क्या ईवीएम के खिलाफ आरोप चुनावी हार के बाद ही उठाए जाते हैं?: भाजपा सांसद महताब

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क्या ईवीएम के खिलाफ आरोप चुनावी हार के बाद ही उठाए जाते हैं?: भाजपा सांसद महताब

सारांश

भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब ने हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के परिणामों का स्वागत किया है, जिसमें दर्शाया गया है कि अधिकांश लोग ईवीएम को पारदर्शी और विश्वसनीय मानते हैं। क्या यह सच है कि आरोप केवल चुनावी हार के बाद ही उठाए जाते हैं?

Key Takeaways

  • ईवीएम की पारदर्शिता पर जनता का विश्वास मजबूत है।
  • चुनाव हारने पर ईवीएम पर संदेह उठाने की प्रवृत्ति है।
  • भारत की चुनावी प्रक्रिया उन्नत और पारदर्शी है।
  • राजनीतिक दलों को जनता के फैसले का सम्मान करना चाहिए।
  • संवैधानिक संस्थाओं की अखंडता को बनाए रखना जरूरी है।

भुवनेश्वर, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब ने शुक्रवार को हाल ही में संपन्न एक जनमत सर्वेक्षण के परिणामों का स्वागत किया, जिसमें यह सामने आया है कि अधिकतर लोग इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) आधारित मतदान को पारदर्शी और विश्वसनीय मानते हैं।

सर्वेक्षण की प्रतिक्रिया में महताब ने कहा कि यह निष्कर्ष स्पष्ट रूप से भारत की चुनावी प्रणाली में जनता के विश्वास को दर्शाता है, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बार-बार ईवीएम और भारतीय चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने संवैधानिक संस्थानों के आधार पर दुनिया की सबसे सशक्त और समृद्ध लोकतांत्रिक प्रणालियों में से एक बना है।

महत्वपूर्ण रूप से, महताब ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक निकाय है जिसने हमेशा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की पवित्रता को बनाए रखा है। बिना सबूत के ऐसे संस्थानों पर संदेह करना केवल लोकतांत्रिक विश्वास को कमजोर करता है।

भाजपा के वरिष्ठ सांसद ने यह भी टिप्पणी की कि ईवीएम पर आरोप अक्सर चुनावी हार के बाद ही उठाए जाते हैं, और इसे भारतीय राजनीति में एक दुखद प्रवृत्ति के रूप में वर्णित किया।

उन्होंने कहा कि जब राजनीतिक दल चुनाव जीतते हैं, तब उसी प्रणाली का जश्न मनाया जाता है, लेकिन जब परिणाम उनके अनुकूल नहीं होते, तो प्रक्रिया को बदनाम करने का प्रयास किया जाता है।

महाताब ने आगे कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रियाएं कई अन्य लोकतंत्रों की तुलना में कहीं अधिक उन्नत और पारदर्शी हैं, और निरंतर निगरानी, कानूनी जांच और संवैधानिक सुरक्षा उपाय मतदान प्रक्रिया में विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हैं।

लोकतांत्रिक परिपक्वता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को जनता के फैसले का सम्मान करना चाहिए और भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ समझे जाने वाले संस्थानों पर सवाल उठाने के बजाय संवैधानिक ढांचे के भीतर मतभेदों का समाधान करना चाहिए।

यह उल्लेखनीय है कि कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग द्वारा 'लोकसभा इलेक्शन 2024: इवैल्यूएशन ऑफ एंडलाइन सर्वे ऑफ नॉलेज, एप्टीट्यूड एंड प्रैक्टिस (केएपी) ऑफ सिटीजन्स' शीर्षक से एक सर्वेक्षण कराया गया था। इस सर्वेक्षण में पाया गया कि अधिकांश मतदाता मानते हैं कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं, और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) पर लोगों का विश्वास बढ़ा है।

सर्वेक्षण में बेंगलुरु, बेलगावी, कलबुर्गी और मैसूरु के प्रशासनिक क्षेत्रों के 102 विधानसभा क्षेत्रों के 5,100 लोगों को शामिल किया गया था।

Point of View

यह आवश्यक है कि राजनीतिक दल चुनावी परिणामों का सम्मान करें और लोकतांत्रिक संस्थाओं की अखंडता को बनाए रखें।
NationPress
02/01/2026

Frequently Asked Questions

ईवीएम क्या है?
ईवीएम इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन है, जिसका उपयोग चुनावों में मतदान के लिए किया जाता है।
क्यों ईवीएम पर सवाल उठाए जाते हैं?
कुछ राजनीतिक दल चुनावी परिणामों के अनुकूल न होने पर ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं।
सर्वेक्षण में क्या कहा गया है?
सर्वेक्षण में बताया गया है कि अधिकांश लोग ईवीएम को पारदर्शी और विश्वसनीय मानते हैं।
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