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गोवा ड्रग तस्करी: ईडी ने ₹3.96 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 5 नए आरोपियों पर शिकायत दर्ज की

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गोवा ड्रग तस्करी: ईडी ने ₹3.96 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 5 नए आरोपियों पर शिकायत दर्ज की

सारांश

गोवा के ₹3.96 करोड़ के ड्रग तस्करी नेटवर्क में ईडी ने पाँच नए आरोपी जोड़े हैं — और इस मामले की असली परत क्रिप्टोकरेंसी व डार्क वेब के ज़रिए दुबई तक फैले वित्तीय जाल में है। 2016 से चल रहे इस नेटवर्क की जड़ें अब एक से अधिक राज्यों तक पहुँचती दिख रही हैं।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 18 सितंबर 2026 को गोवा की पीएमएलए विशेष अदालत में पाँच नए आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की।
नए आरोपी हैं: निहाल वडाक्कनचेरी नाजर, प्रसोध पीके, एल्फिन थॉमस, धीरज मैथ्यूज और निशांत प्रताप — इन्हें आरोपी नंबर 8 से 12 के रूप में शामिल किया गया।
मामले में कुल ₹3.96 करोड़ की अपराध-जनित आय की पहचान की गई है, जो 2016 से चल रही तस्करी से अर्जित बताई जाती है।
अपराध की कमाई दुबई भेजी गई और क्रिप्टोकरेंसी (यूएसडीजी) में बदलकर डार्क वेब से नशीले पदार्थ खरीदे गए।
16 सितंबर 2026 को जारी पीओए के तहत अनाम चरण प्रधान की ₹9,39,250 और उत्तम चंद की ₹17.48 लाख की संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क।
ईडी की जाँच जारी है और यह कार्रवाई 'नशा मुक्त भारत अभियान' का हिस्सा बताई गई है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पणजी जोनल ऑफिस ने 18 सितंबर 2026 को गोवा के नॉर्थ गोवा प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज (पीएमएलए विशेष न्यायालय) के समक्ष पाँच नए आरोपियों के विरुद्ध सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की है। यह कार्रवाई ₹3.96 करोड़ के संगठित अंतर-राज्यीय और सीमा-पार ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है।

कौन हैं नए आरोपी

सप्लीमेंट्री शिकायत में जिन पाँच व्यक्तियों को आरोपी नंबर 8 से 12 के रूप में शामिल किया गया है, उनके नाम हैं: निहाल वडाक्कनचेरी नाजर, प्रसोध पीके, एल्फिन थॉमस, धीरज मैथ्यूज और निशांत प्रताप। इन सभी पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (पीएमएलए) की धारा 44 और 45 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। इस अपराध की परिभाषा एक्ट की धारा 3 में दी गई है और धारा 4 के तहत इसके लिए दंड का प्रावधान है।

मुख्य मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 15 अक्टूबर 2024 को नॉर्थ गोवा पुलिस के एंटी-नारकोटिक सेल द्वारा मधुपन सुरेश शशिकला के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 की धारा 20(बी)(ii)(ए) और 22(सी) के तहत दर्ज एफआईआर से उपजा है। जाँच में पाया गया कि मधुपन एसएस ने वर्ष 2016 से नशीले पदार्थों और साइकोट्रोपिक पदार्थों की तस्करी से ₹3.96 करोड़ की अपराध-जनित आय अर्जित की।

मूल प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट पहले 13 फरवरी 2025 और फिर 16 मार्च 2026 को सात आरोपियों के विरुद्ध दायर की जा चुकी है। अब आगे की जाँच में पाँच और संदिग्धों की पहचान होने के बाद यह सप्लीमेंट्री शिकायत दर्ज की गई है।

क्रिप्टोकरेंसी और डार्क वेब का इस्तेमाल

ईडी की जाँच के अनुसार, अपराध से कमाई गई राशि का एक हिस्सा बैंकिंग चैनलों के माध्यम से दुबई भेजा गया, जहाँ उसे क्रिप्टोकरेंसी (यूएसडीजी) में परिवर्तित किया गया। इस रकम का उपयोग बाद में डार्क वेब के जरिए नशीले पदार्थ खरीदने के लिए किया गया। यह पहलू इस मामले को सामान्य ड्रग तस्करी से अलग करता है और इसे साइबर-वित्तीय अपराध की श्रेणी में ले आता है।

संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त

ईडी ने 16 सितंबर 2026 को जारी प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर (पीओए) के तहत दो व्यक्तियों की संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। अनाम चरण प्रधान की ₹9,39,250 और उत्तम चंद की ₹17.48 लाख मूल्य की अचल संपत्तियाँ जब्त की गई हैं। यह कदम तस्करी नेटवर्क की वित्तीय जड़ों को काटने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

आगे की जाँच और राष्ट्रीय संदर्भ

ईडी ने स्पष्ट किया है कि आगे की जाँच जारी है और अवैध ड्रग व्यापार तथा मनी लॉन्ड्रिंग से अर्जित सभी संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त किया जाएगा। यह कार्रवाई केंद्र सरकार के 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत चल रहे व्यापक अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। गौरतलब है कि यह मामला केवल गोवा तक सीमित नहीं — इसका अंतर-राज्यीय और सीमा-पार आयाम इसे एक संगठित अपराध नेटवर्क की ओर इंगित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या अभियोजन अदालत में टिकेगा — अतीत में कई पीएमएलए मामले तकनीकी कारणों से कमज़ोर पड़े हैं। 2016 से चल रहे इस नेटवर्क का इतने वर्षों तक बेरोकटोक जारी रहना खुफिया और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े करता है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोवा ड्रग तस्करी मामले में ईडी की ताज़ा कार्रवाई क्या है?
ईडी के पणजी जोनल ऑफिस ने 18 सितंबर 2026 को पाँच नए आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की है। यह शिकायत ₹3.96 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े उस मामले में है जो 2016 से चल रहे अंतर-राज्यीय ड्रग नेटवर्क से संबंधित है।
इस मामले में क्रिप्टोकरेंसी और डार्क वेब का क्या कनेक्शन है?
जाँच के अनुसार, तस्करी से कमाई गई रकम बैंकिंग चैनलों के ज़रिए दुबई भेजी गई और वहाँ क्रिप्टोकरेंसी (यूएसडीजी) में बदली गई। इस डिजिटल मुद्रा का उपयोग बाद में डार्क वेब के माध्यम से नशीले पदार्थ खरीदने के लिए किया गया, जो इस मामले को पारंपरिक तस्करी से अलग बनाता है।
किन आरोपियों की संपत्तियाँ कुर्क की गई हैं?
ईडी ने 16 सितंबर 2026 को जारी प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत अनाम चरण प्रधान की ₹9,39,250 और उत्तम चंद की ₹17.48 लाख मूल्य की अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त की हैं।
यह मामला मूल रूप से कब और कैसे शुरू हुआ?
यह मामला 15 अक्टूबर 2024 को नॉर्थ गोवा पुलिस के एंटी-नारकोटिक सेल द्वारा मधुपन सुरेश शशिकला के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर से शुरू हुआ। इसी आधार पर ईडी ने पीएमएलए के तहत जाँच शुरू की और पाया कि 2016 से ₹3.96 करोड़ की अपराध-जनित आय अर्जित की गई थी।
अब तक इस मामले में कुल कितने आरोपी हैं?
मूल प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में सात आरोपी थे। अब पाँच नए आरोपियों (आरोपी नंबर 8 से 12) को शामिल करने के बाद कुल आरोपियों की संख्या 12 हो गई है। ईडी के अनुसार आगे की जाँच अभी भी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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