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वांग यी: यूएन चार्टर की अनदेखी से लौट रहा है जंगली कानून, बहुपक्षवाद को बचाना ज़रूरी

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वांग यी: यूएन चार्टर की अनदेखी से लौट रहा है जंगली कानून, बहुपक्षवाद को बचाना ज़रूरी

सारांश

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में साफ कहा — बहुपक्षवाद की समस्या यूएन में नहीं, बल्कि यूएन चार्टर की अनदेखी में है। जंगली कानून की वापसी रोकने के लिए उन्होंने प्रभुसत्ता की समानता, यूएन सुधार और वैश्विक दक्षिण देशों की बढ़ी हुई भागीदारी का आह्वान किया।

मुख्य बातें

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 17 जून को बीजिंग में संवाददाता सम्मेलन में बहुपक्षवाद की विफलता पर अपना पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि जंगली कानून की वापसी का कारण यूएन चार्टर का पुराना पड़ना नहीं, बल्कि उसकी प्रभावी सुरक्षा न होना है।
80 से अधिक वर्ष पहले दो विश्व युद्धों की तबाही के बाद स्थापित यूएन की प्रतिष्ठा और भूमिका को आज नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
वांग यी ने वैश्विक दक्षिण देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए यूएन सुधार में तेज़ी लाने की माँग की।
चीन ने यूएन चार्टर के पहले हस्ताक्षरकर्ताओं में से एक होने के नाते वैश्विक शासन पहल के ज़रिए यूएन के पुनरुत्थान की प्रतिबद्धता जताई।

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बुधवार, 17 जून को बीजिंग में चीनी राज्य परिषद सूचना कार्यालय द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन में स्पष्ट किया कि आज बहुपक्षवाद की विफलता का कारण संयुक्त राष्ट्र की अप्रासंगिकता नहीं, बल्कि उसकी प्रतिष्ठा और भूमिका की लगातार अनदेखी है। उन्होंने कहा कि जंगली कानून की वापसी इसलिए नहीं हो रही कि यूएन चार्टर पुराना पड़ गया है, बल्कि इसलिए कि उसकी प्रभावी रूप से रक्षा नहीं की गई।

ऐतिहासिक संदर्भ: दो विश्व युद्धों का सबक

वांग यी ने याद दिलाया कि 80 से अधिक वर्ष पहले जंगली कानून के प्रकोप ने मानवता को अभूतपूर्व विनाश की ओर धकेला था। दो विश्व युद्धों की तबाही के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने बहुपक्षवाद के सिद्धांत पर आधारित संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की थी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एकपक्षीय कार्रवाइयों और बल-राजनीति के उदाहरण बढ़ते जा रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है।

मौजूदा वैश्विक चुनौतियों पर चीन का रुख

वांग यी के अनुसार, वर्तमान वैश्विक संकटों से निपटने के लिए तत्काल आवश्यक है कि यूएन चार्टर के दायित्वों को व्यवहार में लाया जाए। उन्होंने प्रभुसत्ता की समानता और अंतरराष्ट्रीय कानूनी शासन के पालन पर ज़ोर देते हुए बल-राजनीति का विरोध करने और संयुक्त राष्ट्र को उसकी केंद्रीय भूमिका में पुनर्स्थापित करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि यूएन के माध्यम से वैश्विक सहमतियाँ एकत्र कर वैश्विक शासन की कमियों को दूर किया जाना चाहिए।

यूएन सुधार और वैश्विक दक्षिण की आवाज़

वांग यी ने यूएन सुधार की प्रक्रिया को गति देने की भी वकालत की। उनका विशेष आग्रह था कि इस सुधार में वैश्विक दक्षिण देशों का प्रतिनिधित्व और अभिव्यक्ति बढ़ाई जाए, जो वर्तमान वैश्विक संस्थाओं में अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व पाते हैं। गौरतलब है कि यह माँग वर्षों से विकासशील देशों की ओर से उठाई जाती रही है।

चीन की प्रतिबद्धता और आगे की राह

वांग यी ने रेखांकित किया कि चीन यूएन चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले प्रथम देशों में से एक है। उन्होंने कहा कि चीन अपनी वैश्विक शासन पहल के ज़रिए संयुक्त राष्ट्र की प्रतिष्ठा को मज़बूत करने और विभिन्न देशों के साथ मिलकर यूएन के पुनरुत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन का यह रुख उसकी उस व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह खुद को बहुपक्षवाद के रक्षक के रूप में प्रस्तुत करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि आलोचकों का कहना है कि दक्षिण चीन सागर में उसके अपने कदम अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के फैसलों को नकारते हैं। वैश्विक दक्षिण के प्रतिनिधित्व की माँग वैध है, लेकिन यह भी उल्लेखनीय है कि चीन स्वयं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और वीटो शक्ति का उपयोग करता रहा है। असली प्रश्न यह है कि क्या यूएन सुधार की चीनी परिकल्पना में जवाबदेही के तंत्र भी शामिल हैं, या यह केवल पश्चिमी प्रभुत्व के विरुद्ध कूटनीतिक संतुलन साधने की कोशिश है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वांग यी ने जंगली कानून की वापसी के बारे में क्या कहा?
वांग यी ने कहा कि जंगली कानून की वापसी इसलिए नहीं हो रही कि यूएन चार्टर पुराना हो गया है, बल्कि इसलिए कि उसकी प्रभावी रूप से सुरक्षा नहीं की गई। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यूएन चार्टर के दायित्वों को व्यवहार में लाना होगा।
चीन यूएन सुधार पर क्या रुख रखता है?
चीन चाहता है कि यूएन सुधार में वैश्विक दक्षिण देशों का प्रतिनिधित्व और अभिव्यक्ति बढ़ाई जाए। वांग यी ने कहा कि चीन अपनी वैश्विक शासन पहल के ज़रिए संयुक्त राष्ट्र की प्रतिष्ठा को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
बहुपक्षवाद की विफलता का असली कारण क्या बताया गया?
वांग यी के अनुसार, बहुपक्षवाद की विफलता का कारण संयुक्त राष्ट्र की अप्रासंगिकता नहीं है, बल्कि उसकी प्रतिष्ठा और भूमिका का समादर न किया जाना है। उन्होंने कहा कि यूएन की केंद्रीय भूमिका को पुनर्स्थापित करना आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है।
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना किस पृष्ठभूमि में हुई थी?
वांग यी ने याद दिलाया कि 80 से अधिक वर्ष पहले दो विश्व युद्धों की विनाशकारी तबाही के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने बहुपक्षवाद के आधार पर संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की थी। यह संस्था जंगली कानून के खिलाफ एक सामूहिक प्रतिक्रिया थी।
चीन ने यूएन चार्टर के संदर्भ में अपनी क्या भूमिका बताई?
चीन ने कहा कि वह यूएन चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले प्रथम देशों में से एक है और वैश्विक शासन पहल के ज़रिए यूएन की प्रतिष्ठा बढ़ाने तथा विभिन्न देशों के साथ मिलकर यूएन के पुनरुत्थान के लिए तैयार है।
राष्ट्र प्रेस
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