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क्या झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का समेत 10 लोगों को दोषी ठहराया गया?

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क्या झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का समेत 10 लोगों को दोषी ठहराया गया?

सारांश

झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का और उनके सहयोगियों को सीबीआई कोर्ट ने 15 साल पुराने मामले में दोषी ठहराया है। इस मामले में जमीन संबंधी कानून का उल्लंघन हुआ था, जिसमें बड़े पैमाने पर आदिवासी भूमि का दुरुपयोग शामिल था। जानिए इस मामले की पूरी कहानी और अदालत के फैसले के पीछे की सच्चाई।

मुख्य बातें

सीबीआई कोर्ट ने एनोस एक्का समेत 10 लोगों को दोषी ठहराया।
जमीन संबंधी सीएनटी एक्ट का उल्लंघन किया गया।
सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
अदालत ने सजा पर सुनवाई के लिए 30 अगस्त की तारीख तय की।
आदिवासी भूमि की सुरक्षा के लिए छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट महत्वपूर्ण है।

रांची, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड में लागू भूमि संबंधी विशेष कानून छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट (सीएनटी एक्ट) के उल्लंघन से संबंधित 15 साल पुराने मामले में, रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने राज्य के पूर्व मंत्री एनोस एक्का, उनकी पत्नी मेनन एक्का, और रांची के पूर्व भूमि सुधार उप समाहर्ता कार्तिक कुमार प्रभात सहित 10 व्यक्तियों को दोषी ठहराया।

फौरन, सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अदालत ने सजा पर सुनवाई के लिए 30 अगस्त की तारीख तय की है। सिमडेगा निवासी एनोस एक्का वर्ष 2005 से 2008 के बीच अर्जुन मुंडा और बाद में मधु कोड़ा सरकार में मंत्री रहे।

आरोप है कि मंत्री रहते हुए उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी पते का उपयोग कर बड़े पैमाने पर आदिवासी जमीन की खरीद-फरोख्त की। रांची के पूर्व एलआरडीसी कार्तिक कुमार प्रभात ने उनकी मदद की। प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से ये सौदे किए गए।

सीबीआई की जांच में यह सामने आया कि मार्च 2006 से मई 2008 के बीच एनोस एक्का की पत्नी मेनन एक्का के नाम पर विभिन्न स्थानों पर जमीन खरीदी गई। इसमें हिनू में 22 कट्ठा, ओरमांझी में 12 एकड़, नेवरी में 4 एकड़ और चुटिया के सिरम टोली मौजा में 9 डिसमिल भूमि शामिल है।

अदालत ने सीबीआई के सभी आरोपों को सही पाया। इस मामले की सुनवाई सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक प्रियांशु सिंह ने की। अदालत में दलीलों और गवाहों के आधार पर यह साबित हुआ कि जमीन खरीदने-बेचने में सीएनटी एक्ट का खुला उल्लंघन हुआ है।

गौरतलब है कि छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट,1908 ब्रिटिश शासनकाल में लागू हुआ था। इसका उद्देश्य आदिवासी समुदाय की जमीन की सुरक्षा करना है। इस कानून के तहत आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासियों को बेचना, गिरवी रखना या स्थानांतरित करना प्रतिबंधित है। यहाँ तक कि कोई आदिवासी भी अपने थाना क्षेत्र से बाहर के किसी अन्य आदिवासी को भूमि नहीं बेच सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि इस मामले में न्याय की प्रक्रिया ने यह दर्शाया है कि सत्ता का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह निर्णय उन सभी के लिए एक चेतावनी है जो अपने पद का गलत उपयोग करने का प्रयास करते हैं। देश में कानून का राज कायम रहना चाहिए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएनटी एक्ट क्या है?
सीएनटी एक्ट, छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट, 1908 में लागू हुआ था, जिसका उद्देश्य आदिवासी भूमि की रक्षा करना है।
सीबीआई कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
सीबीआई कोर्ट ने एनोस एक्का और 10 अन्य को दोषी ठहराया है और सजा पर सुनवाई 30 अगस्त को होगी।
क्या इस मामले में और भी लोग शामिल हैं?
हाँ, इस मामले में एनोस एक्का की पत्नी और रांची के पूर्व भूमि सुधार उप समाहर्ता भी शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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