पलानी मंदिर भूमि घोटाला: ₹100 करोड़ की जमीन ₹2 करोड़ में बेची, सीबी-सीआईडी ने 5 अधिकारियों से की पूछताछ
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के ऐतिहासिक पलानी दंडायुधपाणी स्वामी मंदिर से जुड़ी करीब ₹100 करोड़ मूल्य की भूमि के कथित फर्जी पंजीकरण मामले में क्राइम ब्रांच-क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीबी-सीआईडी) ने 18 जुलाई 2026 को जांच का दायरा व्यापक रूप से बढ़ा दिया। एजेंसी ने मंदिर प्रशासन से जुड़े पाँच अधिकारियों से विस्तृत पूछताछ की और डिंडीगुल सहित पाँच जिलों में तलाशी अभियान चलाया।
विवादित भूमि का ब्यौरा
जांच का केंद्र पलानी मंदिर की तलहटी स्थित पार्क रोड पर 1.40 एकड़ की वह भूमि है जो दंडापाणी स्वामी मठ ट्रस्ट की संपत्ति है। मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार इस ट्रस्ट का प्रबंधन पलानी मुरुगन मंदिर के संयुक्त आयुक्त ट्रस्टी के रूप में करते हैं और मंदिर प्रशासन ही इस भूमि का संचालन करता है। इस जमीन को हाल ही में श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग स्थल के रूप में विकसित किया गया था।
आरोप है कि इस महीने की शुरुआत में पलानी उप-पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालय में इस संपत्ति को महज ₹2 करोड़ में दो निजी व्यक्तियों के नाम पंजीकृत कर दिया गया — जबकि इसका बाजार मूल्य करीब ₹100 करोड़ आंका गया है।
मुख्य घटनाक्रम और एफआईआर
मंदिर के भूमि अनुभाग अधीक्षक मुरुगानंदम की शिकायत पर पुलिस ने तत्कालीन पलानी सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिकंदन, विलुप्पुरम के मुरुगादास, उदुमलपेट के पास पप्पनकुलम निवासी वेल्लाथुरई और डीकेएन पुदुर के सेतुपति के खिलाफ मामला दर्ज किया।
मामले के उजागर होने के बाद उप-पंजीयक जस्टिन मणिकंदन और जिला पंजीयक ससिकला को निलंबित कर दिया गया। इसके साथ ही मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने विवादित पंजीकरण को अवैध घोषित करते हुए मामले की जांच सीबी-सीआईडी को सौंपने का रास्ता साफ कर दिया।
सीबी-सीआईडी की जांच कार्रवाई
जांच का नेतृत्व कर रहीं सीबी-सीआईडी अधीक्षक सजीथा ने डिंडीगुल स्थित कार्यालय में करीब चार घंटे तक पाँच लोगों से पूछताछ की। इनमें शिकायतकर्ता मुरुगानंदम, मंदिर अधीक्षक गणपति और शिवनेसन, मंदिर भूमि मामलों को देखने वाले सेवानिवृत्त तहसीलदार मारियप्पन तथा सेवानिवृत्त ग्राम प्रशासनिक अधिकारी (वीएओ) चिन्नासामी शामिल रहे।
सीबी-सीआईडी की टीमों ने डिंडीगुल, मदुरै, थेनी, रामनाथपुरम और विरुधुनगर जिलों में तलाशी अभियान चलाया। जांचकर्ताओं ने पलानी मंदिर कार्यालय से भूमि से जुड़े दस्तावेज एकत्र किए, विवादित संपत्ति का निरीक्षण किया और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड की भी जांच की। एक अन्य टीम ने पलानी सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले और विवादित पंजीकरण वाले दिन कार्यालय में आने-जाने वाले लोगों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की। पूर्व सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिकंदन के डिंडीगुल स्थित आवास पर भी तलाशी ली गई।
आरोपी फरार, और गिरफ्तारियाँ संभव
अधिकारियों के अनुसार, कथित खरीदार और विक्रेता फिलहाल फरार हैं और उनसे जल्द पूछताछ की जाएगी। सीबी-सीआईडी को संदेह है कि इस कथित भूमि घोटाले में कई अन्य लोगों की भी भूमिका हो सकती है। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु में मंदिर संपत्तियों के प्रबंधन और सरकारी निगरानी को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
आगे क्या होगा
आने वाले दिनों में और लोगों से पूछताछ किए जाने की संभावना है। मद्रास हाईकोर्ट पहले ही पंजीकरण को अवैध ठहरा चुका है, ऐसे में जांच एजेंसी का ध्यान अब उन तमाम कड़ियों को जोड़ने पर है जिनसे यह स्पष्ट हो सके कि ₹100 करोड़ की संपत्ति को ₹2 करोड़ में पंजीकृत कराने की साजिश कहाँ से और कैसे रची गई।