ईडी की 'ड्रीम मेकर्स ग्लोबल' पर बड़ी कार्रवाई: तमिलनाडु-केरल में 8 जगह छापे, पोंजी स्कीम में हजारों निवेशक ठगे
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 30 जून 2026 को ड्रीम मेकर्स ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड (डीएमजीपीएल) के विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत तमिलनाडु और केरल में 8 स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। कंपनी पर आरोप है कि उसने मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) और पोंजी स्कीम के जरिये हजारों निवेशकों से करोड़ों रुपये ऐंठे और 150 दिनों में निवेश दोगुना करने के झूठे वादे किए।
छापेमारी का दायरा और कानूनी आधार
यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई। तलाशी कोयंबटूर और कृष्णागिरी (तमिलनाडु) तथा मलप्पुरम और त्रिशूर (केरल) जिलों में डीएमजीपीएल से जुड़े परिसरों पर हुई। ईडी ने यह जांच तमिलनाडु पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की है।
कैसे चलाई गई यह धोखाधड़ी
ईडी के अनुसार, डीएमजीपीएल और उसके प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों ने कथित तौर पर सॉफ्टवेयर-संबंधित परियोजनाओं और पैकेजों में निवेश के अवसर दिखाकर जनता से करोड़ों रुपये जुटाए। निवेशकों को अत्यधिक रिटर्न और 150 दिनों के भीतर निवेश दोगुना होने का आश्वासन दिया गया। शुरुआत में विश्वास बनाने के लिए कुछ निवेशकों को रिटर्न का भुगतान किया गया, लेकिन बाद में कंपनी ने कथित तौर पर भुगतान में चूक की, जिससे पूरे क्षेत्र में हजारों जमाकर्ताओं को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
मुख्य आरोपी कौन हैं
ईडी ने आरोप लगाया है कि कंपनी के दिवंगत प्रबंध निदेशक एस. सतीश कुमार, निदेशक गुणवती और प्रबंधक मुगुंथन नायर ने इस योजना के संचालन में केंद्रीय भूमिका निभाई। जांच के अनुसार, गुणवती और उनके पति सतीश कुमार संयुक्त रूप से कंपनी का प्रबंधन करते थे और जनता से जमा राशि एकत्र करते थे, जबकि मुगुंथन नायर कथित तौर पर प्रचार बैठकें आयोजित कर लोगों को झूठे मुनाफे का लालच देकर निवेश के लिए प्रेरित करते थे।
छापे में क्या मिला
तलाशी के दौरान अधिकारियों ने आपत्तिजनक दस्तावेज, डायरी, डिजिटल रिकॉर्ड और कथित अपराध की आय से खरीदी गई संपत्तियों के विवरण जब्त किए। ईडी ने बताया कि कमीशन और निवेश से प्राप्त बड़ी रकम का कथित तौर पर अचल संपत्तियों, वाहनों और अन्य व्यक्तिगत परिसंपत्तियों की खरीद में उपयोग किया गया। आरोपियों और उनके सहयोगियों से जुड़े बैंक खाते, सावधि जमा और अन्य वित्तीय साधन भी चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से कई को अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा पहले ही फ्रीज किया जा चुका था।
आगे की जांच
ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच जारी है। गौरतलब है कि MLM और पोंजी स्कीम से जुड़े ऐसे मामले दक्षिण भारत में बार-बार सामने आते रहे हैं, जहाँ ग्रामीण और अर्ध-शहरी निवेशक सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब वित्तीय धोखाधड़ी के विरुद्ध केंद्रीय एजेंसियाँ अपने अभियान तेज कर रही हैं।