भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह बोले — 'कोर्ट के निर्देश पर टिप्पणी उचित नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर कोई भी सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया। 16 जुलाई को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह न्यायालय से जुड़ा विषय है और जब कोर्ट ने अपना निर्देश दे दिया है, तो उस पर अमल होना चाहिए।
एनकाउंटर मामले पर सांसद की सतर्क प्रतिक्रिया
सिंह ने साफ शब्दों में कहा, 'यह कोर्ट से जुड़ा मामला है — इस पर हम क्या टिप्पणी कर सकते हैं?' उनके इस बयान को न्यायपालिका के प्रति सम्मान और राजनीतिक संयम दोनों के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में है।
पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी पर चेतावनी
पंजाब कांग्रेस में जारी राजनीतिक उठापटक पर सिंह ने अपनी पार्टी को सतर्क किया। उन्होंने कहा कि यह चुनाव का समय है और इस दौरान किसी भी प्रकार की गुटबाजी से बचना आवश्यक है। उनके अनुसार, शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों का पालन बिना किसी कोताही के होना चाहिए।
प्रशांत किशोर और उनके सहयोगियों पर तीखी राय
कांग्रेस नेता ने प्रशांत किशोर के राजनीतिक कद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि वे एक 'वन आर्मी पार्टी' नहीं हैं — वे खुद ही सब कुछ हैं। उन्होंने सिन्हा जी के बारे में कहा कि वे एक प्रभावशाली प्रोफेसर थे, लेकिन सामाजिक जीवन में उनके योगदान की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। जो लोग हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए हैं, उनके बारे में सिंह ने कहा कि इनका कोई स्थायी राजनीतिक वजूद नहीं है और ये कल फिर कांग्रेस में लौट सकते हैं।
BJP पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप और मानसून सत्र की रणनीति
वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह ने कहा कि भाजपा का विपक्षी दलों को तोड़ना और उनके विधायी कार्यों में बाधा डालना कोई नई बात नहीं है। मानसून सत्र में कांग्रेस की रणनीति के बारे में उन्होंने कहा कि पार्टी राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद और नीट पेपर लीक जैसे जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद और UP स्पीकर के बयान पर प्रतिक्रिया
चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर सिंह ने कहा कि यह आस्था से जुड़ा विषय है और इससे सभी दुखी हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा के स्पीकर द्वारा इस मामले पर दिए गए बयान को उन्होंने 'बेतुका और दुर्भाग्यपूर्ण' बताया तथा कहा कि स्पीकर के पद पर बैठे व्यक्ति से ऐसे बयान की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। परिसीमन बिल पर सुप्रिया सुले के बयान के बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक इसकी पूरी जानकारी नहीं है, हालांकि पिछली बार एनसीपी ने विपक्ष का साथ दिया था। आगे आने वाले दिनों में इन सभी मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा की उम्मीद है।