29 सितंबर 2026
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ईवीएम बनाम बैलेट पेपर विवाद: NDA नेताओं ने कहा — बैलेट दौर में होते थे मतदान केंद्रों पर कब्जे

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ईवीएम बनाम बैलेट पेपर विवाद: NDA नेताओं ने कहा — बैलेट दौर में होते थे मतदान केंद्रों पर कब्जे

सारांश

ईवीएम बनाम बैलेट पेपर की बहस एक बार फिर गरमाई — NDA नेताओं ने बैलेट दौर को 'बूथ कब्जे का युग' बताया, जबकि सपा ने ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोप दोहराए। भाजपा के राम कदम ने विपक्ष पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया — जीते तो ईवीएम ठीक, हारे तो सवाल।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बैलेट पेपर की माँग को 'झूठ' करार दिया और अखिलेश यादव पर निशाना साधा।
BJP नेता राम कदम ने कहा — कर्नाटक और केरल में जीत पर ईवीएम ठीक, महाराष्ट्र और UP में हार पर सवाल — यह दोहरा मापदंड है।
जदयू नेता राजीव रंजन ने कहा — बैलेट दौर में मतदान केंद्रों पर कब्जे होते थे, मतदाता उस दौर में वापस नहीं जाना चाहता।
सपा नेता एसटी हसन ने ईवीएम में हैकिंग और छेड़छाड़ का आरोप लगाया, ई-वोटिंग को विकल्प बताया।
सपा नेता आशुतोष वर्मा ने कहा — ईवीएम से जीतें तब भी पार्टी ईवीएम के खिलाफ थी, है और रहेगी।

ईवीएम और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग को लेकर लखनऊ में 29 सितंबर को सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। जहाँ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने बैलेट पेपर के दौर को 'बूथ कब्जे और हिंसा' का युग बताया, वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) ने ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोप दोहराते हुए बैलेट से चुनाव की अपनी माँग पर अडिग रहने की बात कही।

मंत्री ओमप्रकाश राजभर की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बैलेट पेपर की माँग को सीधे खारिज करते हुए कहा, 'अखिलेश यादव को पता है कि वे जीत नहीं रहे हैं। ये सब झूठ बोलने के ठेकेदार हैं।' राजभर का यह बयान सपा प्रमुख अखिलेश यादव की ईवीएम-विरोधी मुहिम पर सीधा हमला माना जा रहा है।

भाजपा नेता राम कदम का दोहरे मापदंड पर सवाल

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता राम कदम ने विपक्ष पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'विपक्ष की जब कर्नाटक में जीत होती है तो ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल नहीं उठाया जाता। केरल में विपक्ष की सरकार बनती है तो चुनाव आयोग को निष्पक्ष कहा जाता है। वहीं, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में चुनाव हार जाने के बाद ईवीएम पर सवाल उठाया जाता है।' कदम ने आगे कहा, 'ये दोहरा मापदंड कैसे चलेगा? जहाँ इनकी जीत होती है, वहाँ लोकतंत्र मज़बूत और जहाँ हारे वहाँ चुनाव आयोग, न्यायपालिका और ईवीएम का रोना शुरू हो जाता है।'

जदयू नेता राजीव रंजन का ऐतिहासिक संदर्भ

जनता दल (यूनाइटेड) के नेता राजीव रंजन ने बैलेट पेपर के दौर की याद दिलाते हुए कहा, 'बैलेट पेपर के दौर में मतदान केंद्रों पर कब्जे होते थे। जब दो पार्टियाँ चुनाव लड़ती थीं तो ऐसा लगता था दो देशों के बीच चुनाव हो रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि 'मतदाता उस दौर में वापस नहीं जाना चाहता।' रंजन के अनुसार, 'भारत जैसे बड़े लोकतंत्र के लिए ईवीएम एक बेहतर माध्यम साबित हो चुका है। ईवीएम से हुए चुनाव में BJP, कांग्रेस, UPA या NDA की सरकारें बनी हैं, इसलिए इसकी वैधता और पारदर्शिता पर कोई सवाल नहीं है।'

सपा नेताओं की दो-टूक — ईवीएम के खिलाफ थे, हैं और रहेंगे

समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने कहा, 'हम लोग काफी दिनों से कह रहे हैं कि चुनाव ईवीएम से नहीं बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए। ईवीएम हैक की जा रही है, उसके साथ छेड़छाड़ की जा रही है।' हसन ने ई-वोटिंग को एक विकल्प के रूप में प्रस्तावित करते हुए कहा कि इससे सरकार का बड़ा खर्चा बचेगा और मतदान में पारदर्शिता आएगी।

सपा नेता आशुतोष वर्मा ने कहा, 'सपा का पहले से मानना है और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से सदन में इसको लेकर वक्तव्य दिया गया है। हम ईवीएम से चुनाव जीतेंगे, तब भी हम ईवीएम के खिलाफ हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि 'उत्तर प्रदेश की बहुत बड़ी आबादी ईवीएम पर विश्वास नहीं करती। ऐसे में अगर ज़रा सा भी सच है तो लोकतंत्र को मज़बूत बनाने के लिए हम ईवीएम के खिलाफ थे, हैं और रहेंगे।'

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब आगामी राज्य चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज़ हो रही है और ईवीएम की विश्वसनीयता एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गई है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय पहले भी ईवीएम की वैधता को बरकरार रख चुका है। अब देखना होगा कि क्या यह बहस संसद या चुनाव आयोग के स्तर पर कोई ठोस नीतिगत चर्चा को जन्म देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हारने वाला उसे संदिग्ध। भाजपा के राम कदम का 'दोहरे मापदंड' वाला तर्क तथ्यात्मक रूप से मज़बूत है, क्योंकि ईवीएम से कांग्रेस, UPA और क्षेत्रीय दलों की सरकारें भी बनी हैं। लेकिन मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि सपा का ई-वोटिंग का प्रस्ताव, यदि गंभीरता से लिया जाए, तो एक अलग नीतिगत बहस का हकदार है। असली सवाल यह है कि क्या कोई भी दल इस मुद्दे को चुनावी हथियार से आगे ले जाकर संसदीय समिति या चुनाव आयोग के समक्ष ठोस प्रस्ताव के रूप में रखने को तैयार है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईवीएम बनाम बैलेट पेपर विवाद क्या है?
विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी, की माँग है कि चुनाव ईवीएम की बजाय बैलेट पेपर से कराए जाएँ। उनका आरोप है कि ईवीएम में छेड़छाड़ संभव है। NDA नेताओं ने इसे खारिज करते हुए बैलेट दौर में बूथ कब्जे और हिंसा की याद दिलाई है।
जदयू नेता राजीव रंजन ने बैलेट पेपर के बारे में क्या कहा?
राजीव रंजन ने कहा कि बैलेट पेपर के दौर में मतदान केंद्रों पर कब्जे होते थे और चुनाव किसी युद्ध जैसे लगते थे। उन्होंने कहा कि मतदाता उस दौर में वापस नहीं जाना चाहता और भारत जैसे बड़े लोकतंत्र के लिए ईवीएम बेहतर माध्यम साबित हो चुका है।
सपा ने ईवीएम के खिलाफ क्या तर्क दिए?
सपा नेता एसटी हसन ने ईवीएम में हैकिंग और छेड़छाड़ का आरोप लगाया। आशुतोष वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी ईवीएम पर भरोसा नहीं करती और पार्टी ईवीएम से जीतने पर भी उसके खिलाफ रहेगी।
भाजपा ने विपक्ष पर दोहरे मापदंड का आरोप क्यों लगाया?
भाजपा नेता राम कदम ने कहा कि जब विपक्ष कर्नाटक और केरल में जीतता है तो ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल नहीं उठाता, लेकिन महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में हार के बाद ईवीएम को दोष देता है। उनके अनुसार यह दोहरा मापदंड लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमज़ोर करता है।
क्या सर्वोच्च न्यायालय ने ईवीएम की वैधता पर कोई फैसला दिया है?
हाँ, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पहले भी ईवीएम की वैधता को बरकरार रखा है और इसे पारदर्शी व विश्वसनीय बताया है। NDA नेताओं ने इस तथ्य का हवाला देते हुए बैलेट पेपर की माँग को अस्वीकार किया है।
राष्ट्र प्रेस
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