16 जुलाई 2026
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बिजनौर के मुकुल कुमार ने रचा इतिहास, आँखों पर पट्टी बाँधकर 30 सेकंड में 84 बार रस्सी कूदने का एशियाई रिकॉर्ड

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बिजनौर के मुकुल कुमार ने रचा इतिहास, आँखों पर पट्टी बाँधकर 30 सेकंड में 84 बार रस्सी कूदने का एशियाई रिकॉर्ड

सारांश

बिजनौर के 18 वर्षीय मुकुल कुमार ने आँखों पर पट्टी बाँधकर दाएँ पैर से 30 सेकंड में 84 बार रस्सी कूदकर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह बनाई। छोटे शहर से उठी यह प्रतिभा अब गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड की राह पर है।

मुख्य बातें

मुकुल कुमार ने आँखों पर पट्टी बाँधकर केवल दाएँ पैर से 30 सेकंड में 84 बार रस्सी कूदकर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नया कीर्तिमान स्थापित किया।
यह उपलब्धि उन्होंने 18 वर्ष, 3 महीने और 14 दिन की आयु में हासिल की।
मुकुल ने वैनिला स्पोर्ट्स एंड फिटनेस सेंटर, बिजनौर में नियमित प्रशिक्षण कर इस रिकॉर्ड की तैयारी की।
पूर्व विद्यालय यूनिवर्सल एकेडमी, बिजनौर ने उन्हें ₹11,000 का चेक देकर सम्मानित किया।
अगला लक्ष्य गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराना है।

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के युवा खिलाड़ी मुकुल कुमार ने रोप स्किपिंग (रस्सी कूद) में असाधारण कारनामा करते हुए एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है। 16 जुलाई 2026 को घोषित इस उपलब्धि में उन्होंने आँखों पर पट्टी बाँधकर केवल दाएँ पैर से 30 सेकंड में 84 बार रस्सी कूदी — जो इस श्रेणी में एक नया एशियाई कीर्तिमान है। इस रिकॉर्ड ने बिजनौर और पूरे देश को गर्व से भर दिया है।

रिकॉर्ड का विवरण

मुकुल कुमार ने यह उपलब्धि महज 18 वर्ष, 3 महीने और 14 दिन की आयु में हासिल की। आँखों पर पट्टी बाँधकर एकल पैर से इतनी तेज़ और नियंत्रित रस्सी कूद के लिए असाधारण संतुलन, शारीरिक समन्वय और मानसिक एकाग्रता की आवश्यकता होती है। मुकुल ने एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन किया था, जिसके बाद उनके प्रदर्शन का सत्यापन कर उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।

प्रशिक्षण और समर्पण की कहानी

इस कीर्तिमान के पीछे वैनिला स्पोर्ट्स एंड फिटनेस सेंटर, बिजनौर में किया गया लंबा और कठोर अभ्यास है। मुकुल ने नियमित प्रशिक्षण, कड़े अनुशासन और फिटनेस पर विशेष ध्यान देकर इस मुकाम को हासिल किया। यह उपलब्धि यह भी सिद्ध करती है कि छोटे शहरों में उपलब्ध संसाधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।

विद्यालय ने किया सम्मानित

मुकुल की सफलता पर उनके पूर्व विद्यालय यूनिवर्सल एकेडमी, बिजनौर ने उन्हें ₹11,000 का चेक प्रदान कर सम्मानित किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह सम्मान न केवल मुकुल की व्यक्तिगत जीत का प्रतीक है, बल्कि जिले में खेल संस्कृति को प्रोत्साहन देने का भी संदेश देता है।

अगला लक्ष्य: गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड

एशियाई कीर्तिमान के बाद मुकुल कुमार का अगला लक्ष्य गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराना है। उनका मानना है कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर वे यह सपना भी साकार करेंगे। मुकुल की यह यात्रा देशभर के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संस्थागत समर्थन और मीडिया दृश्यता की कमी है। रोप स्किपिंग जैसे गैर-पारंपरिक खेलों में अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलना इस बात का संकेत है कि भारत को अपनी खेल नीति में विविधता लानी होगी — क्रिकेट और कुश्ती से परे। सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार और खेल प्राधिकरण ऐसी प्रतिभाओं को समय रहते पहचानकर गिनीज़ स्तर की तैयारी के लिए ढाँचागत सहयोग देंगे, या मुकुल को भी अकेले ही यह सफर तय करना होगा।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुकुल कुमार ने कौन-सा रिकॉर्ड बनाया है?
मुकुल कुमार ने आँखों पर पट्टी बाँधकर केवल दाएँ पैर से 30 सेकंड में 84 बार रस्सी कूदने का एशियाई रिकॉर्ड बनाया है, जिसे एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने आधिकारिक रूप से मान्यता दी है।
मुकुल कुमार कहाँ के रहने वाले हैं और उनकी उम्र क्या है?
मुकुल कुमार उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने यह रिकॉर्ड 18 वर्ष, 3 महीने और 14 दिन की आयु में हासिल किया।
मुकुल कुमार ने इस रिकॉर्ड की तैयारी कहाँ की?
मुकुल ने बिजनौर स्थित वैनिला स्पोर्ट्स एंड फिटनेस सेंटर में नियमित और कठोर अभ्यास कर इस रिकॉर्ड की तैयारी की। लंबे समय तक फिटनेस और संतुलन पर विशेष ध्यान देने के बाद वे इस मुकाम तक पहुँचे।
एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होने पर मुकुल को क्या सम्मान मिला?
उनके पूर्व विद्यालय यूनिवर्सल एकेडमी, बिजनौर ने उन्हें ₹11,000 का चेक देकर सम्मानित किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने उनकी उपलब्धि की सराहना की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मुकुल कुमार का अगला लक्ष्य क्या है?
एशियाई रिकॉर्ड के बाद मुकुल कुमार का अगला लक्ष्य गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराना है। उनका मानना है कि निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास से वे यह सपना भी पूरा करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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