केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन का खतरा बढ़ा, रेड अलर्ट पर यात्रा रोकने की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में मानसून की सक्रियता के बीच केदारनाथ धाम और समूची केदार घाटी में 18 जुलाई को लगातार भारी वर्षा दर्ज की गई। केदारनाथ हाईवे और पैदल यात्रा मार्ग पर भूस्खलन तथा पत्थर गिरने की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके चलते जिला प्रशासन ने सभी संवेदनशील स्थानों पर आपदा प्रबंधन दल तैनात कर दिए हैं। जिला आपदा नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे स्थिति पर निगरानी बनाए हुए है।
प्रशासन की तैयारी और सतर्कता
जिला मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा ने बताया कि फिलहाल केदारनाथ यात्रा सुचारू रूप से जारी है, किंतु मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ काम कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मौसम विभाग की ओर से रेड अलर्ट जारी होता है अथवा किसी स्थान पर भूस्खलन का गंभीर संकट उत्पन्न होता है, तो यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है।
भूस्खलन की आशंका वाले स्थानों पर जेसीबी मशीनें पहले से तैनात रखी गई हैं, ताकि मार्ग बाधित होने की स्थिति में उसे शीघ्रातिशीघ्र खोला जा सके। जिले के सभी कंट्रोल रूम एक समन्वित इकाई के रूप में कार्यरत हैं और नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम: गौरीकुंड से चिरबासा तक
बीती शाम और रात गौरीकुंड से चिरबासा के बीच तथा चिरबासा क्षेत्र में कई स्थानों पर पत्थर गिरने और भूस्खलन की घटनाएँ हुईं। प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमों ने पूरे दिन राहत एवं मार्ग बहाली का कार्य किया, जिसके बाद अधिकांश स्थानों पर रास्ता साफ कर दिया गया।
फिलहाल पैदल यात्रियों की आवाजाही जारी है, हालाँकि बड़े पत्थरों के कारण खच्चरों और सामान ढोने वाले जानवरों की आवाजाही अभी भी प्रभावित बनी हुई है।
श्रद्धालुओं के लिए ज़रूरी सलाह
डीएम विशाल मिश्रा ने तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान रेनकोट, छाता और अन्य आवश्यक सामान अवश्य साथ रखें। उन्होंने यातायात नियमों का पालन करने और प्रशासन द्वारा जारी चेतावनी संदेशों पर ध्यान देने का आग्रह किया।
मिश्रा ने विशेष रूप से आगाह किया कि किसी भी परिस्थिति में उफनते नालों या तेज बहाव वाली जलधाराओं को पार करने का प्रयास न किया जाए, क्योंकि ऐसा करना जानलेवा हो सकता है। भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतना अनिवार्य है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब केदारनाथ यात्रा अपने चरम पर है और देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान और अलर्ट के आधार पर प्रशासन आवश्यक निर्णय लेता रहेगा। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि यात्रा को सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने के लिए सभी संभव कदम उठाए जाएँगे।