आंध्र प्रदेश शराब परिवहन घोटाला: ईडी की छापेमारी में ₹94.5 लाख की घड़ियाँ, लग्जरी कार और कैश बरामद
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 11 जून 2026 को हैदराबाद के पाँच ठिकानों पर एक साथ छापेमारी करते हुए आंध्र प्रदेश शराब परिवहन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान एक लग्जरी कार, लगभग ₹94.5 लाख मूल्य की महँगी घड़ियाँ और बड़ी मात्रा में नकदी जब्त की गई। एजेंसी के अनुसार इस पूरे मामले में ₹195.33 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं की जाँच चल रही है।
छापेमारी में क्या-क्या मिला
ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह कार्रवाई की। जाँच एजेंसी ने केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी, डोंटिरेड्डी वासुदेव रेड्डी, विजया नरसिम्हा रेड्डी, वल्लू संदीप, करुमुरी नागेश्वर राव और करुमुरी सुनील कुमार से जुड़े परिसरों की तलाशी ली।
बरामदगी में नकदी और लग्जरी वस्तुओं के अलावा संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, संदिग्ध संयुक्त उद्यम समझौते और नकद लेनदेन से संबंधित कई अहम कागजात भी जब्त किए गए हैं।
घोटाले की जड़ें: टेंडर में हेरफेर का आरोप
ईडी की जाँच में कथित तौर पर सामने आया है कि आंध्र प्रदेश स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एपीएसबीसीएल) के शराब परिवहन टेंडरों की शर्तों में जानबूझकर बदलाव कर चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुँचाया गया। जाँच के अनुसार मेसर्स सिग्मा सप्लाई चेन सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और बाद में मेसर्स प्रसाद ट्रांसपोर्ट्स को ठेके दिलाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर की गई।
एजेंसी का आरोप है कि ये कंपनियाँ केवल नाममात्र की थीं, जबकि इनका वास्तविक संचालन और वित्तीय नियंत्रण अन्य लोगों के हाथों में था। परिवहन दर को कथित तौर पर औसतन ₹19.68 प्रति कार्टन से बढ़ाकर लगभग ₹35.57 प्रति कार्टन कर दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को सीधा नुकसान पहुँचा।
प्रमुख आरोपी और उनकी भूमिका
ईडी का दावा है कि केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी इस पूरे मामले में प्रमुख साजिशकर्ता के रूप में उभरे हैं। वहीं, एपीएसबीसीएल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक डोंटिरेड्डी वासुदेव रेड्डी पर अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग कर कथित अनियमितताओं को बढ़ावा देने का आरोप है।
जाँच में यह भी कथित तौर पर पता चला है कि शराब परिवहन व्यवस्था के ज़रिये अवैध लाभ कमाने के लिए एक संगठित नेटवर्क तैयार किया गया था, जिसमें कुछ प्रभावशाली लोगों और तत्कालीन अधिकारियों की कथित मिलीभगत थी।
जाँच की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह जाँच आंध्र प्रदेश सीआईडी द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर राज्य सरकार के अतिरिक्त सचिव (सतर्कता) की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। गौरतलब है कि यह मामला राज्य सरकार की सतर्कता शाखा की शिकायत से शुरू हुआ, जो इसे सामान्य भ्रष्टाचार की शिकायतों से अलग बनाता है।
आगे क्या होगा
ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं के विभिन्न पहलुओं की जाँच जारी है। एजेंसी के अनुसार आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब्त दस्तावेजों का विश्लेषण इस नेटवर्क की व्यापकता और संभावित राजनीतिक संबंधों पर नई रोशनी डाल सकता है।