16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सीबीडीटी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स 384 किया, 2.3% की बढ़ोतरी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सीबीडीटी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स 384 किया, 2.3% की बढ़ोतरी

सारांश

सीबीडीटी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सीआईआई 384 तय किया — 2.3% की बढ़ोतरी। 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी संपत्ति बेचने वाले निवासी करदाता अभी भी 20% + इंडेक्सेशन और 12.5% फ्लैट टैक्स में से फायदेमंद विकल्प चुन सकते हैं।

मुख्य बातें

सीबीडीटी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (सीआईआई) 376 से बढ़ाकर 384 किया — 2.3% की वृद्धि।
अधिसूचना 15 जुलाई 2026 से प्रभावी; 1 अप्रैल 2026 से होने वाली कर गणनाओं पर लागू।
वित्त अधिनियम 2024 के बाद 23 जुलाई 2024 से बेची अधिकांश संपत्तियों पर इंडेक्सेशन लाभ समाप्त; अब 12.5% फ्लैट टैक्स लागू।
भारतीय निवासी और HUF जिन्होंने 23 जुलाई 2024 से पहले जमीन/मकान खरीदा, वे 12.5% (बिना इंडेक्सेशन) या 20% (इंडेक्सेशन सहित) में से कम देनदारी वाला विकल्प चुन सकते हैं।
चालू वित्त वर्ष में 13 जुलाई 2026 तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.4% बढ़कर ₹6.51 लाख करोड़ पहुँचा; STT संग्रह 44% उछलकर ₹26,000 करोड़ पार।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (सीआईआई) को 376 से बढ़ाकर 384 कर दिया है — यानी पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि। 15 जुलाई 2026 को जारी यह अधिसूचना 1 अप्रैल 2026 से होने वाली कर गणनाओं पर लागू होगी। संपत्ति बेचने वाले करदाताओं के लिए यह अपडेट सीधे उनके दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर की गणना को प्रभावित करता है।

कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स क्या है और यह क्यों बदलता है

कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स का उपयोग किसी संपत्ति की मूल खरीद कीमत को महंगाई के अनुसार समायोजित करने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया को इंडेक्सेशन कहते हैं। इससे लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर देय कर अधिक वास्तविक और न्यायसंगत तरीके से निर्धारित होता है — विशेषकर जमीन और मकान जैसी अचल संपत्तियाँ बेचने वाले करदाताओं के लिए। महंगाई-समायोजित खरीद मूल्य बढ़ने से कर योग्य लाभ घट जाता है, जिससे करदाता को राहत मिलती है।

वित्त अधिनियम 2024 के बाद बदली स्थिति

गौरतलब है कि वित्त अधिनियम 2024 के तहत किए गए संशोधनों के बाद 23 जुलाई 2024 या उसके बाद बेची जाने वाली अधिकांश दीर्घकालिक पूंजीगत संपत्तियों पर इंडेक्सेशन का लाभ समाप्त कर दिया गया है। ऐसे मामलों में अब 12.5 प्रतिशत की एकसमान (फ्लैट) टैक्स दर लागू होती है, बिना किसी इंडेक्सेशन लाभ के।

किन करदाताओं को अभी भी मिलेगा इंडेक्सेशन का लाभ

यदि कोई भारतीय निवासी व्यक्ति या हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) ऐसी जमीन या भवन बेचता है जिसे 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदा गया था, तो उसके पास दो विकल्प उपलब्ध होंगे। पहला — बिना इंडेक्सेशन के 12.5 प्रतिशत टैक्स; दूसरा — इंडेक्सेशन लाभ सहित 20 प्रतिशत टैक्स। करदाता दोनों में से जिस विकल्प में कर देनदारी कम हो, उसे चुन सकता है। ऐसे में नया सीआईआई 384 उन करदाताओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो 20% + इंडेक्सेशन वाला विकल्प चुनते हैं।

प्रत्यक्ष कर संग्रह में मज़बूत उछाल

सीबीडीटी के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 13 जुलाई 2026 तक देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 16.4 प्रतिशत बढ़कर ₹6.51 लाख करोड़ हो गया है। शुद्ध कॉरपोरेट टैक्स संग्रह में 22 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई और यह लगभग ₹2.40 लाख करोड़ रहा। गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह करीब 12 प्रतिशत बढ़कर ₹3.85 लाख करोड़ पहुँचा। इसके अतिरिक्त, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) संग्रह में 44 प्रतिशत से अधिक की तेज बढ़ोतरी हुई और यह ₹26,000 करोड़ के पार निकल गया।

आगे क्या

नए सीआईआई के साथ करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे वित्त वर्ष 2026-27 में संपत्ति बिक्री की योजना बनाते समय दोनों कर विकल्पों की तुलना करें और अपने कर सलाहकार से परामर्श लें। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी संपत्तियों के मामले में इंडेक्सेशन वाला विकल्प अभी भी अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली मुद्दा यह है कि वित्त अधिनियम 2024 ने इंडेक्सेशन की प्रासंगिकता को काफी सीमित कर दिया है — अब केवल 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी गई अचल संपत्तियों पर ही यह विकल्प उपलब्ध है। सरकार एक ओर इंडेक्स अपडेट करती है, दूसरी ओर उसका दायरा घटाती जाती है — यह विरोधाभास मध्यमवर्गीय संपत्ति-विक्रेताओं के लिए कर नियोजन को जटिल बनाता है। इसी बीच प्रत्यक्ष कर संग्रह में 16.4% की वृद्धि यह संकेत देती है कि राजकोषीय दबाव के बावजूद कर आधार मज़बूत हो रहा है, जो भविष्य में इंडेक्सेशन जैसी छूटों की समीक्षा की संभावना को और बढ़ाता है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स कितना है?
सीबीडीटी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (सीआईआई) 384 निर्धारित किया है, जो पिछले वर्ष के 376 से 2.3 प्रतिशत अधिक है। यह अधिसूचना 15 जुलाई 2026 से प्रभावी है और 1 अप्रैल 2026 से होने वाली कर गणनाओं पर लागू होगी।
कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स का संपत्ति बिक्री पर क्या असर होता है?
सीआईआई संपत्ति की मूल खरीद कीमत को महंगाई के अनुसार समायोजित करता है, जिससे दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) पर देय कर कम हो जाता है। उच्च सीआईआई का अर्थ है कि इंडेक्सेशन लाभ चुनने वाले करदाताओं की कर योग्य आय कम आँकी जाएगी।
23 जुलाई 2024 के बाद बेची संपत्ति पर इंडेक्सेशन मिलेगा?
नहीं। वित्त अधिनियम 2024 के तहत 23 जुलाई 2024 या उसके बाद बेची जाने वाली अधिकांश दीर्घकालिक पूंजीगत संपत्तियों पर इंडेक्सेशन का लाभ समाप्त कर दिया गया है। ऐसे मामलों में बिना इंडेक्सेशन के 12.5 प्रतिशत की फ्लैट टैक्स दर लागू होती है।
किन करदाताओं को अभी भी इंडेक्सेशन का विकल्प मिलेगा?
भारतीय निवासी व्यक्ति या हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) जिन्होंने 23 जुलाई 2024 से पहले जमीन या मकान खरीदा था, वे दो विकल्पों में से चुन सकते हैं — बिना इंडेक्सेशन के 12.5% टैक्स, या इंडेक्सेशन लाभ सहित 20% टैक्स। जिस विकल्प में कर देनदारी कम हो, वह चुना जा सकता है।
चालू वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष कर संग्रह कितना रहा?
सीबीडीटी के आंकड़ों के अनुसार 13 जुलाई 2026 तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 16.4 प्रतिशत बढ़कर ₹6.51 लाख करोड़ हो गया। इसमें कॉरपोरेट टैक्स संग्रह ₹2.40 लाख करोड़ (22% से अधिक वृद्धि) और STT संग्रह ₹26,000 करोड़ से अधिक (44% से अधिक वृद्धि) शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले