क्या ईटानगर में आईटीसी घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई हुई?

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क्या ईटानगर में आईटीसी घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई हुई?

सारांश

ईटानगर में प्रवर्तन निदेशालय ने आईटीसी घोटाले की जांच में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसमें राजस्थान की औद्योगिक संपत्ति को अटैच किया गया है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की गई है, जिससे हड़कंप मच गया है। आगे की जांच में संभावित और खुलासों की उम्मीद है।

Key Takeaways

  • ईडी ने आईटीसी से जुड़े घोटाले में कार्रवाई की।
  • राजस्थान की औद्योगिक संपत्ति को अटैच किया गया।
  • अटैच की गई संपत्ति की कीमत 3.30 करोड़ रुपए है।
  • जांच में कई फर्जी कंपनियों का नाम सामने आया।
  • मामले में आगे की जांच जारी है।

ईटानगर, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के ईटानगर सब-जोनल ऑफिस ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से संबंधित एक बड़े कथित घोटाले की जांच के तहत महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। एजेंसी ने राजस्थान के खैरथल-तिजारा स्थित खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 1,195 वर्ग गज की औद्योगिक संपत्ति को अस्थायी रूप से अटैच किया है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 3.30 करोड़ रुपए है।

यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 5(1) के तहत 7 जनवरी 2026 को जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के माध्यम से मेसर्स प्रिशा एक्जिम और अनमोल जैन के मामले में की गई है।

ईडी ने यह जांच भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी, जो अनुसूचित अपराधों की श्रेणी में आती हैं। जांच में पता चला है कि मेसर्स श्रीराम एंटरप्राइजेज ने बिना वास्तविक माल की आपूर्ति किए फर्जी इनवॉइस जारी कर लगभग 116 करोड़ रुपए का फर्जी आईटीसी बनाया। यह आईटीसी केवल कागजों पर दिखाए गए लेनदेन के माध्यम से प्राप्त किया गया, जिसका वास्तविक कारोबार से कोई संबंध नहीं था।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस फर्जी आईटीसी को कई गैर-मौजूद और शेल कंपनियों के नेटवर्क के माध्यम से व्यवस्थित रूप से लेयरिंग और रूटिंग की गई। इनमें मेसर्स नेमचंद सिंह ट्रेडर्स, मेसर्स योगेश ट्रेडर्स, मेसर्स श्री महालक्ष्मी एंटरप्राइजेज और मेसर्स टेक्नोफैब इंटरनेशनल शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, ये सभी संस्थाएं अपने घोषित पते पर मौजूद नहीं पाईं और इन्हें भेजे गए समन भी तामील नहीं हो सके, जिससे इनके फर्जी होने की पुष्टि होती है।

ईडी की जांच में यह भी पाया गया कि मेसर्स टेक्नोफैब इंटरनेशनल ने धोखाधड़ी से आईटीसी का दावा किया और काल्पनिक आईटीसी को आगे ट्रांसफर करने के लिए एक मध्यस्थ की भूमिका निभाई। इस कंपनी को एक गैर-मौजूद संस्था के रूप में चिह्नित किया गया है। जांच के अनुसार, अनमोल जैन द्वारा नियंत्रित मेसर्स प्रिशा एक्जिम ने अंततः इसी काल्पनिक संस्था से बिना किसी वास्तविक माल की आपूर्ति के 7.39 करोड़ रुपए का फर्जी आईटीसी प्राप्त किया और उसका इस्तेमाल किया। इस आईटीसी का उपयोग मनगढ़ंत इनवॉइस और ई-वे बिल के आधार पर जीएसटी देनदारियों के भुगतान के लिए किया गया।

ईडी की आगे की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि मेसर्स प्रिशा एक्जिम द्वारा कथित सप्लायरों को ट्रांसफर किए गए फंड को देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित कई शेल कंपनियों में डायवर्ट किया गया। इन कंपनियों के पास न तो कोई वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि थी, न ही बुनियादी ढांचा और न ही कोई वास्तविक वाणिज्यिक लेनदेन, इसके बावजूद इनके जरिए भारी टर्नओवर दिखाया गया। ईडी के अनुसार, यह पूरे नेटवर्क के माध्यम से अपराध से अर्जित धन की सुनियोजित लेयरिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की ओर इशारा करता है।

जांच में यह भी सामने आया कि जिन अचल संपत्तियों को अटैच किया गया है, वे मेसर्स प्रिशा इलेक्ट्रिकल्स के नाम पर दर्ज हैं। यह एक प्रोप्राइटरशिप फर्म है, जिसका पूर्ण स्वामित्व और नियंत्रण अनमोल जैन के पास है। ईडी का मानना है कि इन संपत्तियों का अधिग्रहण भी कथित तौर पर अपराध से अर्जित आय के जरिए किया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले समय में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

Point of View

बल्कि यह सुनिश्चित करेगी कि ऐसे अपराध करने वाले व्यक्तियों को सजा मिले। देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है।
NationPress
09/01/2026

Frequently Asked Questions

ईडी ने किस मामले में कार्रवाई की है?
ईडी ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से संबंधित एक बड़े कथित घोटाले की जांच के तहत कार्रवाई की है।
अटैच की गई संपत्ति की कीमत क्या है?
अटैच की गई संपत्ति की अनुमानित कीमत लगभग 3.30 करोड़ रुपए है।
यह कार्रवाई किस कानून के तहत की गई है?
यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है।
कौन-कौन सी कंपनियों का नाम इस मामले में आया है?
इस मामले में मेसर्स श्रीराम एंटरप्राइजेज, मेसर्स प्रिशा एक्जिम, और मेसर्स टेक्नोफैब इंटरनेशनल सहित कई कंपनियों का नाम आया है।
जांच का अगला कदम क्या होगा?
जांच का अगला कदम संभावित और खुलासों की ओर अग्रसर होगा, जिसमें और भी साक्ष्य इकट्ठा किए जाएंगे।
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