ईवीएम और एसआईआर विवाद पर भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह का पलटवार — 'हार की खीझ में उठा रहे सवाल'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता आरपी सिंह ने 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में विपक्ष पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर उठाए जा रहे सवाल चुनावी हार की खीझ से उपजे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष की माँगें तथ्यों पर नहीं, बल्कि राजनीतिक हताशा पर आधारित हैं।
ईवीएम पर विपक्ष के आरोप और भाजपा का जवाब
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की विपक्षी माँग को खारिज करते हुए सिंह ने कहा, 'सबको याद है कि जब बैलेट पेपर था, तब किस प्रकार से चुनाव लूटे जाते थे।' उन्होंने तर्क दिया कि यदि ईवीएम में सचमुच गड़बड़ी होती, तो विपक्ष कर्नाटक, तेलंगाना और केरल के चुनाव कभी नहीं जीत पाता। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ईवीएम को मूलतः राजीव गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने देश में लाया था।
गौरतलब है कि संसदीय चुनावों में मिली आंशिक सफलता के बाद विपक्ष ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना बंद कर दिया था, लेकिन हालिया राज्य चुनावों में हार के बाद यह मुद्दा फिर सामने आया है।
एसआईआर पर विपक्ष की दोहरी स्थिति
सिंह ने एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष की 'दोहरी नीति' की ओर इशारा किया। उनके अनुसार, विपक्षी नेता पंजाब में एसआईआर की प्रशंसा कर चुके हैं और केरल के गृह मंत्री रमेश ने भी एसआईआर की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं के 'बेटे' ने स्वयं वोट काटने की वकालत की थी, और 22 लाख से अधिक वोट कटे तो उसकी भी सराहना हुई — अब उन्हीं की पार्टी एसआईआर का विरोध कर रही है। सिंह ने इसे 'हार की खीझ मिटाने का रास्ता' करार दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी और राहुल गांधी के मामले पर प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत माता-पिता पर कांग्रेस अध्यक्ष की कथित टिप्पणी पर सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अब तक विपक्ष ने 132 बार प्रधानमंत्री के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया है। उन्होंने कहा, 'जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, उन्हें राजनीति में घसीटना ठीक नहीं।'
मानहानि मामले में राहुल गांधी के बरी होने पर सिंह ने कहा कि जब फैसला पक्ष में आता है तो सब ठीक लगता है, लेकिन जब विरुद्ध आता है तो संस्थाओं पर सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा की उस टिप्पणी का भी हवाला दिया जब उन्होंने न्यायालय के एक पुराने आदेश पर आपत्ति जताई थी।
दिल्ली में प्रदर्शन और व्यापारियों का नुकसान
राजधानी दिल्ली में जारी प्रदर्शनों पर सिंह ने कहा कि अब तक व्यापारियों को करीब ₹3,000 करोड़ का नुकसान हो चुका है। उन्होंने कहा कि दिवाली से पहले का यह समय कारोबार के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है और अनुमान है कि कुल नुकसान ₹25,000 करोड़ तक पहुँच सकता है। उन्होंने विपक्ष से अनुरोध किया कि यदि रैली करनी ही है तो 15 नवंबर के बाद करें।
1 नवंबर की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली पर निशाना
1 नवंबर को प्रस्तावित 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली को लेकर सिंह ने कहा कि यह 1984 के सिख दंगों की आड़ में राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश है। उन्होंने राजीव गांधी के उस कथित बयान — 'जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है' — का उल्लेख किया और कहा कि दिल्ली में 3,000 से अधिक सिखों के कत्लेआम की पृष्ठभूमि में यह रैली सिखों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी है।
उन्होंने पंजाब की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए, यह दावा करते हुए कि वहाँ गैंगस्टर राज और नशे का कारोबार हावी है और पुलिस के बीच भी सुरक्षा का डर व्याप्त है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।