25 सितंबर 2026
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UP में 'ड्रग फ्री जोन': स्कूल-कॉलेज के 500 मीटर दायरे में नशे पर सख्त शिकंजा, 10 जिले हॉट स्पॉट घोषित

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UP में 'ड्रग फ्री जोन': स्कूल-कॉलेज के 500 मीटर दायरे में नशे पर सख्त शिकंजा, 10 जिले हॉट स्पॉट घोषित

सारांश

उत्तर प्रदेश में स्कूल-कॉलेजों के 500 मीटर दायरे को 'ड्रग फ्री जोन' बनाने का निर्देश दिया गया है। लखनऊ समेत 10 जिले हॉट स्पॉट घोषित हैं और 2022 से अब तक ₹1,925 करोड़ के मादक पदार्थों का निस्तारण हो चुका है — यह राज्य की नशा-विरोधी मुहिम का अब तक का सबसे व्यापक खाका है।

मुख्य बातें

गोयल ने 25 सितंबर 2026 को एनकॉर्ड बैठक में स्कूल-कॉलेजों के 500 मीटर दायरे को 'ड्रग फ्री जोन' घोषित करने के निर्देश दिए।
लखनऊ, कानपुर, गौतमबुद्धनगर, गाज़ियाबाद, आगरा, बरेली, शामली, बाराबंकी, सहारनपुर और सोनभद्र को प्रमुख हॉट स्पॉट चिन्हित किया गया; हर क्षेत्र में 20 हाई वैल्यू टारगेट पर कार्रवाई जारी।
वर्ष 2026 में अब तक 3,737 अभियोग , 5,390 गिरफ्तारियाँ और 32,768 किलोग्राम मादक पदार्थ बरामद।
एएनटीएफ के गठन के बाद 2022 से अगस्त 2026 तक 4,37,902 किलोग्राम का निस्तारण; अनुमानित मूल्य ₹1,925 करोड़ ।
भांग की लाइसेंसी दुकानें 1,588 (2023-24) से घटाकर 1,288 (2026-27) की गईं।
जनवरी-जून 2026 में 2,642 जागरूकता कार्यक्रम ; 1,50,711 लोगों को नशा-मुक्ति की शपथ।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 25 सितंबर 2026 को राज्य में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर कड़ी कार्रवाई का नया खाका पेश किया — स्कूलों और कॉलेजों के 500 मीटर के दायरे को आधिकारिक रूप से 'ड्रग फ्री जोन' घोषित किया जाएगा और चिन्हित हॉट स्पॉट पर निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। यह निर्देश मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने लखनऊ में नारकोटिक्स कंट्रोल एवं समन्वय तंत्र (एनकॉर्ड) की राज्य स्तरीय समिति की तृतीय बैठक में दिए।

बैठक में क्या तय हुआ

मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित हों और चिन्हित हॉट स्पॉट की लगातार निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप इन क्षेत्रों की संवेदनशीलता कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिया कि प्री-कर्सर रसायनों, एसीटिक एनहाइड्राइड, नियंत्रित पदार्थों और नशीली दवाओं के दुरुपयोग व अवैध डायवर्जन पर कड़ी नजर रखी जाए। साथ ही एनडीपीएस एक्ट के तहत निरोधात्मक कार्रवाई को प्रभावी बनाने और अवैध मादक पदार्थों से अर्जित संपत्तियों की पहचान व जब्ती में तेज़ी लाने के निर्देश दिए गए।

10 ज़िले हॉट स्पॉट, हर क्षेत्र में 20 हाई वैल्यू टारगेट

आईजी एएनटीएफ अब्दुल हमीद ने बैठक में बताया कि पिछले 10 वर्षों के मादक पदार्थ जब्ती विश्लेषण के आधार पर लखनऊ, कानपुर, गौतमबुद्धनगर, गाज़ियाबाद, आगरा, बरेली, शामली, बाराबंकी, सहारनपुर और सोनभद्र को प्रमुख हॉट स्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है। प्रत्येक क्षेत्र में 20 हाई वैल्यू टारगेट चिन्हित कर कार्रवाई की जा रही है।

गौरतलब है कि वर्ष 2026 में अब तक प्रदेश में एनडीपीएस एक्ट के तहत 3,737 अभियोग दर्ज किए गए और 5,390 अभियुक्त गिरफ्तार किए गए। इसी अवधि में 32,768 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ बरामद किए गए।

एएनटीएफ का रिकॉर्ड और ₹1,925 करोड़ के मादक पदार्थों का निस्तारण

एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने वर्ष 2026 में अब तक 153 अभियोग दर्ज कर 340 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया और 8,135.52 किलोग्राम मादक पदार्थ बरामद किए। एएनटीएफ के गठन के बाद वर्ष 2022 से अगस्त 2026 तक प्रदेश में 4,37,902 किलोग्राम मादक पदार्थों का निस्तारण कराया गया, जिनकी अनुमानित कीमत करीब ₹1,925 करोड़ बताई गई है। प्रदेश स्तर पर अब तक करीब ₹78 करोड़ की संपत्ति भी जब्त की जा चुकी है।

जागरूकता अभियान और भांग की दुकानों में कटौती

जनवरी से जून 2026 तक 2,642 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 1,50,711 लोगों को मादक पदार्थों का सेवन न करने की शपथ दिलाई गई। इसी कड़ी में वर्ष 2026 में अब तक 563 जिला स्तरीय गोष्ठियाँ भी आयोजित हो चुकी हैं।

क्षेत्रीय आवश्यकता के आकलन के आधार पर भांग की लाइसेंसी दुकानों की संख्या वर्ष 2023-24 में 1,588 से घटाकर वर्ष 2026-27 में 1,288 कर दी गई है। अवैध अफीम की खेती की सूचना देने के लिए सीबीएन और सेंट्रल इकोनॉमिक इंटेलिजेंस ब्यूरो द्वारा व्हाट्सऐप नंबर 986855002 जारी किया गया है।

आगे की योजना

अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2026-27 के लाइसेंस वितरण की प्रक्रिया सितंबर से शुरू हो चुकी है। नवंबर में बुवाई और जनवरी-फरवरी में लाइसेंस प्राप्त फसलों की पैमाइश तथा जीपीएस कोऑर्डिनेट्स लेने की कार्रवाई की जाएगी। विभिन्न विभागों के आंकड़ों के आधार पर तैयार डैशबोर्ड के प्रारूप की भी बैठक में जानकारी दी गई — जो भविष्य में ड्रग नेटवर्क की रियल-टाइम मैपिंग का आधार बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

925 करोड़ के निस्तारण और 5,390 गिरफ्तारियों के आँकड़े गंभीर कार्रवाई का संकेत देते हैं — लेकिन असली सवाल यह है कि 'ड्रग फ्री जोन' की घोषणा मात्र से जमीनी हकीकत कितनी बदलेगी। हॉट स्पॉट बार-बार वही जिले हैं जो पिछले दशक से सूची में हैं, जो बताता है कि समस्या की जड़ें केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं उखड़ेंगी। काउंसलिंग और पुनर्वास पर जोर देना सकारात्मक कदम है, लेकिन जब तक इसके लिए स्वतंत्र बजट आवंटन और जवाबदेही तंत्र नहीं होगा, यह भी एक घोषणा बनकर रह सकती है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UP में 'ड्रग फ्री जोन' क्या है और यह कहाँ लागू होगा?
'ड्रग फ्री जोन' उत्तर प्रदेश सरकार की वह नीति है जिसके तहत राज्य के सभी स्कूलों और कॉलेजों के 500 मीटर के दायरे में मादक पदार्थों की बिक्री, तस्करी और सेवन पर सख्त प्रतिबंध लागू किया जाएगा। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने 25 सितंबर 2026 को एनकॉर्ड बैठक में यह निर्देश जारी किए।
उत्तर प्रदेश में कौन-से जिले नशे के हॉट स्पॉट घोषित हैं?
पिछले 10 वर्षों के मादक पदार्थ जब्ती विश्लेषण के आधार पर लखनऊ, कानपुर, गौतमबुद्धनगर, गाज़ियाबाद, आगरा, बरेली, शामली, बाराबंकी, सहारनपुर और सोनभद्र को प्रमुख हॉट स्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है। प्रत्येक क्षेत्र में 20 हाई वैल्यू टारगेट पर सक्रिय कार्रवाई की जा रही है।
2026 में उत्तर प्रदेश में एनडीपीएस एक्ट के तहत कितनी गिरफ्तारियाँ हुईं?
वर्ष 2026 में अब तक प्रदेश में एनडीपीएस एक्ट के तहत 3,737 अभियोग दर्ज किए गए और 5,390 अभियुक्त गिरफ्तार किए गए। इसी अवधि में 32,768 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ बरामद किए गए।
एएनटीएफ के गठन के बाद से UP में कितने मादक पदार्थों का निस्तारण हुआ?
एएनटीएफ के गठन के बाद वर्ष 2022 से अगस्त 2026 तक प्रदेश में 4,37,902 किलोग्राम मादक पदार्थों का निस्तारण कराया गया, जिनकी अनुमानित कीमत करीब ₹1,925 करोड़ है। इसके अलावा प्रदेश स्तर पर अब तक करीब ₹78 करोड़ की संपत्ति भी जब्त की जा चुकी है।
अवैध अफीम की खेती की सूचना कैसे दें?
अवैध अफीम की खेती की सूचना देने के लिए सीबीएन और सेंट्रल इकोनॉमिक इंटेलिजेंस ब्यूरो द्वारा व्हाट्सऐप नंबर 986855002 जारी किया गया है। नागरिक इस नंबर पर सूचना भेजकर अवैध खेती की जानकारी अधिकारियों तक पहुँचा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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