ईवीएम और चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोप हार की खीझ: भाजपा नेता अशोक बाजपेयी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता अशोक बाजपेयी ने 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चुनावी हार के बाद बार-बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और निर्वाचन आयोग को कठघरे में खड़ा करना विपक्ष की हताशा और निराशा का प्रतीक है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग पर सर्वोच्च न्यायालय का रुख सामने आया है।
ईवीएम और चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोप
बाजपेयी ने कहा कि जिन राज्यों में विपक्षी दल सत्ता में आते हैं — जैसे केरल और तमिलनाडु — वहाँ उन्हें न ईवीएम से आपत्ति होती है, न निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर संदेह। लेकिन जहाँ भाजपा जीतती है, वहीं इन्हीं संस्थाओं पर प्रश्नचिह्न लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत विपक्ष को असहज करती है, जबकि अन्य राज्यों में विपक्ष की जीत पर उन्हें कोई एतराज नहीं होता।
उन्होंने आगे तर्क दिया कि चुनाव के बाद जनता को अपनी हार का जवाब देने के बजाय ईवीएम और निर्वाचन आयोग को निशाना बनाना विपक्ष के लिए एक 'आसान रास्ता' बन गया है।
सुप्रीम कोर्ट और CEC निलंबन की मांग
CEC ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की माँग पर सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप को लेकर बाजपेयी ने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में अपना निर्णय दिया है और इस पर अतिरिक्त बहस की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट तथ्यों के आधार पर फैसला करता है, न कि केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर। विपक्षी नेताओं की यह माँग, उनके शब्दों में, 'अमर्यादित' है।
साक्षी महाराज के बयान और सपा का प्रदर्शन
साक्षी महाराज के एक बयान का समर्थन करते हुए बाजपेयी ने कहा कि समाजवादी पार्टी (सपा) ने पहली बार लोकसभा में 37 सीटें जीती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अगर ईवीएम में गड़बड़ी होती, तो सपा को उत्तर प्रदेश में इतनी सीटें नहीं मिलतीं और कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाती। यह बयान सीधे तौर पर विपक्ष के ईवीएम-विरोधी रुख को चुनौती देता है।
मणिशंकर अय्यर की टिप्पणी और भारत-पाकिस्तान संबंध
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की भारत-पाकिस्तान संबंधों पर टिप्पणियों को लेकर बाजपेयी ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि पाकिस्तान द्वारा भारतीय नागरिकों की हत्या और आतंकवाद को बढ़ावा देने के बावजूद कांग्रेस नेता उससे संवाद की वकालत करते रहे। उन्होंने इसे कांग्रेस का 'दोहरा चरित्र' करार दिया और कहा कि देश के विभाजन के लिए भी कांग्रेस ज़िम्मेदार रही है।
कांग्रेस-सपा गठबंधन और उत्तर प्रदेश की राजनीति
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा के बीच सीट-शेयरिंग को लेकर बाजपेयी ने कहा कि दोनों दलों में वैचारिक और संगठनात्मक सामंजस्य का अभाव है। उनके अनुसार, यह गठबंधन केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार पुनः बनेगी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कानून-व्यवस्था सुदृढ़ हुई है। गौरतलब है कि कांग्रेस-सपा का पिछला गठबंधन अनुमानित परिणाम नहीं दे सका था।
असदुद्दीन ओवैसी की अखिलेश यादव पर टिप्पणी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि कांग्रेस और सपा ने मुस्लिम समाज को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया और भाजपा का भय दिखाकर उन्हें लामबंद किया। आने वाले विधानसभा चुनाव में ये बयानबाज़ी और तेज़ होने की संभावना है।