सूरत में नकली घी के रैकेट का भंडाफोड़: 2,029 किलोग्राम जब्त, 2 गिरफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- 2,029 किलोग्राम नकली घी जब्त किया गया।
- दो व्यवसायियों को गिरफ्तार किया गया।
- मिलावट के लिए पाम ऑयल और अन्य सामग्री का उपयोग हुआ।
- घी की कीमतें थोक और खुदरा में भिन्न थीं।
- पुलिस की कार्रवाई जारी है।
सूरत, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सूरत में अधिकारियों ने मिलावटी घी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है, जिसमें सचिन जीआईडीसी क्षेत्र के एक निर्माण प्लांट पर छापा मारकर 2,029 किलोग्राम नकली घी जब्त किया गया है और दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।
विशेष ऑपरेशन समूह ने गुरुवार को 'ऑपरेशन शुद्धि' के तहत यह कार्रवाई उस समय की, जब शहर के कुछ हिस्सों में नकली घी की बिक्री की जानकारी मिली थी।
सूचना के आधार पर, कई टीमों का गठन किया गया और तकनीकी निगरानी तथा खुफिया जानकारी के माध्यम से आरोपियों की पहचान की गई।
इसके बाद, सचिन जीआईडीसी में 'सबका फूड्स' नाम की फैक्ट्री और चोर्यासी तालुका के तलांगपुर में स्थित एक गोदाम पर छापा मारा गया।
पुलिस ने मिलावटी घी, मशीनरी, कच्चा माल एवं अन्य सामान जब्त किया, जिसकी कुल कीमत करीब 36,36,530 रुपए बताई गई है। इसमें से 14,19,960 रुपए21,61,570 रुपए की मशीनरी एवं अन्य सामान शामिल हैं।
छापेमारी के दौरान नकद राशि और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 48 वर्षीय भरत पोलारा और 45 वर्षीय आमीन वधवानिया के रूप में हुई है, जो दोनों व्यवसायी हैं।
पुलिस ने उनके खिलाफ सचिन जीआईडीसी थाने में मामला दर्ज किया है।
जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी मिलावट के लिए एक संगठित तरीका अपनाते थे, जिसमें शुद्ध घी में पाम ऑयल, वेजिटेबल घी और वेजिटेबल बटर मिलाया जाता था।
घी की असली गंध और रंग देने के लिए कृत्रिम एसेंस और सिंथेटिक रंग का उपयोग किया जाता था, जिससे इसे असली गाय के घी जैसा दिखाया जाता था।
पुलिस के अनुसार, इसमें सुई और सिरिंज की मदद से रसायनों की सटीक मात्रा मिलाई जाती थी, जिससे असली और नकली घी में फर्क करना कठिन हो जाता था।
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे ग्राहकों की मांग के अनुसार विभिन्न गुणवत्ता का घी तैयार करते थे। कम कीमत वाला घी ज्यादातर तेल से बनता था, जबकि महंगे संस्करण में थोड़ा असली घी मिलाया जाता था।
यह घी 600 से 650 रुपए प्रति किलो के थोक मूल्य पर बेचा जाता था और खुदरा बाजार में 1000 रुपए प्रति किलो तक बिकता था।
पुलिस उपायुक्त राजदीपसिंह नकुम ने कहा कि आरोपी पिछले दो साल से यह अवैध कार्य कर रहे थे और ग्राहक की मांग के अनुसार मिलावटी घी का निर्माण कर बेचते थे।
यह घी 'विदुर काऊ घी' और 'देसी घी' जैसे नामों से पैक किया जाता था और छोटे पाउच से लेकर 15 किलो के डिब्बों में बेचा जाता था।
पुलिस को संदेह है कि यह सप्लाई नेटवर्क दक्षिण गुजरात और आसपास के क्षेत्रों में फैला हुआ था। मामले की आगे जांच जारी है।