असम-अरुणाचल शराब तस्करी: ईडी ने ₹1,047.93 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 19 पर दर्ज की शिकायत
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 29 जुलाई 2026 को अरुणाचल प्रदेश और असम के बीच संचालित एक बड़े शराब तस्करी एवं मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट के सिलसिले में 19 आरोपियों के विरुद्ध प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत अभियोजन शिकायत दर्ज कराई है। इन आरोपियों में पाँच मुख्य व्यक्ति और 14 बॉन्डेड वेयरहाउस कंपनियाँ शामिल हैं।
मुख्य आरोपी और आरोप
ईडी के गुवाहाटी जोनल ऑफिस के आधिकारिक बयान के अनुसार, अभियोजन शिकायत में संजय दीवान, नीरज शर्मा, राजन लोहिया, शंकर देब और समीर मेहता को मुख्य आरोपी के रूप में नामित किया गया है। एजेंसी का आरोप है कि इन व्यक्तियों ने एक सुनियोजित सिंडिकेट के ज़रिए अरुणाचल प्रदेश में शराब का उत्पादन कर उसे बिना अनिवार्य ट्रांजिट परमिट या एक्साइज वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट (ईवीसी) के असम में तस्करी की।
जाँच में यह भी सामने आया कि दीवान, शर्मा और लोहिया ने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, बॉन्डेड वेयरहाउस, थोक वितरकों और खुदरा आउटलेट्स के एक विस्तृत नेटवर्क के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश के शराब व्यापार पर कथित तौर पर लगभग पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया था।
मामले की पृष्ठभूमि और जाँच का आधार
यह मनी लॉन्ड्रिंग जाँच असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा से लगे जिलों में असम पुलिस द्वारा दर्ज की गई 173 एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। बैंकिंग विश्लेषण में ईडी ने पाया कि नौ थोक कंपनियों के खातों में कुल मिलाकर लगभग ₹1,047.93 करोड़ का नकद जमा हुआ, जिसे एजेंसी ने अपराध से अर्जित धनराशि माना है।
गौरतलब है कि शराब की बोतलों पर 'अरुणाचल प्रदेश में बिक्री के लिए' अंकित होता था, लेकिन राज्य की ऊँची एक्साइज ड्यूटी और वैल्यू एडेड टैक्स (वीएटी) से बचने के लिए उन्हें कथित तौर पर अवैध रूप से असम भेजा जाता था। जाँचकर्ताओं के अनुसार, शराब बनाने वाली इकाइयों ने बिना अनिवार्य एक्साइज ड्यूटी चुकाए अपनी उत्पादन क्षमता में भारी विस्तार किया, जिससे बड़े पैमाने पर बेहिसाब शराब तैयार हुई।
धन शोधन का तरीका
ईडी के अनुसार, अपराध से प्राप्त धनराशि को पहले आरटीजीएस और एनईएफटी के माध्यम से 14 बॉन्डेड वेयरहाउस कंपनियों में स्थानांतरित किया गया। इसके बाद इसे मैन्युफैक्चरिंग स्तर पर एकत्रित कर वैध व्यावसायिक लाभ के रूप में प्रदर्शित किया गया। लॉन्ड्र की गई राशि को कथित तौर पर व्यक्तिगत और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) खातों में डायवर्ट किया गया और चल-अचल संपत्तियों में निवेश किया गया।
जब्ती के आँकड़े
एजेंसी के अनुसार, असम के आबकारी अधिकारियों ने जनवरी 2023 से अप्रैल 2026 के बीच 739 अलग-अलग मामलों में 2.63 लाख बल्क लीटर से अधिक ऐसी शराब जब्त की, जिसकी कीमत लगभग ₹52.77 करोड़ आँकी गई। ईडी ने स्पष्ट किया कि यह जब्त मात्रा राज्य में कथित तौर पर तस्करी की गई कुल शराब का एक छोटा अंश मात्र है।
आगे की कार्रवाई
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पूर्वोत्तर भारत में अंतर-राज्यीय आबकारी उल्लंघनों पर केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी तेज़ हो रही है। पीएमएलए के तहत दायर अभियोजन शिकायत के बाद अब मामला विशेष न्यायालय के समक्ष जाएगा, जहाँ आरोपियों की संपत्तियों की कुर्की पर भी निर्णय संभव है।