26 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ईवीएम और एसआईआर विवाद पर भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह का पलटवार — 'हार की खीझ में उठा रहे सवाल'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ईवीएम और एसआईआर विवाद पर भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह का पलटवार — 'हार की खीझ में उठा रहे सवाल'

सारांश

भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने एक साथ कई मोर्चे खोले — ईवीएम, एसआईआर, कांग्रेस अध्यक्ष की भाषा, राहुल गांधी का बरी होना, दिल्ली में ₹3,000 करोड़ का व्यापारिक नुकसान, और 1 नवंबर की रैली पर 1984 का हवाला। भाजपा की रणनीति साफ है — विपक्ष को उसी के इतिहास से घेरो।

मुख्य बातें

भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने 26 अक्टूबर 2026 को विपक्ष के ईवीएम और एसआईआर विरोध को 'हार की खीझ' करार दिया।
सिंह ने कहा कि यदि ईवीएम में गड़बड़ी होती, तो विपक्ष कर्नाटक, तेलंगाना और केरल के चुनाव नहीं जीतता।
दिल्ली में प्रदर्शनों से व्यापारियों को अब तक करीब ₹3,000 करोड़ का नुकसान, अनुमानित कुल नुकसान ₹25,000 करोड़ ।
1 नवंबर की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली को 1984 के सिख दंगों की आड़ में राजनीति बताया।
कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा PM मोदी के माता-पिता पर टिप्पणी की कड़ी निंदा; कहा — अब तक 132 बार अपशब्द प्रयोग किए गए।
पंजाब में गैंगस्टर राज और नशे के कारोबार का आरोप; कहा — पुलिस भी सुरक्षित नहीं।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता आरपी सिंह ने 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में विपक्ष पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर उठाए जा रहे सवाल चुनावी हार की खीझ से उपजे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष की माँगें तथ्यों पर नहीं, बल्कि राजनीतिक हताशा पर आधारित हैं।

ईवीएम पर विपक्ष के आरोप और भाजपा का जवाब

बैलेट पेपर से चुनाव कराने की विपक्षी माँग को खारिज करते हुए सिंह ने कहा, 'सबको याद है कि जब बैलेट पेपर था, तब किस प्रकार से चुनाव लूटे जाते थे।' उन्होंने तर्क दिया कि यदि ईवीएम में सचमुच गड़बड़ी होती, तो विपक्ष कर्नाटक, तेलंगाना और केरल के चुनाव कभी नहीं जीत पाता। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ईवीएम को मूलतः राजीव गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने देश में लाया था।

गौरतलब है कि संसदीय चुनावों में मिली आंशिक सफलता के बाद विपक्ष ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना बंद कर दिया था, लेकिन हालिया राज्य चुनावों में हार के बाद यह मुद्दा फिर सामने आया है।

एसआईआर पर विपक्ष की दोहरी स्थिति

सिंह ने एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष की 'दोहरी नीति' की ओर इशारा किया। उनके अनुसार, विपक्षी नेता पंजाब में एसआईआर की प्रशंसा कर चुके हैं और केरल के गृह मंत्री रमेश ने भी एसआईआर की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं के 'बेटे' ने स्वयं वोट काटने की वकालत की थी, और 22 लाख से अधिक वोट कटे तो उसकी भी सराहना हुई — अब उन्हीं की पार्टी एसआईआर का विरोध कर रही है। सिंह ने इसे 'हार की खीझ मिटाने का रास्ता' करार दिया।

कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी और राहुल गांधी के मामले पर प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत माता-पिता पर कांग्रेस अध्यक्ष की कथित टिप्पणी पर सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अब तक विपक्ष ने 132 बार प्रधानमंत्री के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया है। उन्होंने कहा, 'जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, उन्हें राजनीति में घसीटना ठीक नहीं।'

मानहानि मामले में राहुल गांधी के बरी होने पर सिंह ने कहा कि जब फैसला पक्ष में आता है तो सब ठीक लगता है, लेकिन जब विरुद्ध आता है तो संस्थाओं पर सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा की उस टिप्पणी का भी हवाला दिया जब उन्होंने न्यायालय के एक पुराने आदेश पर आपत्ति जताई थी।

दिल्ली में प्रदर्शन और व्यापारियों का नुकसान

राजधानी दिल्ली में जारी प्रदर्शनों पर सिंह ने कहा कि अब तक व्यापारियों को करीब ₹3,000 करोड़ का नुकसान हो चुका है। उन्होंने कहा कि दिवाली से पहले का यह समय कारोबार के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है और अनुमान है कि कुल नुकसान ₹25,000 करोड़ तक पहुँच सकता है। उन्होंने विपक्ष से अनुरोध किया कि यदि रैली करनी ही है तो 15 नवंबर के बाद करें।

1 नवंबर की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली पर निशाना

1 नवंबर को प्रस्तावित 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली को लेकर सिंह ने कहा कि यह 1984 के सिख दंगों की आड़ में राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश है। उन्होंने राजीव गांधी के उस कथित बयान — 'जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है' — का उल्लेख किया और कहा कि दिल्ली में 3,000 से अधिक सिखों के कत्लेआम की पृष्ठभूमि में यह रैली सिखों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी है।

उन्होंने पंजाब की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए, यह दावा करते हुए कि वहाँ गैंगस्टर राज और नशे का कारोबार हावी है और पुलिस के बीच भी सुरक्षा का डर व्याप्त है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हर बयान में इतिहास का हथियार। लेकिन ईवीएम पर उनका तर्क — कि विपक्ष राज्यों में जीता इसलिए मशीन ठीक है — तकनीकी जाँच की माँग का जवाब नहीं है; यह राजनीतिक काउंटर है। एसआईआर पर 'दोहरी नीति' का आरोप प्रभावशाली है, लेकिन यह चुनाव आयोग की प्रक्रियागत पारदर्शिता की माँग को नहीं झुठलाता। 1 नवंबर की रैली को 1984 से जोड़ना — जो भाजपा की सुचिंतित रणनीति है — दिखाता है कि आने वाले दिल्ली और पंजाब के राजनीतिक मौसम में इतिहास ही सबसे बड़ा हथियार बनने वाला है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाजपा ने ईवीएम पर विपक्ष के आरोपों का क्या जवाब दिया?
भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि यदि ईवीएम में सचमुच गड़बड़ी होती, तो विपक्ष कर्नाटक, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों में चुनाव नहीं जीत पाता। उन्होंने यह भी बताया कि ईवीएम को मूलतः राजीव गांधी की सरकार देश में लाई थी।
एसआईआर पर भाजपा ने विपक्ष को 'दोहरा' क्यों बताया?
सिंह ने कहा कि विपक्षी नेता पंजाब में एसआईआर की तारीफ कर चुके हैं और केरल के गृह मंत्री रमेश ने भी इसे सराहा है। जिन नेताओं के 'बेटे' ने स्वयं वोट काटने की बात की और 22 लाख से अधिक वोट कटे, उन्होंने उसकी भी प्रशंसा की — अब उन्हीं का एसआईआर विरोध विरोधाभासी है।
दिल्ली में प्रदर्शनों से व्यापारियों को कितना नुकसान हुआ है?
आरपी सिंह के अनुसार दिल्ली में जारी प्रदर्शनों से अब तक व्यापारियों को करीब ₹3,000 करोड़ का नुकसान हो चुका है। दिवाली से पहले का यह समय सीजन का सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी दौर होता है और अनुमानित कुल नुकसान ₹25,000 करोड़ तक पहुँच सकता है।
1 नवंबर की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली पर भाजपा का क्या कहना है?
भाजपा ने इस रैली को 1984 के सिख दंगों की याद दिलाकर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश बताया है। सिंह ने कहा कि राजीव गांधी के शासनकाल में दिल्ली में 3,000 से अधिक सिखों का कत्लेआम हुआ था और यह रैली सिखों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी है।
राहुल गांधी के मानहानि मामले में बरी होने पर भाजपा की क्या प्रतिक्रिया रही?
आरपी सिंह ने कहा कि अपेक्षा है कि जब अगली बार उनके विरुद्ध कोई आदेश आएगा, तब भी इसी तरह की प्रतिक्रिया दी जाएगी। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह फैसला पक्ष में आने पर संस्थाओं की तारीफ करता है और विरुद्ध आने पर सवाल उठाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 4 दिन पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले