9 जुलाई 2026
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रांची भूमि घोटाला: ईडी ने कमलेश कुमार सिंह की ₹85 करोड़ की 66 एकड़ जमीन अस्थायी रूप से जब्त की

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रांची भूमि घोटाला: ईडी ने कमलेश कुमार सिंह की ₹85 करोड़ की 66 एकड़ जमीन अस्थायी रूप से जब्त की

सारांश

ईडी ने रांची के कांके-नगड़ी भूमि घोटाले में जमीन कारोबारी कमलेश कुमार सिंह की ₹85 करोड़ मूल्य की 66 एकड़ जमीन जब्त की। आरोप है कि फर्जी डीड के जरिए अवैध स्वामित्व हासिल किया गया और अंचल अधिकारियों की मिलीभगत रही। जांच अभी जारी है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 9 जुलाई को जमीन कारोबारी कमलेश कुमार सिंह की 66 एकड़ भूमि अस्थायी रूप से जब्त की।
जब्त संपत्ति का सरकारी और बाज़ार मूल्य मिलाकर करीब ₹85 करोड़ आंका गया है।
जमीन रांची के कांके और नगड़ी अंचल में स्थित है; आरोप है कि फर्जी और कूटरचित डीड के जरिए अवैध स्वामित्व हासिल किया गया।
वर्ष 2024 में ईडी ने कमलेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया था और विशेष अदालत में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।
जांच में कांके अंचल के तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की कथित संलिप्तता के साक्ष्य मिले हैं।
ईडी ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और अन्य अवैध संपत्तियों की भी पड़ताल की जा रही है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रांची के कांके और नगड़ी अंचल के बहुचर्चित भूमि घोटाला मामले में 9 जुलाई 2026 को बड़ी कार्रवाई करते हुए जमीन कारोबारी कमलेश कुमार सिंह से जुड़ी लगभग 66 एकड़ भूमि को अस्थायी रूप से जब्त (प्रोविजनल अटैचमेंट) कर लिया। ईडी के अनुसार, इस संपत्ति का सरकारी और बाज़ार मूल्य मिलाकर करीब ₹85 करोड़ आंका गया है।

मुख्य घटनाक्रम

जांच एजेंसी का दावा है कि यह जमीन फर्जी दस्तावेजों और जालसाजी के जरिए हासिल की गई थी। एजेंसी पिछले काफी समय से कमलेश कुमार सिंह द्वारा किए गए भूमि सौदों और उनसे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही थी। जांच में सामने आया कि संबंधित भूखंडों के फर्जी और कूटरचित डीड तैयार कर अवैध तरीके से जमीन का स्वामित्व हासिल किया गया।

जमीन की अवैध खरीद-बिक्री

ईडी के अनुसार, इस 66 एकड़ भूमि के एक हिस्से को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विभिन्न खरीदारों को बेचा भी जा चुका था। शेष जमीन की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही उसे अटैच कर लिया गया। एजेंसी का मानना है कि इस कार्रवाई से विवादित भूमि के आगे हस्तांतरण पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

अधिकारियों की कथित संलिप्तता

जांच एजेंसी का आरोप है कि कांके अंचल कार्यालय के कुछ राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत से बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन की अवैध खरीद-बिक्री की गई। छापेमारी और जांच के दौरान तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की संलिप्तता के साक्ष्य भी मिले थे। गौरतलब है कि इस मामले में कई अधिकारियों और अन्य जमीन कारोबारियों के खिलाफ भी आरोपपत्र दायर किए जा चुके हैं।

पूर्व कार्रवाई और चार्जशीट

यह ऐसे समय में आया है जब वर्ष 2024 में ईडी इसी मामले में कमलेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है। इससे पहले एजेंसी कमलेश कुमार सिंह समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) भी दाखिल कर चुकी है।

आगे की जांच

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और अवैध तरीके से अर्जित अन्य संपत्तियों की भी पड़ताल की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियाँ या अटैचमेंट की कार्रवाई संभव मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस नेटवर्क में शामिल अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कितनी तेज़ी से होती है — क्योंकि अब तक के अनुभव बताते हैं कि चार्जशीट के बावजूद सज़ा की दर बेहद कम रही है। यह मामला यह भी दिखाता है कि भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के दावों के बावजूद कागज़ी दस्तावेजों में हेरफेर की गुंजाइश अभी बंद नहीं हुई है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने रांची में किसकी जमीन जब्त की और कितने मूल्य की?
ईडी ने जमीन कारोबारी कमलेश कुमार सिंह से जुड़ी लगभग 66 एकड़ भूमि अस्थायी रूप से जब्त की है, जिसका सरकारी और बाज़ार मूल्य मिलाकर करीब ₹85 करोड़ आंका गया है। यह जमीन रांची के कांके और नगड़ी अंचल में स्थित है।
कमलेश कुमार सिंह पर क्या आरोप हैं?
ईडी का आरोप है कि कमलेश कुमार सिंह ने फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए जमीन का अवैध स्वामित्व हासिल किया और उसका एक हिस्सा विभिन्न खरीदारों को बेच भी दिया। वर्ष 2024 में उन्हें इसी मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है और विशेष अदालत में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।
क्या इस मामले में सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं?
जांच में कांके अंचल कार्यालय के तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की कथित संलिप्तता के साक्ष्य मिले हैं। एजेंसी का आरोप है कि इन अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन की अवैध खरीद-बिक्री की गई और कई अधिकारियों के खिलाफ भी आरोपपत्र दायर किए जा चुके हैं।
प्रोविजनल अटैचमेंट का क्या मतलब है और इसका क्या असर होगा?
प्रोविजनल अटैचमेंट का अर्थ है कि संबंधित संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त कर उसके आगे हस्तांतरण पर रोक लगा दी जाती है। इससे विवादित जमीन की आगे खरीद-बिक्री या हस्तांतरण नहीं हो सकेगा जब तक मामले की जांच और अदालती प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
इस मामले में आगे क्या होगा?
ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और अवैध तरीके से अर्जित अन्य संपत्तियों की भी पड़ताल की जा रही है। मामले में पहले से चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब विशेष अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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