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एनएसजी का पहला महिला कमांडो कन्वर्जन कोर्स मानेसर में शुरू, काउंटर-टेरर ऑपरेशन में बढ़ेगी महिलाओं की भूमिका

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एनएसजी का पहला महिला कमांडो कन्वर्जन कोर्स मानेसर में शुरू, काउंटर-टेरर ऑपरेशन में बढ़ेगी महिलाओं की भूमिका

सारांश

एनएसजी ने मानेसर में पहला महिला कमांडो कन्वर्जन कोर्स शुरू कर भारत की काउंटर-टेरर संरचना में नया अध्याय जोड़ा है। 12 सप्ताह का यह कोर्स राज्य पुलिस और CAPF की महिला कर्मियों को बंधक बचाव, हथियार संचालन और सामरिक हस्तक्षेप में दक्ष बनाएगा — और देशभर में ऑपरेशनल क्षमता का नया नेटवर्क खड़ा करेगा।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) ने 24 अगस्त 2026 को मानेसर में देश का पहला महिला कमांडो कन्वर्जन कोर्स (MCCC) शुरू किया।
कोर्स की अवधि 12 सप्ताह है; राज्य पुलिस बलों और CAPF की महिला कर्मी भाग ले रही हैं।
प्रशिक्षण में हथियार संचालन , बंधक बचाव , सामरिक हस्तक्षेप और आतंकवाद रोधी विशेष विषय शामिल हैं।
लक्ष्य देशभर में ऑपरेशनल क्षमता का व्यापक नेटवर्क तैयार करना और सुरक्षा बलों के बीच समान पेशेवर मानक विकसित करना है।
प्रशिक्षित कर्मी अपने-अपने बलों में लौटकर संस्थागत तैयारी और काउंटर-टेरर क्षमताओं को मजबूत करेंगी।

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) ट्रेनिंग अकादमी, मानेसर ने 24 अगस्त 2026 को देश का पहला महिला कमांडो कन्वर्जन कोर्स (MCCC) शुरू किया, जिसमें राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की महिला कर्मियों को आतंकवाद रोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा। 12 सप्ताह के इस गहन कार्यक्रम को भारत की आंतरिक सुरक्षा संरचना में महिला परिचालन क्षमता के विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।

कोर्स में क्या सिखाया जाएगा

एनएसजी के अनुसार, 12 हफ्तों के इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को शारीरिक दक्षता, हथियार संचालन और निशानेबाजी, सामरिक हस्तक्षेप (Tactical Intervention), बंधक बचाव (Hostage Rescue) और आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़े अन्य विशेष विषयों में गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। पाठ्यक्रम का ढाँचा एनएसजी की उसी विशेषज्ञता पर आधारित है जो अब तक केवल पुरुष कमांडो को उपलब्ध थी।

व्यापक नेटवर्क बनाने की रणनीति

एनएसजी का कहना है कि यह पहल केवल व्यक्तिगत प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। विभिन्न सुरक्षा बलों की प्रशिक्षित महिला कर्मियों को एनएसजी की विशेष आतंकवाद रोधी विशेषज्ञता से जोड़कर देशभर में ऑपरेशनल क्षमता का एक व्यापक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। इससे सुरक्षा बलों के बीच समान पेशेवर मानक विकसित होंगे और आपसी समन्वय में भी सुधार होगा।

आम जनता और सुरक्षा तंत्र पर असर

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये महिला कर्मी अपने-अपने बलों में वापस लौटकर उन्नत कौशल और परिचालन अनुभव का उपयोग करेंगी। यह ऐसे समय में आया है जब देश की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियाँ तेज़ी से बदल रही हैं और सुरक्षा बलों में विविधता तथा विशेषज्ञता दोनों की माँग बढ़ रही है। गौरतलब है कि महिला कर्मियों की ऑपरेशनल तैनाती अब तक मुख्यतः सहायक भूमिकाओं तक सीमित रही है — यह कोर्स उस परंपरा को बदलने का प्रयास है।

सशक्तिकरण का प्रतीक

एनएसजी के अनुसार, पहला MCCC सुरक्षा सेवाओं में महिलाओं की संख्यात्मक भागीदारी बढ़ाने से कहीं आगे जाता है — यह उन्हें विशेष और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाने के लिए परिचालन रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इस पहल से संस्थागत तैयारी मजबूत होगी और देशभर में आतंकवाद विरोधी क्षमताओं का विस्तार होगा।

आगे क्या होगा

कोर्स के सफल समापन के बाद यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि इन प्रशिक्षित कर्मियों को वास्तविक काउंटर-टेरर ऑपरेशन में किस हद तक शामिल किया जाता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल तभी सार्थक होगी जब इसे नियमित और संस्थागत स्वरूप दिया जाए, न कि एकबारगी प्रयोग के रूप में छोड़ दिया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या ये प्रशिक्षित महिला कर्मी वास्तविक काउंटर-टेरर ऑपरेशन में तैनात की जाएंगी या केवल सहायक भूमिकाओं तक सीमित रहेंगी। भारत के सुरक्षा बलों में महिलाओं के लिए पहले भी कई 'पहली बार' की घोषणाएँ हुई हैं, लेकिन संस्थागत अनुसरण अक्सर कमज़ोर रहा है। यह कोर्स तभी परिवर्तनकारी साबित होगा जब MCCC को नियमित कैलेंडर में शामिल किया जाए और प्रशिक्षित कर्मियों की ऑपरेशनल तैनाती की पारदर्शी निगरानी हो।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएसजी का महिला कमांडो कन्वर्जन कोर्स क्या है?
यह राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) द्वारा मानेसर स्थित ट्रेनिंग अकादमी में शुरू किया गया 12 सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें राज्य पुलिस और CAPF की महिला कर्मियों को आतंकवाद रोधी अभियानों के लिए कमांडो स्तर पर तैयार किया जाता है। यह अपनी तरह का देश का पहला ऐसा कोर्स है।
इस कोर्स में कौन-कौन से विषय पढ़ाए जाएंगे?
प्रतिभागियों को शारीरिक प्रशिक्षण, हथियार संचालन और निशानेबाजी, सामरिक हस्तक्षेप (Tactical Intervention), बंधक बचाव (Hostage Rescue) और आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़े अन्य विशेष विषयों में गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस कोर्स से देश की सुरक्षा व्यवस्था को क्या फायदा होगा?
प्रशिक्षित महिला कर्मी अपने-अपने बलों में लौटकर उन्नत कौशल और परिचालन अनुभव का उपयोग करेंगी, जिससे देशभर में आतंकवाद विरोधी क्षमताओं का विस्तार होगा। इससे सुरक्षा बलों के बीच समान पेशेवर मानक और बेहतर समन्वय भी सुनिश्चित होगा।
इस कोर्स में कौन भाग ले सकती हैं?
राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की महिला कर्मी इस कोर्स में भाग लेने के लिए पात्र हैं। कोर्स का उद्देश्य विभिन्न बलों की महिला कर्मियों को एनएसजी की विशेष आतंकवाद रोधी विशेषज्ञता से जोड़ना है।
क्या यह पहल महिलाओं की भूमिका को सुरक्षा बलों में बदलेगी?
एनएसजी के अनुसार, यह कोर्स महिलाओं को केवल सहायक भूमिकाओं तक सीमित न रखकर विशेष और चुनौतीपूर्ण परिचालन जिम्मेदारियाँ निभाने के लिए सक्षम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालाँकि इसका दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इन कर्मियों को वास्तविक ऑपरेशन में किस हद तक तैनात किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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