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टीआरबी भर्ती घोटाला: ईडी ने तमिलनाडु के 21 ठिकानों पर छापे मारे, ₹9.67 करोड़ की संपत्ति के दस्तावेज जब्त

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टीआरबी भर्ती घोटाला: ईडी ने तमिलनाडु के 21 ठिकानों पर छापे मारे, ₹9.67 करोड़ की संपत्ति के दस्तावेज जब्त

सारांश

2017 के टीआरबी पॉलिटेक्निक लेक्चरर भर्ती घोटाले में ईडी ने तमिलनाडु के चार शहरों में 21 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे। 262 अयोग्य उम्मीदवारों को धोखाधड़ी से पास कराने वाले इस रैकेट में ₹20 करोड़ से अधिक की संपत्ति और 56 बैंक खाते निशाने पर आए।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 25 जून 2025 को चेन्नई, मदुरै, त्रिची और कोयंबटूर में 21 ठिकानों पर छापेमारी की।
2017 की टीआरबी परीक्षा में ओएमआर शीट में डिजिटल हेरफेर कर 262 अयोग्य उम्मीदवारों को पास दिखाया गया था।
आरोपियों ने प्रति उम्मीदवार ₹14–16 लाख नकद वसूले और धन को प्रॉक्सी फर्मों व म्यूल खातों से घुमाया।
₹13.18 लाख नकद जब्त; 56 बैंक खाते और 2 डीमैट खाते फ्रीज।
36 अचल संपत्तियों के दस्तावेज जब्त, गाइडेंस वैल्यू ₹9.67 करोड़ , बाजार मूल्य ₹20 करोड़ से अधिक ।
मामले में तमिलनाडु पुलिस की दो चार्जशीट — 2021 और अक्टूबर 2023 — पहले ही दाखिल हो चुकी हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के चेन्नई स्थित जोनल कार्यालय ने 25 जून 2025 को चेन्नई, मदुरै, त्रिची और कोयंबटूर में 21 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत टीचर्स रिक्रूटमेंट बोर्ड (टीआरबी) भर्ती घोटाले में की गई, जिसमें 2017 की पॉलिटेक्निक लेक्चरर भर्ती परीक्षा की ओएमआर शीट में बड़े पैमाने पर डिजिटल छेड़छाड़ का आरोप है।

घोटाले की पृष्ठभूमि

2017 में टीआरबी ने सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों में लेक्चरर पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा के बाद स्कैनिंग प्रक्रिया के दौरान आरोपियों ने स्कैन की गई ओएमआर शीट की छवियों में डिजिटल रूप से बदलाव कर चुने हुए उम्मीदवारों के अंक बढ़ा दिए। इसके अलावा उन्हीं उम्मीदवारों के नाम पर 385 अतिरिक्त सेकेंडरी ओएमआर शीट तैयार की गईं, जिसके परिणामस्वरूप 262 अयोग्य उम्मीदवारों को धोखाधड़ी से पॉलिटेक्निक लेक्चरर पद के लिए योग्य घोषित किया गया।

गौरतलब है कि इस हेरफेर का पर्दाफाश सार्वजनिक याचिकाओं के जरिए हुआ, जिसके बाद दोबारा मूल्यांकन हुआ, परिणाम वापस लिए गए और मामला दर्ज किया गया। तमिलनाडु पुलिस ने 2017 में एफआईआर दर्ज की, 2021 में पहली चार्जशीट और अक्टूबर 2023 में दूसरी चार्जशीट दाखिल की।

साजिश का तानाबाना

ईडी की जांच के अनुसार, वी. सुब्रमण्यम और उनके सहयोगी सुरेश पॉल की अगुवाई में आरोपियों ने डेटाटेक के तकनीकी कर्मचारियों — शेख दाऊद नासर और आई. रघुपति — की मदद से परीक्षा प्रक्रिया में छेड़छाड़ की साजिश रची। एजेंटों और बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए इच्छुक उम्मीदवारों को निशाना बनाया गया और प्रति उम्मीदवार नकद में ₹14 से ₹16 लाख वसूले गए।

इस तरह जमा किए गए काले धन को 'म्यूल अकाउंट्स' और तीन प्रॉक्सी फर्मों — ट्रस्ट एंटरप्राइजेज, विजडम एंटरप्राइजेज और सूर्यम एंटरप्राइजेज — के साथ-साथ सहयोगियों और परिवार के सदस्यों के खातों के जरिए घुमाया गया। बाद में इसे अचल संपत्ति और आभूषणों में बदल दिया गया।

छापेमारी में क्या मिला

तलाशी के दौरान ईडी ने कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए। इनमें एजेंटों और आरोपियों द्वारा एकत्र किए गए नकद का रिकॉर्ड, विभिन्न सरकारी परीक्षाओं की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी, उम्मीदवारों के प्रमाणपत्रों की प्रतियाँ और डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त ₹13.18 लाख नकद जब्त किया गया।

56 बैंक खाते और 2 डीमैट खाते फ्रीज किए गए। आरोपियों और उनके सहयोगियों के नाम पर दर्ज 36 अचल संपत्तियों के दस्तावेज जब्त किए गए, जिनकी गाइडेंस वैल्यू लगभग ₹9.67 करोड़ और बाजार मूल्य ₹20 करोड़ से अधिक बताई जा रही है।

आगे की कार्रवाई

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में धांधली के मामले लगातार सामने आ रहे हैं और न्यायपालिका व जांच एजेंसियाँ इन पर सख्त रुख अपना रही हैं। ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में 'अपराध से हुई कमाई' का पूरा हिसाब लगाने के लिए जांच जारी है और आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सुनियोजित आर्थिक अपराध था। असली सवाल यह है कि 2017 से 2021 के बीच — जब पहली चार्जशीट दाखिल हुई — इतने वर्षों तक यह रैकेट बेरोकटोक कैसे चलता रहा और क्या इसमें संस्थागत मिलीभगत की जांच भी होगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीआरबी भर्ती घोटाला क्या है?
यह 2017 में तमिलनाडु के टीचर्स रिक्रूटमेंट बोर्ड (टीआरबी) द्वारा आयोजित पॉलिटेक्निक लेक्चरर भर्ती परीक्षा में हुई धोखाधड़ी है, जिसमें आरोपियों ने ओएमआर शीट की स्कैन की गई छवियों में डिजिटल बदलाव कर 262 अयोग्य उम्मीदवारों को पास कराया। प्रति उम्मीदवार ₹14–16 लाख नकद वसूले गए।
ईडी ने इस मामले में छापेमारी क्यों की?
ईडी ने तमिलनाडु पुलिस की एफआईआर के आधार पर पीएमएलए, 2002 के तहत जांच शुरू की, क्योंकि घोटाले से प्राप्त काले धन को प्रॉक्सी फर्मों और म्यूल खातों के जरिए संपत्ति व आभूषणों में बदला गया था। छापेमारी का मकसद 'अपराध से हुई कमाई' का पता लगाना और उसे जब्त करना था।
छापेमारी में क्या जब्त किया गया?
ईडी ने ₹13.18 लाख नकद, ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी, डिजिटल साक्ष्य और उम्मीदवारों के प्रमाणपत्र जब्त किए। इसके अलावा 56 बैंक खाते व 2 डीमैट खाते फ्रीज किए गए और ₹9.67 करोड़ गाइडेंस वैल्यू वाली 36 अचल संपत्तियों के दस्तावेज जब्त किए गए।
इस मामले में मुख्य आरोपी कौन हैं?
जांच के अनुसार, वी. सुब्रमण्यम और सुरेश पॉल इस रैकेट के मुख्य सरगना बताए जा रहे हैं। उन्होंने डेटाटेक के तकनीकी कर्मचारियों शेख दाऊद नासर और आई. रघुपति की मदद से ओएमआर शीट में हेरफेर किया और एजेंटों के नेटवर्क के जरिए उम्मीदवारों से नकद वसूला।
इस मामले में आगे क्या होगा?
ईडी ने स्पष्ट किया है कि घोटाले से जुड़ी 'अपराध से हुई कमाई' का पूरा हिसाब लगाने के लिए जांच जारी है और आगे और कार्रवाई की जा सकती है। तमिलनाडु पुलिस पहले ही 2021 और अक्टूबर 2023 में दो चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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