तमिलनाडु पोंजी घोटाला: ईडी ने ₹400 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 8 ठिकानों पर मारे छापे, लग्जरी कारें जब्त
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 17 जून 2026 को तमिलनाडु में ₹400 करोड़ के कथित पोंजी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चेन्नई, इरोड, कोयंबटूर और कृष्णागिरि जिलों में आठ कारोबारी एवं आवासीय परिसरों पर एकसाथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में दो लग्जरी वाहन, कई डिजिटल उपकरण और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
कार्रवाई का कानूनी आधार
ईडी के चेन्नई जोनल कार्यालय ने यह छापेमारी धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 17(1) के तहत की। जांच की नींव तमिलनाडु और कर्नाटक पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दर्ज कई प्राथमिकियों (एफआईआर) पर टिकी है।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय जांच एजेंसियाँ दक्षिण भारत में कृषि-निर्यात के नाम पर चलाई जा रही फर्जी निवेश योजनाओं पर शिकंजा कसने में जुटी हैं।
मुख्य आरोपी और नेटवर्क
ईडी की जांच के अनुसार, इस कथित पोंजी नेटवर्क का मास्टरमाइंड एस. नवीन कुमार है। उसके सहयोगियों में जीवलता, के. प्रभु, के. मथन कुमार, मुथुसेल्वम और जे. फ्रैंकलिन के नाम सामने आए हैं।
गिरोह पर आरोप है कि उसने प्याज, आलू और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात कारोबार में निवेश का झाँसा देकर लोगों को 200 प्रतिशत से अधिक रिटर्न का लालच दिया। इसके अलावा रिश्तेदारों और मित्रों को जोड़ने पर आकर्षक रेफरल कमीशन का प्रलोभन भी दिया जाता था — जो क्लासिक पोंजी संरचना की पहचान है।
फर्जी कंपनियों का जाल
जांच एजेंसी के अनुसार, निवेशकों से जुटाई गई रकम को विभिन्न बैंक खातों के ज़रिए इधर-उधर करने के लिए कई शेल कंपनियाँ बनाई गई थीं। इनमें एम/एस यूनिक एक्सपोर्ट्स, ईस्ट वैली एग्रो फार्म्स, यूनिक रबर इंडस्ट्रीज, यूनिक इंटरनेशनल ग्रुप, सारा एक्सपोर्ट्स, इंडो रशियन रेयर अर्थ मेटल्स और इंडो रशियन बिजनेस एसोसिएट्स शामिल हैं।
गौरतलब है कि 'इंडो रशियन' नाम का उपयोग संभवतः निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता का भ्रम देने के लिए किया गया।
धन का कथित दुरुपयोग
ईडी के अनुसार, अब तक की जांच में लगभग ₹400 करोड़ जनता से धोखाधड़ी कर जुटाए जाने के संकेत मिले हैं। यह रकम कथित तौर पर रियल एस्टेट में निवेश, फिक्स्ड डिपॉजिट, विदेशी लेन-देन और संबंधित कंपनियों को धन हस्तांतरण में लगाई गई।
छापेमारी में लैपटॉप, मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल उपकरणों के साथ-साथ अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए गए।
आगे की जांच
ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से नेटवर्क के और सदस्यों और संभावित विदेशी लिंक का खुलासा हो सकता है।