हरित प्रौद्योगिकी पर बांग्लादेश का ध्यान, यही है भविष्य: हाफिजुर रहमान
सारांश
Key Takeaways
- इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ रही है।
- हरित प्रौद्योगिकी का महत्व बढ़ता जा रहा है।
- ग्राहक अब कार्बन उत्सर्जन के प्रति जागरूक हो रहे हैं।
- भारत का लक्ष्य 2030 तक नए वाहनों की 30%25 बिक्री इलेक्ट्रिक करना है।
- वैश्विक स्तर पर ईवी अपनाने में तेजी आई है।
ढाका, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। रनर ग्रुप ऑफ कंपनीज के अध्यक्ष हाफिजुर रहमान खान ने शनिवार को राष्ट्र प्रेस से संवाद करते हुए कहा कि भविष्य के बाज़ार में धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों और हरित प्रौद्योगिकी (ग्रीन टेक्नोलॉजी) जैसे डीएमआई तकनीक और पीएचईवी वाहनों की ओर रुझान बढ़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यही भविष्य है। इसीलिए ग्राहक भी अगली पीढ़ी के लिए कार्बन उत्सर्जन के प्रति जागरूक हो रहे हैं।
हाफिजुर रहमान खान ने इस विषय में कहा कि कीमत विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है। हमारे पास कई प्रकार के मॉडल उपलब्ध हैं, जिनकी कीमतें भी भिन्न हैं। यह पूरी तरह से ग्राहक की पसंद पर निर्भर करता है। कुछ ग्राहक कम कीमत वाले विकल्पों की तलाश में नहीं होते। उन्होंने कहा कि हम दोपहिया और तिपहिया वाहनों का निर्माण करते हैं, साथ ही वाणिज्यिक वाहनों और बीवाईडी कारों की असेंबली भी करते हैं। इस प्रकार, हम हर क्षेत्र में धीरे-धीरे नई तकनीक की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
भारत तेजी से इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और ग्रीन टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रहा है। मार्च 2026 तक यह क्रांति और भी मजबूत होने की संभावना है। 2030 तक, सरकार का लक्ष्य है कि कुल नए वाहनों की 30 प्रतिशत बिक्री इलेक्ट्रिक हो जाए, और इस दिशा में प्रगति अच्छी दिखाई दे रही है। केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमार स्वामी ने 25 फरवरी को कहा था कि स्पष्ट नीतिगत दिशा-निर्देश और उद्योग की मजबूत भागीदारी के साथ, भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन के लिए एक अग्रणी वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में बढ़ सकता है।
दुनिया इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की ओर इसलिए भाग रही है क्योंकि यह एक बड़ा परिवर्तन है। जो पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, तकनीक और नीतियों से जुड़ा है। मार्च 2026 तक वैश्विक स्तर पर ईवी अपनाने में तेजी आई है, लेकिन कुछ स्थानों (जैसे अमेरिका) में थोड़ी मंदी भी देखी जा रही है।