आंध्र प्रदेश शराब घोटाले में ईडी ने 441 करोड़ रुपए की संपत्ति की कुर्की की
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने 441.63 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की हैं।
- घोटाले में प्रमुख आरोपी केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी हैं।
- यह कार्रवाई पीएमएलए के तहत की गई है।
- जांच में 4 हजार करोड़ रुपए के नुकसान का आरोप है।
- आगे की जांच जारी है।
हैदराबाद, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आंध्र प्रदेश शराब घोटाले से जुड़े केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी, उनके परिवार और अन्य व्यक्तियों की कुल 441.63 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियां कुर्क की हैं।
इन संपत्तियों में राजशेखर रेड्डी, उनके परिवार और उनसे जुड़े कंपनियों, बूनेटी चाणक्य, डोंथिरेड्डी वासुदेव रेड्डी के रिश्तेदार और अन्य व्यक्तियों की प्रॉपर्टीज शामिल हैं, जो प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के अंतर्गत अटैच की गई हैं।
जांच एजेंसी ने बताया कि अटैच की गई संपत्तियां बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट और अचल संपत्तियों के रूप में हैं। ईडी ने आंध्र प्रदेश सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी की शिकायत पर आंध्र प्रदेश सीआईडी द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी, जिसमें सरकारी खजाने को 4 हजार करोड़ रुपए के नुकसान का आरोप लगाया गया था।
जांच में यह पता चला कि हैदराबाद में विभिन्न स्थानों पर फिजिकल कैश किकबैक इकट्ठा किया गया था, जिसे बाद में सिंडिकेट के कैश हैंडलर्स द्वारा प्रबंधित किया गया। अब तक, ईडी ने 1,048.45 करोड़ रुपए के मनी ट्रेल का पता लगाया है, जो रिश्वत के रूप में था।
यह रिश्वत कथित तौर पर कई डिस्टिलरी को कैश, सोना और अन्य तरीकों से देने के लिए मजबूर किया गया था। एजेंसी ने बताया कि शराब सिंडिकेट द्वारा डिस्टिलरी पर नियंत्रण और ऑपरेशन के अलावा शराब परिवहन से भी गैर-कानूनी लाभ कमाया गया।
जांच में यह भी पाया गया कि अवैध कमाई का उपयोग अचल संपत्ति खरीदने और शराब सिंडिकेट के सदस्यों की निजी कमाई के लिए किया गया। यह देखा गया कि आरोपियों ने जुर्म से हुई कमाई का एक बड़ा हिस्सा छिपाया या नष्ट किया। ईडी ने आगे की जांच जारी रखी है।
2019 से पहले, आंध्र प्रदेश में शराब व्यापार को एक ट्रांसपेरेंट और ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर सिस्टम के माध्यम से प्रबंधित किया जाता था, जिससे एक वेरिफाइड इलेक्ट्रॉनिक ऑडिट ट्रेल बनता था। लेकिन 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद, नई सरकार ने सरकारी रिटेल आउटलेट्स के जरिए शराब के व्यापार पर मोनोपॉली कर ली।
एक कथित साजिश के तहत, ऑटोमेटेड सिस्टम को जानबूझकर बंद कर दिया गया और एक मैनुअल सिस्टम लागू किया गया, जिसने एपीएसबीसीएल अधिकारियों को ऑर्डर फॉर सप्लाई (ओएफएस) जारी करने का अधिकार दिया।
ईडी ने आरोप लगाया कि मैन्युअल ओएफएस प्रणाली का दुरुपयोग करके कुछ विशेष ब्रांड्स को अनियमित आवंटन दिए गए, जबकि अन्य ब्रांड्स को हटा दिया गया।
सिंडिकेट ने बेसिक कीमतों को बढ़ाकर एक जैसे दिखने वाले ब्रांड्स लाने की कोशिश की, जिससे डिस्टिलरीज़ को सरप्लस मार्जिन बनाने में मदद मिली।
जांच में यह भी सामने आया कि डिस्टिलरीज़ को ओएफएस अप्रूवल पाने के लिए हर केस के लिए बेसिक कीमत का 15 से 20 प्रतिशत रिश्वत देने के लिए मजबूर किया गया। जो निर्माता ऐसा करने से मना करते थे, उनके खिलाफ दबाव डाला जाता था।
ईडी ने कहा कि रिश्वत की मांग और वसूली से जुड़ी बातचीत एन्क्रिप्टेड वीओआईपी कॉल और सिग्नल जैसे एप्लिकेशन के माध्यम से की गई थी। केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी ने शराब सिंडिकेट के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर आंध्र प्रदेश में शराब खरीदने और वितरण के सिस्टम में करोड़ों का घोटाला किया।
ईडी के अनुसार, इस घोटाले में एपीएसबीसीएल की खरीद प्रक्रिया पर नियंत्रण और हेरफेर शामिल था, जिससे सरकारी खजाने को करीब 3,500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
ईडी ने आरोप लगाया कि केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी ने अन्य सदस्यों के साथ मिलकर करीब 3,500 करोड़ रुपए की रिश्वत ली।