सीबीडीटी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स 384 किया, 2.3% की बढ़ोतरी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (सीआईआई) को 376 से बढ़ाकर 384 कर दिया है — यानी पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि। 15 जुलाई 2026 को जारी यह अधिसूचना 1 अप्रैल 2026 से होने वाली कर गणनाओं पर लागू होगी। संपत्ति बेचने वाले करदाताओं के लिए यह अपडेट सीधे उनके दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर की गणना को प्रभावित करता है।
कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स क्या है और यह क्यों बदलता है
कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स का उपयोग किसी संपत्ति की मूल खरीद कीमत को महंगाई के अनुसार समायोजित करने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया को इंडेक्सेशन कहते हैं। इससे लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर देय कर अधिक वास्तविक और न्यायसंगत तरीके से निर्धारित होता है — विशेषकर जमीन और मकान जैसी अचल संपत्तियाँ बेचने वाले करदाताओं के लिए। महंगाई-समायोजित खरीद मूल्य बढ़ने से कर योग्य लाभ घट जाता है, जिससे करदाता को राहत मिलती है।
वित्त अधिनियम 2024 के बाद बदली स्थिति
गौरतलब है कि वित्त अधिनियम 2024 के तहत किए गए संशोधनों के बाद 23 जुलाई 2024 या उसके बाद बेची जाने वाली अधिकांश दीर्घकालिक पूंजीगत संपत्तियों पर इंडेक्सेशन का लाभ समाप्त कर दिया गया है। ऐसे मामलों में अब 12.5 प्रतिशत की एकसमान (फ्लैट) टैक्स दर लागू होती है, बिना किसी इंडेक्सेशन लाभ के।
किन करदाताओं को अभी भी मिलेगा इंडेक्सेशन का लाभ
यदि कोई भारतीय निवासी व्यक्ति या हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) ऐसी जमीन या भवन बेचता है जिसे 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदा गया था, तो उसके पास दो विकल्प उपलब्ध होंगे। पहला — बिना इंडेक्सेशन के 12.5 प्रतिशत टैक्स; दूसरा — इंडेक्सेशन लाभ सहित 20 प्रतिशत टैक्स। करदाता दोनों में से जिस विकल्प में कर देनदारी कम हो, उसे चुन सकता है। ऐसे में नया सीआईआई 384 उन करदाताओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो 20% + इंडेक्सेशन वाला विकल्प चुनते हैं।
प्रत्यक्ष कर संग्रह में मज़बूत उछाल
सीबीडीटी के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 13 जुलाई 2026 तक देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 16.4 प्रतिशत बढ़कर ₹6.51 लाख करोड़ हो गया है। शुद्ध कॉरपोरेट टैक्स संग्रह में 22 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई और यह लगभग ₹2.40 लाख करोड़ रहा। गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह करीब 12 प्रतिशत बढ़कर ₹3.85 लाख करोड़ पहुँचा। इसके अतिरिक्त, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) संग्रह में 44 प्रतिशत से अधिक की तेज बढ़ोतरी हुई और यह ₹26,000 करोड़ के पार निकल गया।
आगे क्या
नए सीआईआई के साथ करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे वित्त वर्ष 2026-27 में संपत्ति बिक्री की योजना बनाते समय दोनों कर विकल्पों की तुलना करें और अपने कर सलाहकार से परामर्श लें। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी संपत्तियों के मामले में इंडेक्सेशन वाला विकल्प अभी भी अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है।