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आंध्र प्रदेश शराब परिवहन घोटाला: ईडी की छापेमारी में ₹94.5 लाख की घड़ियाँ, लग्जरी कार और कैश बरामद

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आंध्र प्रदेश शराब परिवहन घोटाला: ईडी की छापेमारी में ₹94.5 लाख की घड़ियाँ, लग्जरी कार और कैश बरामद

सारांश

आंध्र प्रदेश के शराब परिवहन घोटाले में ईडी की कार्रवाई सिर्फ छापेमारी नहीं — यह ₹195.33 करोड़ के कथित नेटवर्क की परतें उघाड़ने की शुरुआत है। टेंडर में हेरफेर, शेल कंपनियाँ और कृत्रिम रूप से बढ़ाई गई परिवहन दरें — यह मामला राज्य की सरकारी खरीद व्यवस्था की कमज़ोरियों को उजागर करता है।

मुख्य बातें

ईडी ने 11 जून 2026 को हैदराबाद के 5 ठिकानों पर पीएमएलए के तहत छापेमारी की।
बरामदगी में ₹94.5 लाख मूल्य की महँगी घड़ियाँ, एक लग्जरी कार और बड़ी मात्रा में नकदी शामिल।
मामले में ₹195.33 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं की जाँच जारी है।
परिवहन दर कथित तौर पर ₹19.68 से बढ़ाकर ₹35.57 प्रति कार्टन की गई, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान।
केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी को प्रमुख साजिशकर्ता, एपीएसबीसीएल के तत्कालीन एमडी डोंटिरेड्डी वासुदेव रेड्डी पर पद के दुरुपयोग का आरोप।
जाँच आंध्र प्रदेश सीआईडी की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 11 जून 2026 को हैदराबाद के पाँच ठिकानों पर एक साथ छापेमारी करते हुए आंध्र प्रदेश शराब परिवहन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान एक लग्जरी कार, लगभग ₹94.5 लाख मूल्य की महँगी घड़ियाँ और बड़ी मात्रा में नकदी जब्त की गई। एजेंसी के अनुसार इस पूरे मामले में ₹195.33 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं की जाँच चल रही है।

छापेमारी में क्या-क्या मिला

ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह कार्रवाई की। जाँच एजेंसी ने केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी, डोंटिरेड्डी वासुदेव रेड्डी, विजया नरसिम्हा रेड्डी, वल्लू संदीप, करुमुरी नागेश्वर राव और करुमुरी सुनील कुमार से जुड़े परिसरों की तलाशी ली।

बरामदगी में नकदी और लग्जरी वस्तुओं के अलावा संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, संदिग्ध संयुक्त उद्यम समझौते और नकद लेनदेन से संबंधित कई अहम कागजात भी जब्त किए गए हैं।

घोटाले की जड़ें: टेंडर में हेरफेर का आरोप

ईडी की जाँच में कथित तौर पर सामने आया है कि आंध्र प्रदेश स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एपीएसबीसीएल) के शराब परिवहन टेंडरों की शर्तों में जानबूझकर बदलाव कर चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुँचाया गया। जाँच के अनुसार मेसर्स सिग्मा सप्लाई चेन सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और बाद में मेसर्स प्रसाद ट्रांसपोर्ट्स को ठेके दिलाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर की गई।

एजेंसी का आरोप है कि ये कंपनियाँ केवल नाममात्र की थीं, जबकि इनका वास्तविक संचालन और वित्तीय नियंत्रण अन्य लोगों के हाथों में था। परिवहन दर को कथित तौर पर औसतन ₹19.68 प्रति कार्टन से बढ़ाकर लगभग ₹35.57 प्रति कार्टन कर दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को सीधा नुकसान पहुँचा।

प्रमुख आरोपी और उनकी भूमिका

ईडी का दावा है कि केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी इस पूरे मामले में प्रमुख साजिशकर्ता के रूप में उभरे हैं। वहीं, एपीएसबीसीएल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक डोंटिरेड्डी वासुदेव रेड्डी पर अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग कर कथित अनियमितताओं को बढ़ावा देने का आरोप है।

जाँच में यह भी कथित तौर पर पता चला है कि शराब परिवहन व्यवस्था के ज़रिये अवैध लाभ कमाने के लिए एक संगठित नेटवर्क तैयार किया गया था, जिसमें कुछ प्रभावशाली लोगों और तत्कालीन अधिकारियों की कथित मिलीभगत थी।

जाँच की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जाँच आंध्र प्रदेश सीआईडी द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर राज्य सरकार के अतिरिक्त सचिव (सतर्कता) की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। गौरतलब है कि यह मामला राज्य सरकार की सतर्कता शाखा की शिकायत से शुरू हुआ, जो इसे सामान्य भ्रष्टाचार की शिकायतों से अलग बनाता है।

आगे क्या होगा

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं के विभिन्न पहलुओं की जाँच जारी है। एजेंसी के अनुसार आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब्त दस्तावेजों का विश्लेषण इस नेटवर्क की व्यापकता और संभावित राजनीतिक संबंधों पर नई रोशनी डाल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो देश के कई राज्यों में दोहराया जाता रहा है। ₹19.68 से ₹35.57 प्रति कार्टन की दर वृद्धि — लगभग 80% की उछाल — बिना किसी पारदर्शी औचित्य के हुई, जो टेंडर प्रक्रिया की खामियों का सीधा नतीजा है। असली सवाल यह है कि एपीएसबीसीएल जैसी सरकारी संस्था में इतने बड़े पैमाने पर हेरफेर कितने समय तक अनदेखा रहा और किसकी निगरानी में। जब्त दस्तावेजों और संयुक्त उद्यम समझौतों का विश्लेषण यह तय करेगा कि यह नेटवर्क कितना गहरा है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश शराब परिवहन घोटाला क्या है?
यह एपीएसबीसीएल के शराब परिवहन टेंडरों में कथित हेरफेर का मामला है, जिसमें चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुँचाने और परिवहन दरें कृत्रिम रूप से बढ़ाकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाने का आरोप है। ईडी के अनुसार इस मामले में ₹195.33 करोड़ की वित्तीय अनियमितताएँ हैं।
ईडी ने छापेमारी में क्या बरामद किया?
ईडी ने हैदराबाद के पाँच ठिकानों पर छापेमारी में ₹94.5 लाख मूल्य की महँगी घड़ियाँ, एक लग्जरी कार और बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की। इसके अलावा संपत्ति दस्तावेज, संदिग्ध संयुक्त उद्यम समझौते और नकद लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण कागजात भी जब्त किए गए।
इस मामले में किन लोगों पर जाँच हो रही है?
ईडी ने केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी, डोंटिरेड्डी वासुदेव रेड्डी (एपीएसबीसीएल के तत्कालीन एमडी), विजया नरसिम्हा रेड्डी, वल्लू संदीप, करुमुरी नागेश्वर राव और करुमुरी सुनील कुमार से जुड़े परिसरों की तलाशी ली है। केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी को एजेंसी ने प्रमुख साजिशकर्ता बताया है।
ईडी की जाँच की शुरुआत कैसे हुई?
ईडी ने यह जाँच आंध्र प्रदेश सीआईडी द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की। यह एफआईआर राज्य सरकार के अतिरिक्त सचिव (सतर्कता) की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज हुई थी।
आगे इस मामले में क्या होने की संभावना है?
ईडी ने संकेत दिया है कि मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं के विभिन्न पहलुओं की जाँच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं। जब्त दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद गिरफ्तारियाँ या संपत्ति कुर्की की कार्रवाई भी संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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