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क्या अखिलेश के बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर ओपी राजभर का तंज है?

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क्या अखिलेश के बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर ओपी राजभर का तंज है?

सारांश

अखिलेश यादव ने बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है, जिसके जवाब में ओपी राजभर ने तीखा तंज कसा। जानें इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं पर।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने बैलट पेपर से चुनाव कराने का सुझाव दिया।
ओपी राजभर ने इस पर तीखा तंज कसा।
चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया की समयसीमा बढ़ाई।
राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामान्य हैं।
शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।

लखनऊ, १३ दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बैलट पेपर से चुनाव कराने की वकालत की थी। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने शनिवार को इस पर निशाना साधा

ओपी राजभर ने राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा, "उनके जितने भी विधायक और सांसद हैं, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। जब उनकी पार्टी के लोग जीत जाते हैं, तो मशीन और ईवीएम सही होती है, लेकिन जब हार जाते हैं, तो उसमें गड़बड़ी दिखने लगती है। अगर वे बैलट पेपर से चुनाव चाहते हैं, तो पहले उनकी पार्टी के जितने विधायक और सांसद जीते हैं, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। उसके बाद उन्हें जनता को बताना चाहिए कि हम लोग गलती से जीत गए हैं। ईवीएम ने गलती की और जीत गए। जब तक बैलट पेपर से चुनाव नहीं होगा, तब तक हम नहीं लड़ेंगे।

उन्होंने मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया की समयसीमा बढ़ाने पर कहा, "सभी पार्टियां मांग कर रही थीं कि एसआईआर प्रक्रिया की समयसीमा बढ़ाई जाए। उनका कहना भी ठीक था, क्योंकि १० नवंबर से ४ दिसंबर की तारीख आई, तो उस समय फसल की कटाई और बुवाई में किसान व्यस्त थे। बहुत से लोग उसमें रुचि नहीं ले पाए थे। ऐसे में यह चुनाव आयोग का एक अच्छा कदम है।"

राजभर ने उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष के चुनाव को लेकर कहा, "जो राजनीतिक पार्टियां चुनाव के लिए रजिस्टर्ड होती हैं, वे कुछ नियमों और कानूनों का पालन करती हैं। इसी सिलसिले में भाजपा अपने अंदरूनी चुनाव करवा रही है। वे किसे चुनते हैं, यह उनका फैसला है; हमारी शुभकामनाओं या सुझावों का इस पर कोई असर नहीं पड़ता। वे अपनी प्रक्रियाएं का पालन कर रहे हैं।"

संसद पर आतंकी हमले की २४वीं बरसी पर मंत्री ओपी राजभर ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी और संगठन की ओर से हम उन शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने आतंकी हमले में अपनी जान गंवाई। यह एक दुखद घटना थी जो कभी नहीं होनी चाहिए थी।"

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि राजनीतिक दलों के बीच चुनावी प्रक्रिया को लेकर मतभेद होना सामान्य है। लेकिन क्या यह मतभेद लोकतंत्र को नुकसान पहुँचा सकता है? सभी पार्टियों को एक साथ मिलकर चुनावी प्रक्रिया को सुधारने की दिशा में काम करना चाहिए।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या ओपी राजभर का तंज सही है?
इसका मूल्यांकन करना आवश्यक है कि क्या राजभर का तंज राजनीतिक स्थिति को सही ढंग से दर्शाता है या नहीं।
क्या बैलट पेपर से चुनाव कराना संभव है?
यह संभव है, लेकिन इसके लिए व्यापक बदलावों की आवश्यकता होगी।
क्या एसआईआर प्रक्रिया की समयसीमा बढ़ाई गई?
हाँ, चुनाव आयोग ने समयसीमा बढ़ाई है ताकि किसान और मतदाता इसे बेहतर तरीके से देख सकें।
राष्ट्र प्रेस
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