता था और वांटेड आरोपी वितायश कोसर उर्फ राजू दुबई, पाकिस्तानी आईएसआई एजेंटों और अफगान नागरिकों के साथ मिलकर काम करता था। ड्रग्स को सेमी-प्रोसेस्ड टैल्क में छिपाकर भारत लाया जाता था।
दिल्ली के नाइट क्लबों का इस मामले से क्या संबंध है?
ईडी के अनुसार, गौरव डावर और उनके सह-आरोपी ने न्यूएरा फीस्ट एंड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के ज़रिये दिल्ली के 'प्लेबॉय क्लब' और 'व्हाइट क्लब' में अपराध से अर्जित नकदी का निवेश किया। इसे मनी लॉन्ड्रिंग के एक प्रमुख माध्यम के रूप में पहचाना गया है।
राष्ट्र प्रेस
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