2 जुलाई 2026
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ईडी की 'ड्रीम मेकर्स ग्लोबल' पर बड़ी कार्रवाई: तमिलनाडु-केरल में 8 जगह छापे, पोंजी स्कीम में हजारों निवेशक ठगे

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ईडी की 'ड्रीम मेकर्स ग्लोबल' पर बड़ी कार्रवाई: तमिलनाडु-केरल में 8 जगह छापे, पोंजी स्कीम में हजारों निवेशक ठगे

सारांश

ईडी ने 'ड्रीम मेकर्स ग्लोबल' के खिलाफ तमिलनाडु और केरल में 8 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे। कंपनी पर आरोप है कि उसने सॉफ्टवेयर निवेश के नाम पर पोंजी स्कीम चलाई और 150 दिनों में पैसा दोगुना करने का वादा कर हजारों निवेशकों से करोड़ों रुपये ठगे।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 30 जून 2026 को तमिलनाडु और केरल में 8 स्थानों पर छापेमारी की।
कार्रवाई PMLA 2002 के तहत ड्रीम मेकर्स ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड (डीएमजीपीएल) के विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है।
कंपनी पर आरोप है कि उसने 150 दिनों में निवेश दोगुना करने का वादा कर जनता से करोड़ों रुपये जुटाए।
मुख्य आरोपियों में दिवंगत MD एस.
सतीश कुमार , निदेशक गुणवती और प्रबंधक मुगुंथन नायर शामिल हैं।
छापे में दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और संपत्ति विवरण जब्त; कई बैंक खाते पहले से फ्रीज ।
जांच तमिलनाडु पुलिस आर्थिक अपराध शाखा की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई; आगे की जांच जारी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 30 जून 2026 को ड्रीम मेकर्स ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड (डीएमजीपीएल) के विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत तमिलनाडु और केरल में 8 स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। कंपनी पर आरोप है कि उसने मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) और पोंजी स्कीम के जरिये हजारों निवेशकों से करोड़ों रुपये ऐंठे और 150 दिनों में निवेश दोगुना करने के झूठे वादे किए।

छापेमारी का दायरा और कानूनी आधार

यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई। तलाशी कोयंबटूर और कृष्णागिरी (तमिलनाडु) तथा मलप्पुरम और त्रिशूर (केरल) जिलों में डीएमजीपीएल से जुड़े परिसरों पर हुई। ईडी ने यह जांच तमिलनाडु पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की है।

कैसे चलाई गई यह धोखाधड़ी

ईडी के अनुसार, डीएमजीपीएल और उसके प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों ने कथित तौर पर सॉफ्टवेयर-संबंधित परियोजनाओं और पैकेजों में निवेश के अवसर दिखाकर जनता से करोड़ों रुपये जुटाए। निवेशकों को अत्यधिक रिटर्न और 150 दिनों के भीतर निवेश दोगुना होने का आश्वासन दिया गया। शुरुआत में विश्वास बनाने के लिए कुछ निवेशकों को रिटर्न का भुगतान किया गया, लेकिन बाद में कंपनी ने कथित तौर पर भुगतान में चूक की, जिससे पूरे क्षेत्र में हजारों जमाकर्ताओं को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।

मुख्य आरोपी कौन हैं

ईडी ने आरोप लगाया है कि कंपनी के दिवंगत प्रबंध निदेशक एस. सतीश कुमार, निदेशक गुणवती और प्रबंधक मुगुंथन नायर ने इस योजना के संचालन में केंद्रीय भूमिका निभाई। जांच के अनुसार, गुणवती और उनके पति सतीश कुमार संयुक्त रूप से कंपनी का प्रबंधन करते थे और जनता से जमा राशि एकत्र करते थे, जबकि मुगुंथन नायर कथित तौर पर प्रचार बैठकें आयोजित कर लोगों को झूठे मुनाफे का लालच देकर निवेश के लिए प्रेरित करते थे।

छापे में क्या मिला

तलाशी के दौरान अधिकारियों ने आपत्तिजनक दस्तावेज, डायरी, डिजिटल रिकॉर्ड और कथित अपराध की आय से खरीदी गई संपत्तियों के विवरण जब्त किए। ईडी ने बताया कि कमीशन और निवेश से प्राप्त बड़ी रकम का कथित तौर पर अचल संपत्तियों, वाहनों और अन्य व्यक्तिगत परिसंपत्तियों की खरीद में उपयोग किया गया। आरोपियों और उनके सहयोगियों से जुड़े बैंक खाते, सावधि जमा और अन्य वित्तीय साधन भी चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से कई को अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा पहले ही फ्रीज किया जा चुका था।

आगे की जांच

ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच जारी है। गौरतलब है कि MLM और पोंजी स्कीम से जुड़े ऐसे मामले दक्षिण भारत में बार-बार सामने आते रहे हैं, जहाँ ग्रामीण और अर्ध-शहरी निवेशक सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब वित्तीय धोखाधड़ी के विरुद्ध केंद्रीय एजेंसियाँ अपने अभियान तेज कर रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ 'सॉफ्टवेयर निवेश' जैसे तकनीकी आवरण के पीछे क्लासिक पोंजी ढाँचा छिपाया जाता है। असली सवाल यह है कि जब कंपनी शुरुआती रिटर्न दे रही थी, तब नियामक तंत्र कहाँ था — क्योंकि तब तक हजारों निवेशक फंस चुके थे। ईडी की कार्रवाई देर से आई है, लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड और फ्रीज खातों से संपत्ति वसूली की संभावना बनती है। पीड़ितों को न्याय तभी मिलेगा जब अभियोजन तेज हो और जब्त संपत्तियाँ वास्तव में जमाकर्ताओं को लौटाई जाएँ।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ड्रीम मेकर्स ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड पर क्या आरोप हैं?
कंपनी पर आरोप है कि उसने सॉफ्टवेयर-संबंधित परियोजनाओं में निवेश का झाँसा देकर MLM और पोंजी स्कीम के जरिये जनता से करोड़ों रुपये जुटाए और 150 दिनों में निवेश दोगुना करने का वादा किया। बाद में भुगतान रुकने से हजारों निवेशकों को भारी नुकसान हुआ।
ईडी ने यह छापेमारी कहाँ-कहाँ की?
ईडी ने 30 जून 2026 को तमिलनाडु के कोयंबटूर और कृष्णागिरी जिलों तथा केरल के मलप्पुरम और त्रिशूर जिलों में कुल 8 स्थानों पर तलाशी ली। यह कार्रवाई PMLA 2002 के तहत की गई।
इस मामले में मुख्य आरोपी कौन हैं?
ईडी के अनुसार कंपनी के दिवंगत प्रबंध निदेशक एस. सतीश कुमार, निदेशक गुणवती और प्रबंधक मुगुंथन नायर मुख्य आरोपी हैं। गुणवती और उनके पति सतीश कुमार कंपनी का प्रबंधन करते थे, जबकि मुगुंथन नायर कथित तौर पर प्रचार बैठकें आयोजित करते थे।
छापेमारी में क्या बरामद हुआ?
अधिकारियों ने आपत्तिजनक दस्तावेज, डायरी, डिजिटल रिकॉर्ड और कथित अपराध की आय से खरीदी गई संपत्तियों के विवरण जब्त किए। आरोपियों से जुड़े बैंक खाते, सावधि जमा और वित्तीय साधन भी चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से कई पहले से फ्रीज हैं।
ईडी ने यह जांच किस आधार पर शुरू की?
ईडी ने तमिलनाडु पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। मामले में आगे की जांच अभी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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