UP विधान परिषद चुनाव: CM योगी ने विजेताओं को दी बधाई, शिवराज का कांग्रेस पर 'शून्य' तंज
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 28 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के द्विवार्षिक चुनाव 2026 में विजयी हुए सभी उम्मीदवारों को बधाई दी। इसी क्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी चुनावी नतीजों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस पर करारा निशाना साधा। बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक की कुल 28 सीटों पर हुए इन चुनावों में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी।
मुख्यमंत्री योगी की बधाई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विजयी उम्मीदवारों को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि निर्वाचित प्रतिनिधि शिक्षकों और स्नातकों की आकांक्षाओं को मजबूत आवाज देंगे। उन्होंने कहा कि ये प्रतिनिधि शिक्षकों और स्नातकों के हितों की रक्षा, शिक्षा के विकास और प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान करेंगे।
शिवराज का कांग्रेस पर 'शून्य' तंज
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'लगता है आर्यभट्ट ने शून्य का आविष्कार कांग्रेस के लिए ही किया था। नेतृत्व शून्य, नीति शून्य और परिणाम भी शून्य।' उन्होंने आगे कहा कि ये चुनाव बैलेट पेपर से हुए — जो विपक्ष की लंबे समय से चली आ रही माँग रही है — फिर भी कांग्रेस का खाता नहीं खुल सका।
PM मोदी का विपक्ष पर सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, पर सीधा प्रश्न दागा। उन्होंने उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की 28 विधान परिषद सीटों पर चुनाव मतपत्रों (बैलेट पेपर) से हुए और पूछा कि कांग्रेस इनमें कितनी सीटें जीत पाई। यह टिप्पणी इस लिहाज से अहम है क्योंकि कांग्रेस और विपक्षी दल लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर सवाल उठाते रहे हैं और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग करते रहे हैं।
कांग्रेस को झटका, कर्नाटक में भी सफाया
चुनाव परिणामों के अनुसार, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की 28 सीटों पर हुए मतदान के नतीजे घोषित हो चुके हैं। कांग्रेस को इन चुनावों में बड़ा झटका लगा और वह अनेक राज्यों में एक भी सीट नहीं जीत सकी। कर्नाटक में — जहाँ कांग्रेस की सरकार है — भी पार्टी को सभी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, जो पार्टी के लिए विशेष रूप से असुविधाजनक परिणाम माना जा रहा है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की दिशा
गौरतलब है कि ये विधान परिषद सीटें स्नातक और शिक्षक मतदाताओं द्वारा चुनी जाती हैं और इनके परिणामों को सीधे सत्तारूढ़ दलों के जनाधार का पैमाना नहीं माना जा सकता। हालाँकि, सत्ताधारी दलों के नेताओं ने इन नतीजों को कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी के प्रमाण के रूप में पेश किया है। बैलेट पेपर बनाम ईवीएम की बहस के बीच इन परिणामों का राजनीतिक इस्तेमाल आने वाले दिनों में भी जारी रहने की संभावना है।