18 जुलाई 2026
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केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन का खतरा बढ़ा, रेड अलर्ट पर यात्रा रोकने की तैयारी

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केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन का खतरा बढ़ा, रेड अलर्ट पर यात्रा रोकने की तैयारी

सारांश

मानसून की मार से केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएँ बढ़ी हैं। गौरीकुंड-चिरबासा क्षेत्र में रात भर हुई घटनाओं के बाद रास्ता साफ किया गया, पर खच्चर आवाजाही अभी बाधित है। रेड अलर्ट की स्थिति में यात्रा रोकने का निर्णय लिया जा सकता है।

मुख्य बातें

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर मानसून के कारण भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएँ बढ़ी हैं।
जिला मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा ने कहा कि रेड अलर्ट जारी होने पर यात्रा अस्थायी रूप से रोकी जा सकती है।
गौरीकुंड से चिरबासा के बीच बीती रात कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ; पैदल मार्ग बहाल, खच्चर आवाजाही अभी प्रभावित।
भूस्खलन-प्रवण स्थानों पर जेसीबी मशीनें पहले से तैनात; सभी कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय।
श्रद्धालुओं को रेनकोट, छाता साथ रखने और उफनती जलधाराओं को पार न करने की सख्त हिदायत दी गई है।

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में मानसून की सक्रियता के बीच केदारनाथ धाम और समूची केदार घाटी में 18 जुलाई को लगातार भारी वर्षा दर्ज की गई। केदारनाथ हाईवे और पैदल यात्रा मार्ग पर भूस्खलन तथा पत्थर गिरने की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके चलते जिला प्रशासन ने सभी संवेदनशील स्थानों पर आपदा प्रबंधन दल तैनात कर दिए हैं। जिला आपदा नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे स्थिति पर निगरानी बनाए हुए है।

प्रशासन की तैयारी और सतर्कता

जिला मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा ने बताया कि फिलहाल केदारनाथ यात्रा सुचारू रूप से जारी है, किंतु मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ काम कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मौसम विभाग की ओर से रेड अलर्ट जारी होता है अथवा किसी स्थान पर भूस्खलन का गंभीर संकट उत्पन्न होता है, तो यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है।

भूस्खलन की आशंका वाले स्थानों पर जेसीबी मशीनें पहले से तैनात रखी गई हैं, ताकि मार्ग बाधित होने की स्थिति में उसे शीघ्रातिशीघ्र खोला जा सके। जिले के सभी कंट्रोल रूम एक समन्वित इकाई के रूप में कार्यरत हैं और नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम: गौरीकुंड से चिरबासा तक

बीती शाम और रात गौरीकुंड से चिरबासा के बीच तथा चिरबासा क्षेत्र में कई स्थानों पर पत्थर गिरने और भूस्खलन की घटनाएँ हुईं। प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमों ने पूरे दिन राहत एवं मार्ग बहाली का कार्य किया, जिसके बाद अधिकांश स्थानों पर रास्ता साफ कर दिया गया।

फिलहाल पैदल यात्रियों की आवाजाही जारी है, हालाँकि बड़े पत्थरों के कारण खच्चरों और सामान ढोने वाले जानवरों की आवाजाही अभी भी प्रभावित बनी हुई है।

श्रद्धालुओं के लिए ज़रूरी सलाह

डीएम विशाल मिश्रा ने तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान रेनकोट, छाता और अन्य आवश्यक सामान अवश्य साथ रखें। उन्होंने यातायात नियमों का पालन करने और प्रशासन द्वारा जारी चेतावनी संदेशों पर ध्यान देने का आग्रह किया।

मिश्रा ने विशेष रूप से आगाह किया कि किसी भी परिस्थिति में उफनते नालों या तेज बहाव वाली जलधाराओं को पार करने का प्रयास न किया जाए, क्योंकि ऐसा करना जानलेवा हो सकता है। भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतना अनिवार्य है।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब केदारनाथ यात्रा अपने चरम पर है और देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान और अलर्ट के आधार पर प्रशासन आवश्यक निर्णय लेता रहेगा। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि यात्रा को सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने के लिए सभी संभव कदम उठाए जाएँगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

आनन-फानन में राहत कार्य, और 'सतर्कता बरती जा रही है' का आश्वासन। असली सवाल यह है कि संवेदनशील मार्गों पर दीर्घकालिक भू-सुदृढ़ीकरण कार्य क्यों मानसून से पहले पूरे नहीं हो पाते। जेसीबी की तैनाती प्रतिक्रियात्मक उपाय है, निवारक नहीं। जब तक बुनियादी ढाँचे की भेद्यता को स्थायी रूप से नहीं सुधारा जाता, तब तक हर वर्ष लाखों श्रद्धालु अनिश्चितता के बीच यात्रा करते रहेंगे।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केदारनाथ यात्रा पर भूस्खलन का खतरा क्यों बढ़ा है?
उत्तराखंड में मानसून के सक्रिय होने से केदार घाटी और रुद्रप्रयाग जिले में लगातार भारी वर्षा हो रही है, जिससे केदारनाथ हाईवे और पैदल मार्ग पर भूस्खलन तथा पत्थर गिरने की घटनाएँ बढ़ गई हैं। गौरीकुंड से चिरबासा के बीच बीती रात भी कई स्थानों पर ऐसी घटनाएँ हुईं।
क्या केदारनाथ यात्रा अभी बंद है?
नहीं, फिलहाल पैदल यात्रियों के लिए यात्रा जारी है। हालाँकि बड़े पत्थरों के कारण खच्चरों और सामान ढोने वाले जानवरों की आवाजाही अभी प्रभावित है। रेड अलर्ट जारी होने पर यात्रा अस्थायी रूप से रोकी जा सकती है।
रेड अलर्ट की स्थिति में यात्रा पर क्या असर होगा?
जिला मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा के अनुसार, यदि मौसम विभाग रेड अलर्ट जारी करता है या किसी स्थान पर भूस्खलन का गंभीर खतरा उत्पन्न होता है, तो यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यात्रा को कुछ समय के लिए रोका जा सकता है। यह निर्णय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के आधार पर लिया जाएगा।
केदारनाथ यात्रियों के लिए प्रशासन की क्या सलाह है?
प्रशासन ने श्रद्धालुओं को रेनकोट और छाता साथ रखने, यातायात नियमों का पालन करने और प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान देने की अपील की है। उफनते नालों या तेज बहाव वाली जलधाराओं को पार करने का प्रयास बिल्कुल न करें।
केदारनाथ मार्ग पर आपदा प्रबंधन की क्या व्यवस्था है?
जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं। भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों में जेसीबी मशीनें पहले से खड़ी हैं और जिला आपदा नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
राष्ट्र प्रेस
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