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हीरा ग्रुप घोटाला: ED ने नौहेरा शेख की निजी सहायक नाजनीन अंसारी को हैदराबाद से गिरफ्तार किया

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हीरा ग्रुप घोटाला: ED ने नौहेरा शेख की निजी सहायक नाजनीन अंसारी को हैदराबाद से गिरफ्तार किया

सारांश

हीरा ग्रुप निवेश धोखाधड़ी मामले में ED की कार्रवाई का दायरा बढ़ा। नौहेरा शेख की निजी सहायक नाजनीन अंसारी उर्फ आबिदा को PMLA की धारा 19 के तहत हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि वह कुर्क संपत्तियों के दुरुपयोग, नए निवेशकों को फँसाने और सर्वोच्च न्यायालय के नीलामी आदेशों में बाधा डालने में सक्रिय रूप से शामिल थी।

मुख्य बातें

ED ने 3 जून को हीरा ग्रुप मामले में नाजनीन अंसारी उर्फ आबिदा को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी PMLA, 2002 की धारा 19 के तहत हुई; जाँच धारा 3 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की।
ED के अनुसार, वह हीरा ग्रुप प्रमुख नौहेरा शेख की निजी सहायक थी।
जाँच तेलंगाना और आंध्र प्रदेश पुलिस की कई FIR के आधार पर शुरू की गई थी।
आरोप: कुर्क संपत्तियों पर कब्जा, किराया वसूली और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्देशित नीलामी में बाधा।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने मंगलवार, 3 जून को हीरा ग्रुप से जुड़े बहुचर्चित निवेश धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नाजनीन अंसारी उर्फ आबिदा को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत की गई है। ED के अनुसार, नाजनीन हीरा ग्रुप की प्रमुख नौहेरा शेख की निजी सहायक के रूप में काम करती थी और कथित तौर पर कुर्क संपत्तियों के दुरुपयोग में सक्रिय भूमिका निभा रही थी।

मामले की पृष्ठभूमि

ED ने यह जाँच तेलंगाना पुलिस और आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा नौहेरा शेख, हीरा ग्रुप की कंपनियों तथा अन्य के विरुद्ध दर्ज की गई कई FIR के आधार पर शुरू की थी। आरोप है कि इन कंपनियों ने कथित तौर पर धोखाधड़ी वाली निवेश योजनाओं के माध्यम से देशभर के निवेशकों से भारी जमा राशि एकत्र की।

नाजनीन अंसारी की कथित भूमिका

ED की जाँच के अनुसार, नाजनीन कुर्क की गई संपत्तियों को अपने कब्जे में रखकर उनसे किराया वसूलती थी और हीरा ग्रुप में निवेश के लिए नए पीड़ितों को कथित रूप से उकसाने का काम करती थी। एजेंसी का दावा है कि वह विभिन्न अधिकारियों को गुमराह करने में भी शामिल रही।

जाँच में सामने आया कि वह 'अपराध से अर्जित संपत्ति' को अपने कब्जे में रखने, उसका उपयोग करने, छिपाने और वैध दिखाने जैसी गतिविधियों में संलिप्त थी। ED के अनुसार, उसने इन संपत्तियों से और अधिक संपत्ति बनाने में भी सहायक भूमिका निभाई, जो PMLA की धारा 3 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आता है।

सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की कथित अवहेलना

ED का कहना है कि नाजनीन के कब्जे में कई ऐसी कुर्क संपत्तियाँ थीं, जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में नीलामी के लिए रखा गया था। एजेंसी के अनुसार, उसे अदालत के आदेशों की पूरी जानकारी होने के बावजूद उसने नीलामी प्रक्रिया में जानबूझकर बाधा डाली।

आरोप है कि उसने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को निर्देश दिया कि वे किसी भी कुर्क संपत्ति का निरीक्षण न होने दें और उन्हें 'दागरहित' संपत्तियों के रूप में पेश करें।

एजेंसी का संदेश

ED ने अपने बयान में दोहराया कि कानूनी कार्यवाही से बचने, जाँच में हस्तक्षेप करने या नीलामी प्रक्रिया में बाधा डालने का कोई भी प्रयास सफल नहीं होगा। यह गिरफ्तारी हीरा ग्रुप मामले में कार्रवाई की नई कड़ी मानी जा रही है, जो वर्षों से देश के सबसे चर्चित निवेश धोखाधड़ी मामलों में से एक है। आगामी दिनों में मामले में अन्य सहयोगियों से पूछताछ और संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह गिरफ्तारी संकेत देती है कि ED अब मुख्य आरोपी से आगे बढ़कर सहायक नेटवर्क पर निशाना साध रहा है — जो PMLA जाँचों में पहले अक्सर पकड़ से बाहर रहता था। असली सवाल यह है कि क्या कुर्क संपत्तियों की नीलामी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में होना था, अब वास्तव में रफ्तार पकड़ेगी। पिछले अनुभव बताते हैं कि ऐसे मामलों में निवेशकों को पैसा लौटाने की प्रक्रिया गिरफ्तारियों से कहीं धीमी चलती है। जब तक नीलामी से प्राप्त राशि पीड़ितों तक नहीं पहुँचती, तब तक यह कार्रवाई प्रतीकात्मक से अधिक नहीं मानी जाएगी।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हीरा ग्रुप मामला क्या है?
यह एक कथित निवेश धोखाधड़ी मामला है, जिसमें हीरा ग्रुप की कंपनियों और उनकी प्रमुख नौहेरा शेख पर कथित तौर पर धोखाधड़ी वाली योजनाओं के माध्यम से निवेशकों से भारी जमा राशि एकत्र करने का आरोप है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश पुलिस की कई FIR के आधार पर ED ने PMLA के तहत जाँच शुरू की थी।
नाजनीन अंसारी कौन हैं और उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया?
नाजनीन अंसारी उर्फ आबिदा कथित तौर पर नौहेरा शेख की निजी सहायक के रूप में काम करती थीं। ED के अनुसार, वह कुर्क संपत्तियों पर कब्जा रखने, किराया वसूलने, नए निवेशकों को उकसाने और नीलामी प्रक्रिया में बाधा डालने में सक्रिय रूप से शामिल थीं, जिसके आधार पर PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तारी हुई।
PMLA की धारा 19 और धारा 3 का इस मामले में क्या महत्व है?
धारा 19 ED को मनी लॉन्ड्रिंग के संदिग्धों को गिरफ्तार करने का अधिकार देती है, जबकि धारा 3 'अपराध से अर्जित संपत्ति' को छिपाने, रखने या वैध दिखाने को मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के रूप में परिभाषित करती है। ED का दावा है कि नाजनीन की गतिविधियाँ दोनों धाराओं के दायरे में आती हैं।
सर्वोच्च न्यायालय का इस मामले में क्या रोल है?
सर्वोच्च न्यायालय ने हीरा ग्रुप की कुर्क संपत्तियों की नीलामी के लिए निर्देश दिए हैं, ताकि पीड़ित निवेशकों को राहत मिल सके। ED का आरोप है कि नाजनीन अंसारी ने अदालत के आदेशों की जानकारी होने के बावजूद नीलामी प्रक्रिया में जानबूझकर बाधा डाली।
इस गिरफ्तारी से आगे क्या होगा?
ED की जाँच आगे बढ़ने की संभावना है, जिसमें हीरा ग्रुप के अन्य सहयोगियों से पूछताछ और कुर्क संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया में तेज़ी शामिल हो सकती है। एजेंसी ने संकेत दिया है कि जाँच में हस्तक्षेप या नीलामी में बाधा डालने वाले किसी भी प्रयास पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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