असम ग्रामीण विकास बैंक घोटाला: ईडी ने ₹7.28 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पीएमएलए शिकायत दर्ज की

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असम ग्रामीण विकास बैंक घोटाला: ईडी ने ₹7.28 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पीएमएलए शिकायत दर्ज की

सारांश

असम ग्रामीण विकास बैंक की लाहोरीजान शाखा में ₹7.28 करोड़ के कथित गबन का यह मामला अब ईडी की पीएमएलए जांच के दायरे में आ गया है। फिनैकल सॉफ्टवेयर के दुरुपयोग से शुरू हुआ यह घोटाला फर्जी खातों और चाय कारोबार तक फैला — ग्रामीण बैंकिंग तंत्र में गहरी खामियों का संकेत।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने असम ग्रामीण विकास बैंक के ₹7.28 करोड़ के कथित घोटाले में पीएमएलए के तहत अभियोजन शिकायत दर्ज की।
आरोपी हैं — पूर्व शाखा प्रमुख दिव्यज्योति कलिता और गोलपाड़ा निवासी बिरबाहु ब्रह्मा ।
दिसंबर 2020 से अप्रैल 2021 के बीच 20 अनधिकृत लेनदेन के जरिए फिनैकल बैंकिंग सॉफ्टवेयर का दुरुपयोग कर गबन का आरोप।
सीबीआई ने 29 अप्रैल 2024 को आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया था।
नवंबर 2024 की तलाशी में हस्तलिखित नोटबुक, संपत्ति कागजात, चेकबुक और रुपे डेबिट कार्ड बरामद।
मामले की आगे की जांच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने असम में ₹7.28 करोड़ के कथित बैंक घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में असम ग्रामीण विकास बैंक के पूर्व शाखा प्रमुख सहित दो आरोपियों के विरुद्ध धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अभियोजन शिकायत दर्ज की है। यह शिकायत गुवाहाटी स्थित पीएमएलए मामलों की विशेष अदालत में दाखिल की गई है।

मुख्य आरोपी और शिकायत का आधार

ईडी ने दिव्यज्योति कलिता — जो बैंक की लाहोरीजान शाखा के पूर्व प्रमुख हैं — और गोलपाड़ा जिले के निवासी बिरबाहु ब्रह्मा के खिलाफ यह शिकायत दर्ज की है। यह मामला पीएमएलए, 2002 की धारा 44(1)(बी) और 45(1) के तहत कथित अपराधों से संबंधित है।

जांच की नींव कार्बी आंगलोंग जिले के खटखटी थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 409 के तहत दर्ज प्राथमिकी पर रखी गई थी। बाद में इस मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, शिलांग ने दोबारा दर्ज किया। 29 अप्रैल 2024 को सीबीआई ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं के तहत आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया था।

घोटाले का तरीका: कैसे हुआ गबन

ईडी की जांच के अनुसार, दिसंबर 2020 से अप्रैल 2021 के बीच कलिता ने कथित तौर पर लाहोरीजान शाखा के एडजस्टमेंट क्लियरिंग अकाउंट से 20 अनधिकृत लेनदेन के माध्यम से ₹7.28 करोड़ का गबन किया। अधिकारियों के अनुसार, ये लेनदेन फिनैकल बैंकिंग सॉफ्टवेयर के क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग कर बिना किसी वाउचर या ग्राहक के निर्देश के अंजाम दिए गए।

यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल बैंकिंग प्रणालियों में आंतरिक धोखाधड़ी की घटनाएँ देशभर में चिंता का विषय बनती जा रही हैं। गौरतलब है कि फिनैकल सॉफ्टवेयर का उपयोग देश के अनेक सहकारी और ग्रामीण बैंकों में होता है, जिससे यह मामला व्यापक प्रणालीगत कमज़ोरियों की ओर भी इशारा करता है।

धन का परत-दर-परत हस्तांतरण

जांच में सामने आया कि कथित अवैध राशि को फर्जी ग्राहक खातों, स्वयं सहायता समूहों और सोसायटी खातों के साथ-साथ फर्जी सावधि जमा और डिपॉजिट के विरुद्ध ऋण के जरिए कई स्तरों पर घुमाया गया। ईडी के अनुसार, बाद में यह रकम मुख्य आरोपी के निजी खाते, उसकी पत्नी के खाते, एक चाय कारोबार से जुड़ी साझेदारी फर्म और दूसरे आरोपी के रिश्तेदारों व सहयोगियों के नाम पर संचालित अनेक खातों में स्थानांतरित की गई।

तलाशी में बरामद हुए अहम सुराग

नवंबर 2024 में आरोपियों के ठिकानों पर की गई तलाशी के दौरान एजेंसी ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज, निवेश से संबंधित हस्तलिखित नोटबुक, संपत्ति के कागजात, तीसरे पक्षों की चेकबुक और मुख्य आरोपी से कथित रूप से जुड़ा एक रुपे डेबिट कार्ड बरामद किया। ये दस्तावेज मनी ट्रेल को उजागर करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

आगे की जांच जारी

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और खुलासे हो सकते हैं। पीएमएलए के तहत दायर अभियोजन शिकायत अब विशेष अदालत के समक्ष विचाराधीन है, जो मामले की सुनवाई की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

आंतरिक ऑडिट तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है। धन का फर्जी स्वयं सहायता समूहों और चाय कारोबार के जरिए परत-दर-परत हस्तांतरण बताता है कि यह सुनियोजित षड्यंत्र था, न कि आकस्मिक चूक। असली जवाबदेही तब होगी जब जांच बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली तक पहुँचे।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम ग्रामीण विकास बैंक घोटाला क्या है?
यह ₹7.28 करोड़ के कथित गबन और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है, जिसमें बैंक की लाहोरीजान शाखा के पूर्व प्रमुख दिव्यज्योति कलिता पर दिसंबर 2020 से अप्रैल 2021 के बीच फिनैकल बैंकिंग सॉफ्टवेयर के दुरुपयोग से 20 अनधिकृत लेनदेन करने का आरोप है। ईडी ने अब पीएमएलए के तहत अभियोजन शिकायत दर्ज की है।
ईडी ने इस मामले में किसके खिलाफ शिकायत दर्ज की है?
ईडी ने असम ग्रामीण विकास बैंक के पूर्व शाखा प्रमुख दिव्यज्योति कलिता और गोलपाड़ा जिले के निवासी बिरबाहु ब्रह्मा के खिलाफ गुवाहाटी की पीएमएलए विशेष अदालत में शिकायत दाखिल की है।
इस घोटाले में धन को कैसे छुपाया गया?
कथित अवैध राशि को फर्जी ग्राहक खातों, स्वयं सहायता समूहों, सोसायटी खातों, फर्जी सावधि जमा और ऋण के जरिए घुमाया गया। बाद में यह रकम मुख्य आरोपी के निजी खाते, उसकी पत्नी के खाते और एक चाय कारोबार से जुड़ी साझेदारी फर्म में स्थानांतरित की गई।
सीबीआई की इस मामले में क्या भूमिका रही?
सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, शिलांग ने मूल प्राथमिकी को दोबारा दर्ज किया और 29 अप्रैल 2024 को आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया। ईडी की पीएमएलए जांच इसी आधार पर शुरू हुई।
तलाशी में क्या बरामद हुआ और आगे क्या होगा?
नवंबर 2024 में आरोपियों के ठिकानों पर छापे में हस्तलिखित निवेश नोटबुक, संपत्ति के कागजात, तीसरे पक्षों की चेकबुक और एक रुपे डेबिट कार्ड बरामद हुआ। मामले की जांच जारी है और अभियोजन शिकायत अब पीएमएलए विशेष अदालत के समक्ष विचाराधीन है।
राष्ट्र प्रेस
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