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आंध्र प्रदेश शराब परिवहन घोटाला: ईडी ने पूर्व मंत्री करुमुरी नागेश्वर राव को गिरफ्तार किया, ₹195 करोड़ के घोटाले में 15 दिन की न्यायिक हिरासत

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आंध्र प्रदेश शराब परिवहन घोटाला: ईडी ने पूर्व मंत्री करुमुरी नागेश्वर राव को गिरफ्तार किया, ₹195 करोड़ के घोटाले में 15 दिन की न्यायिक हिरासत

सारांश

आंध्र प्रदेश के ₹195.33 करोड़ के शराब परिवहन घोटाले में ईडी ने पूर्व मंत्री करुमुरी वेंकट नागेश्वर राव को गिरफ्तार कर लिया है। फ्रंट कंपनियों, बढ़े-चढ़े इनवॉइस और राजनीतिक रसूख के ज़रिए सरकारी खजाने को लूटने का यह मामला अब सीधे एक पूर्व जनप्रतिनिधि तक पहुँच गया है।

मुख्य बातें

ईडी ने 23 अगस्त को पूर्व मंत्री करुमुरी वेंकट नागेश्वर राव को पीएमएलए 2002 के तहत गिरफ्तार किया।
24 अगस्त को नामपल्ली की विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।
घोटाले से सरकारी खजाने को ₹195.33 करोड़ का नुकसान होने का आरोप है।
6 अगस्त को ₹37.79 करोड़ की संपत्तियाँ अटैच; 7 अगस्त को पहली अभियोजन शिकायत दायर।
इससे पहले 11 जून और 18 जून को मामले के अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
अवैध कमाई से कथित तौर पर लग्जरी वाहन, संपत्ति और राजनीतिक फंडिंग की गई।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 अगस्त 2026 को आंध्र प्रदेश के चर्चित एपीएसबीसीएल शराब परिवहन घोटाले में पूर्व नागरिक आपूर्ति मंत्री एवं पूर्व विधायक करुमुरी वेंकट नागेश्वर राव को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत गिरफ्तार किया। 24 अगस्त को उन्हें नामपल्ली, हैदराबाद की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उन्हें 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह घोटाला सरकारी खजाने को ₹195.33 करोड़ के नुकसान से जुड़ा है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जाँच आंध्र प्रदेश सरकार के अतिरिक्त सचिव (सतर्कता) की शिकायत पर सीआईडी, आंध्र प्रदेश द्वारा आईपीसी और बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जाँच का केंद्र आंध्र प्रदेश राज्य बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एपीएसबीसीएल) के शराब परिवहन टेंडर में हुई कथित धाँधली है।

घोटाले का तरीका: फ्रंट कंपनियाँ और टेंडर हेरफेर

ईडी की जाँच के अनुसार, एपीएसबीसीएल के शराब परिवहन टेंडर की शर्तें जानबूझकर मेसर्स सिग्मा सप्लाई चेन सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (एसएससीएसपीएल) और बाद में मेसर्स प्रसाद ट्रांसपोर्ट्स के हित में बदली गई थीं। जाँच एजेंसी का कहना है कि ये कंपनियाँ महज फ्रंट कंपनियाँ थीं, जबकि वास्तविक परिचालन और वित्तीय नियंत्रण केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी, डोंटीरेड्डी वासुदेवा रेड्डी और उनके सहयोगियों के पास था।

ईडी के अनुसार, केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी, तुकेकुला ईश्वर किरण कुमार रेड्डी और अंजनी कुमार ने एपीएसबीसीएल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक डोंटीरेड्डी वासुदेवा रेड्डी के साथ मिलकर प्रचलित बाज़ार दरों से काफी अधिक दरों पर टेंडर हासिल किए। एसएससीएसपीएल का उपयोग टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने और अनुबंध हासिल करने के लिए किया गया, जबकि वास्तविक परिवहन कार्य तुकेकुला ईश्वर किरण कुमार रेड्डी ने केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी की देखरेख में किया।

राव और उनके बेटे की कथित भूमिका

ईडी के अनुसार, करुमुरी वेंकट नागेश्वर राव और उनके पुत्र करुमुरी सुनील कुमार ने अपने राजनीतिक प्रभाव और सिंडिकेट सदस्यों के साथ निकट संबंधों का दुरुपयोग करते हुए सब-कॉन्ट्रैक्ट आवंटन पर नियंत्रण रखा और अवैध लाभ अर्जित किया। आरोप है कि उन्होंने मेसर्स सुदर्शन कंस्ट्रक्शन्स को एसएससीएसपीएल के डमी सब-कॉन्ट्रैक्टर के रूप में स्थापित किया। इस कंपनी ने एसएससीएसपीएल को बढ़े-चढ़े चालान (इनवॉइस) भेजकर धनराशि अपने खाते में डायवर्ट की, जिसे बाद में कथित तौर पर राव और उनके परिवार के निजी खातों में स्थानांतरित कर दिया गया।

ईडी के अनुसार, इस अवैध कमाई का उपयोग लग्जरी वाहन, महँगी घड़ियाँ, अचल संपत्ति की खरीद और राजनीतिक फंडिंग के लिए किया गया।

अब तक की कार्रवाई

इस मामले में ईडी पहले भी बड़ी कार्रवाई कर चुकी है। 11 जून को केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी और डोंटीरेड्डी वासुदेवा रेड्डी को गिरफ्तार किया गया था, जबकि 18 जून को करुमुरी सुनील कुमार की गिरफ्तारी हुई थी। 6 अगस्त को ₹37.79 करोड़ की संपत्तियाँ अटैच की गई थीं और 7 अगस्त को पहली अभियोजन शिकायत दायर की गई थी।

आगे क्या होगा

करुमुरी वेंकट नागेश्वर राव की 15 दिन की न्यायिक हिरासत के दौरान ईडी आगे की जाँच करेगी। इस मामले में अभियोजन शिकायत पहले ही दायर हो चुकी है, और विशेष पीएमएलए अदालत में सुनवाई जारी रहने की संभावना है। आलोचकों का कहना है कि यह गिरफ्तारी आंध्र प्रदेश में शराब कारोबार से जुड़े राजनीतिक-व्यावसायिक नेटवर्क की जाँच में एक निर्णायक मोड़ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ राजनीतिक रसूख और व्यावसायिक नेटवर्क मिलकर सार्वजनिक धन को निजी खातों में मोड़ते हैं। असली सवाल यह है कि क्या अभियोजन इतना मज़बूत होगा कि अदालत में टिक सके — क्योंकि पीएमएलए मामलों में अटैचमेंट और गिरफ्तारी के बाद दोषसिद्धि की दर अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करुमुरी वेंकट नागेश्वर राव को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
उन्हें आंध्र प्रदेश के एपीएसबीसीएल शराब परिवहन घोटाले में पीएमएलए 2002 के तहत 23 अगस्त को गिरफ्तार किया गया है। यह घोटाला सरकारी खजाने को ₹195.33 करोड़ के कथित नुकसान से जुड़ा है।
एपीएसबीसीएल शराब परिवहन घोटाला क्या है?
यह आंध्र प्रदेश राज्य बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शराब परिवहन टेंडर में कथित धाँधली का मामला है, जिसमें टेंडर की शर्तें चुनिंदा कंपनियों के पक्ष में बदली गईं और फ्रंट कंपनियों के ज़रिए सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। ईडी के अनुसार इससे सरकारी खजाने को ₹195.33 करोड़ का नुकसान हुआ।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हो चुके हैं?
11 जून को केसिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी और डोंटीरेड्डी वासुदेवा रेड्डी, 18 जून को करुमुरी सुनील कुमार और 23 अगस्त को करुमुरी वेंकट नागेश्वर राव को गिरफ्तार किया गया है। इस प्रकार अब तक कम से कम चार प्रमुख आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
ईडी ने इस मामले में संपत्ति अटैचमेंट कब की?
ईडी ने 6 अगस्त को इस मामले में ₹37.79 करोड़ की संपत्तियाँ अटैच कीं और 7 अगस्त को पहली अभियोजन शिकायत विशेष पीएमएलए अदालत में दायर की।
करुमुरी नागेश्वर राव की घोटाले में क्या भूमिका बताई जा रही है?
ईडी के अनुसार, उन्होंने और उनके बेटे करुमुरी सुनील कुमार ने राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर सब-कॉन्ट्रैक्ट आवंटन पर नियंत्रण रखा। मेसर्स सुदर्शन कंस्ट्रक्शन्स को डमी सब-कॉन्ट्रैक्टर के रूप में खड़ा कर बढ़े-चढ़े इनवॉइस के ज़रिए धन उनके परिवार के निजी खातों में कथित तौर पर ट्रांसफर किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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