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एमएलसी चुनाव: 4 राज्यों की 28 सीटों पर कांग्रेस का सूपड़ा साफ, सुवेंदु अधिकारी ने बैलेट पेपर पर उठाए सवाल

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एमएलसी चुनाव: 4 राज्यों की 28 सीटों पर कांग्रेस का सूपड़ा साफ, सुवेंदु अधिकारी ने बैलेट पेपर पर उठाए सवाल

सारांश

चार राज्यों में बैलेट पेपर से हुए 28 एमएलसी सीटों के चुनाव में कांग्रेस खाली हाथ रही — शून्य सीट। BJP नेता सुवेंदु अधिकारी और PM मोदी ने इसे ईवीएम विरोधी तर्क की सार्वजनिक पराजय बताया। यह नतीजा कांग्रेस की चुनावी विश्वसनीयता पर गहरे सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

2026 के एमएलसी चुनावों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की 28 सीटों पर कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली।
ये चुनाव ईवीएम की बजाय बैलेट पेपर से कराए गए थे।
पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने एक्स पर PM मोदी की पोस्ट रीपोस्ट कर कांग्रेस की ईवीएम-विरोधी राजनीति को 'चकनाचूर' बताया।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने व्यंग्य किया — 'नेतृत्व शून्य, नीति शून्य, परिणाम शून्य।' महाराष्ट्र में महायुति और MVA के बीच मुकाबला रहा, लेकिन कांग्रेस वहाँ भी नहीं चली।

पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने 28 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए 2026 के विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के शून्य प्रदर्शन पर तीखी टिप्पणी की। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक — इन चार राज्यों की कुल 28 सीटों पर हुए ये चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए, और कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी।

सुवेंदु अधिकारी की प्रतिक्रिया

अधिकारी ने एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 'बिल्कुल सटीक बात' कही है। उन्होंने कहा: 'चार प्रमुख राज्यों की 28 एमएलसी सीटों पर कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली — एक भी सीट नहीं। और सबसे बड़ा मजाक तो यही है: ये चुनाव ईवीएम के बजाय कागज के मतपत्रों से कराए गए।' उन्होंने यह भी कहा कि 'सालों से, जब भी मतदाताओं ने कांग्रेस को सिरे से नकारा है, तो उसकी हमेशा की तरह बहाने बनाने की आदत सक्रिय हो जाती है और वह ईवीएम को दोष देती है।' अधिकारी के अनुसार, बैलेट पेपर से चुनाव होने के बाद भी शून्य सीटें मिलने से 'ईवीएम विरोधी नारा पूरी तरह चकनाचूर हो गया।'

प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव परिणामों पर टिप्पणी करते हुए पूछा था कि चार बड़े राज्यों में 28 सीटों पर मतपत्रों से हुए चुनावों में कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि 'आर्यभट्ट ने शून्य का आविष्कार कांग्रेस के लिए ही किया था — नेतृत्व शून्य, नीति शून्य और परिणाम भी शून्य।' उन्होंने रेखांकित किया कि अलग-अलग राज्यों में बैलेट पेपर से चुनाव होने के बाद भी कांग्रेस का खाता शून्य ही रहा।

चुनाव परिणामों का विवरण

2026 के एमएलसी चुनावों के नतीजे बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र — इन चार राज्यों की 28 सीटों के लिए घोषित हो चुके हैं। कांग्रेस तीन राज्यों में एक भी सीट नहीं जीत पाई, और महाराष्ट्र में भी उसका सफाया हुआ। महाराष्ट्र में सत्ताधारी महायुति गठबंधन और विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) के बीच कड़ी टक्कर रही, लेकिन वहाँ भी कांग्रेस की स्थिति नाजुक रही।

ईवीएम बनाम बैलेट पेपर विवाद

गौरतलब है कि विपक्षी दलों ने अनेक चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) पर सवाल उठाए हैं और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग की है। यह ऐसे समय में आया है जब इन चार राज्यों के एमएलसी चुनाव वास्तव में बैलेट पेपर से ही कराए गए, और फिर भी परिणाम कांग्रेस के पक्ष में नहीं रहे। भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेताओं ने इसे कांग्रेस की ईवीएम-विरोधी राजनीति के खिलाफ एक निर्णायक तर्क के रूप में प्रस्तुत किया है।

आगे क्या

इन नतीजों का असर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और इंडिया गठबंधन के बीच चल रही राजनीतिक बहस पर पड़ना तय है। कांग्रेस ने अभी तक इन टिप्पणियों का सार्वजनिक जवाब नहीं दिया है। आगामी राज्य विधानसभा चुनावों के मद्देनजर यह परिणाम विपक्षी एकता और रणनीति पर नए सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उसके उस केंद्रीय आख्यान का पतन है जो वर्षों से ईवीएम को पराजय का कारण बताता रहा है। BJP ने इस परिणाम को तत्परता से भुनाया है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इन राज्यों में संगठनात्मक रूप से इतनी कमज़ोर हो गई है कि उसे जीतने योग्य सीटें भी नहीं दिख रहीं, या रणनीतिक कारणों से वह इन चुनावों में उतरी ही नहीं थी। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि कर्नाटक में — जहाँ कांग्रेस की सरकार है — भी उसका प्रदर्शन शून्य रहा, जो राज्य सरकार की पकड़ को लेकर भी सवाल उठाता है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 के एमएलसी चुनावों में कांग्रेस को कितनी सीटें मिलीं?
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की कुल 28 सीटों पर हुए 2026 के एमएलसी चुनावों में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली। उल्लेखनीय है कि ये चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए थे, न कि ईवीएम से।
सुवेंदु अधिकारी ने एमएलसी चुनाव नतीजों पर क्या कहा?
सुवेंदु अधिकारी ने एक्स पर PM मोदी की पोस्ट रीपोस्ट करते हुए कहा कि बैलेट पेपर से चुनाव होने के बाद भी कांग्रेस का शून्य पर रहना, उसके ईवीएम-विरोधी नारे को 'इतिहास के कूड़ेदान' में भेज देता है। उन्होंने कांग्रेस पर हमेशा बहाने बनाने का आरोप भी लगाया।
क्या महाराष्ट्र के एमएलसी चुनावों में कांग्रेस का कोई प्रदर्शन था?
महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन और महाविकास अघाड़ी (MVA) के बीच कड़ी टक्कर रही, लेकिन वहाँ भी कांग्रेस की स्थिति नाजुक रही और उसका सफाया हो गया। सूत्रों के अनुसार, महाराष्ट्र में भी पार्टी खाली हाथ रही।
ईवीएम और बैलेट पेपर विवाद का इन नतीजों से क्या संबंध है?
विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने, पिछले कई चुनावों में ईवीएम पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए बैलेट पेपर की माँग की थी। इन चार राज्यों के एमएलसी चुनाव बैलेट पेपर से ही कराए गए, और तब भी कांग्रेस को शून्य सीट मिली — BJP नेताओं ने इसे ईवीएम-विरोधी तर्क की पराजय बताया।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने क्या टिप्पणी की?
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि 'आर्यभट्ट ने शून्य का आविष्कार कांग्रेस के लिए ही किया था — नेतृत्व शून्य, नीति शून्य और परिणाम भी शून्य।' उन्होंने रेखांकित किया कि बैलेट पेपर से चुनाव होने के बाद भी पार्टी का खाता शून्य रहा।
राष्ट्र प्रेस
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