भरत तिवारी मामला: भोजपुर सिविल सर्जन बोले — 'पीएमसीएच रेफर किया, आगे की जानकारी नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
भोजपुर के सिविल सर्जन डॉ. शिवेंद्र कुमार सिन्हा ने 24 जून को बताया कि 17 जून के पुलिस ऑपरेशन में गोली लगने से घायल भरत भूषण तिवारी को शाहपुर प्राइमरी हेल्थ सेंटर (पीएचसी) लाए जाने पर उनकी हालत अत्यंत गंभीर थी, और प्रारंभिक उपचार के बाद उन्हें तत्काल पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) रेफर कर दिया गया था। डॉ. सिन्हा ने स्पष्ट किया कि पीएमसीएच पहुँचने के बाद मरीज के साथ क्या हुआ, इसकी कोई जानकारी उनके पास उपलब्ध नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
भोजपुर जिले के बेलौटी गांव के निवासी भरत भूषण तिवारी की मृत्यु 17 जून को हुए एक पुलिस ऑपरेशन के दौरान हुई थी। घटना के बाद उन्हें पहले शाहपुर कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (सीएचसी) ले जाया गया, जहाँ से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें भोजपुर के जिला अस्पताल रेफर किया गया।
डॉ. सिन्हा ने बताया, 'मरीज को शाहपुर के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर से हमारे पास भेजा गया था, जहाँ उन्हें शुरुआती इलाज मिला था। मामला गंभीर होने के कारण उन्हें हमारे पास रेफर किया गया।'
चिकित्सा दल की तैयारी और उपचार
सिविल सर्जन के अनुसार, शाहपुर पीएचसी को पहले ही सूचित कर दिया गया था कि एक गंभीर मरीज आने वाला है। उन्होंने कहा, 'सुबह करीब 10 बजे मरीज को हमारे अस्पताल लाया गया। हमारी पूरी मेडिकल टीम पहले से स्टैंडबाय पर थी। टीम में ऑर्थोपेडिक स्पेशलिस्ट, सर्जन और एनेस्थेटिस्ट शामिल थे।'
डॉ. सिन्हा ने आगे बताया, 'टीम उन्हें ऑपरेशन थिएटर ले गई और इलाज करने की कोशिश की। डॉक्टरों ने पाया कि उनकी धमनियाँ फट गई थीं, इसलिए कोई जोखिम न लेते हुए शुरुआती उपचार के बाद उन्हें समय पर पीएमसीएच रेफर कर दिया गया।'
पोस्टमार्टम और मृत्यु की परिस्थितियाँ
डॉ. सिन्हा ने स्पष्ट किया कि भरत तिवारी का पोस्टमार्टम भोजपुर अस्पताल में नहीं हुआ, क्योंकि उनकी मृत्यु पटना में हुई थी। उन्होंने कहा कि ऐसे में पोस्टमार्टम पटना में ही किया गया होगा। भोजपुर से गंभीर मामलों को पीएमसीएच रेफर करना सामान्य प्रक्रिया है।
एनकाउंटर को लेकर विवाद
पुलिस के अनुसार, भरत तिवारी ने कथित तौर पर पुलिस टीम पर 10 से 12 राउंड गोलियाँ चलाईं, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में फायरिंग की। हालाँकि, तिवारी के परिवार और कई स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने सरेंडर कर दिया था और उसके बाद उन्हें गोली मारी गई — जिससे यह मामला कथित फर्जी एनकाउंटर का रूप ले रहा है।
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब बिहार में पुलिस एनकाउंटर की पारदर्शिता को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। मामले की जाँच की माँग तेज होती जा रही है।
आगे क्या
फिलहाल यह मामला जाँच के दायरे में है। परिवार की ओर से फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाए जाने के बाद न्यायिक या उच्च स्तरीय जाँच की माँग उठ रही है। पीएमसीएच में उपचार के दौरान की परिस्थितियाँ भी अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।