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28 MLC सीटों पर कांग्रेस का खाता नहीं खुला; प्रह्लाद जोशी बोले — बैलेट पेपर हो या EVM, नतीजा वही

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28 MLC सीटों पर कांग्रेस का खाता नहीं खुला; प्रह्लाद जोशी बोले — बैलेट पेपर हो या EVM, नतीजा वही

सारांश

बैलेट पेपर से चुनाव हो तो EVM का बहाना कहाँ जाएगा? केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने यही सवाल उठाया — चार राज्यों की 28 MLC सीटों पर कांग्रेस शून्य पर रही, और कर्नाटक में सत्ता में रहते हुए भी पार्टी अपने मौजूदा विधान परिषद सदस्य की सीट नहीं बचा सकी।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 28 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस पर हमला बोला, कहा — बैलेट पेपर हो या EVM, नतीजा वही।
चार राज्यों की विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी।
कर्नाटक में कांग्रेस की सत्ता के बावजूद BJP-JD(S) गठबंधन ने सभी 4 सीटें जीतीं।
बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में JD(S) के ए.पी.
रंगनाथ ने कांग्रेस के पुट्टन्ना को 908 मतों से हराया।
ये चुनाव स्नातक व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों तक सीमित हैं — समग्र मतदाता राय के प्रतिनिधि नहीं, फिर भी कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 28 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और कहा कि चार राज्यों की विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी — चाहे मतदान बैलेट पेपर से हुआ हो या इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस लंबे समय से EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती रही है।

मुख्य घटनाक्रम

जोशी ने कहा कि कांग्रेस चुनावी हार के बाद 'वोट चोरी' और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर आरोप लगाने की आदत डाल चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार संबंधित राज्यों में मतदान बैलेट पेपर के ज़रिये हुआ, फिर भी कांग्रेस को शून्य सीटें मिलीं। उनके शब्दों में, 'बैलेट पेपर हो या EVM, परिणाम वही रहा।'

कर्नाटक में BJP-JD(S) का दबदबा

कर्नाटक का उदाहरण इस मामले में सबसे प्रासंगिक है, क्योंकि वहाँ कांग्रेस सत्ता में है। बावजूद इसके, विधान परिषद की चार सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) के गठबंधन ने सभी सीटें जीत लीं। यहाँ तक कि कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य पुट्टन्ना भी अपनी सीट नहीं बचा सके।

बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जनता दल (सेक्युलर) के उम्मीदवार ए.पी. रंगनाथ ने पुट्टन्ना को 908 मतों के अंतर से पराजित किया। यह हार कांग्रेस के लिए विशेष रूप से कड़ी मानी जा रही है, क्योंकि यह सीट पहले उसी के पास थी।

जोशी की राजनीतिक चुनौती

जोशी ने कहा कि चुनाव में हार मिलने पर कांग्रेस व्यवस्था को दोष देती है, लेकिन बहाने बनाने से जनता के फैसले को छिपाया नहीं जा सकता। उन्होंने तर्क दिया कि इन परिणामों ने कांग्रेस के EVM-विरोधी आरोपों को कमज़ोर किया है, क्योंकि बैलेट पेपर से हुए मतदान में भी नतीजा उसके विरुद्ध रहा।

आम जनता पर असर और चुनावों की सीमाएँ

गौरतलब है कि विधान परिषद के ये चुनाव स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के सीमित मतदाता आधार पर होते हैं — यह चारों राज्यों के समग्र मतदाताओं की राय का प्रतिनिधित्व नहीं करते। फिर भी, 28 सीटों पर कांग्रेस का खाता न खुलना पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

क्या होगा आगे

इन नतीजों के बाद कांग्रेस पर दबाव बढ़ेगा कि वह EVM पर आरोपों की रणनीति पर पुनर्विचार करे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जब बैलेट पेपर से हुए चुनाव में भी नतीजा प्रतिकूल रहे, तो उसका EVM-आधारित तर्क कमज़ोर पड़ता है। आने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की रणनीति और उसका जमीनी संगठन इन परिणामों की रोशनी में नये सिरे से परखा जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से एक विशेष वर्ग हैं — इन्हें व्यापक जनादेश मानना भ्रामक होगा। असली सवाल यह है कि कांग्रेस अपनी जमीनी पकड़ और संगठन की कमज़ोरी को कब स्वीकार करेगी, बजाय चुनावी तंत्र पर दोष मढ़ने के। BJP के लिए भी यह जीत उत्साहजनक है, पर विधानसभा चुनावों की कसौटी इससे बिल्कुल अलग होती है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रह्लाद जोशी ने 28 MLC सीटों को लेकर क्या कहा?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि चार राज्यों की विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी — चाहे मतदान बैलेट पेपर से हुआ हो या EVM से। उन्होंने इसे कांग्रेस के EVM-विरोधी आरोपों पर करारा जवाब बताया।
कर्नाटक MLC चुनाव में क्या हुआ?
कर्नाटक में विधान परिषद की चार सीटों पर BJP और JD(S) गठबंधन ने सभी सीटें जीत लीं, जबकि कांग्रेस वहाँ सत्ता में है। बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में JD(S) के ए.पी. रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा MLC पुट्टन्ना को 908 मतों से हराया।
क्या इन MLC चुनावों को राज्य की जनता की राय माना जा सकता है?
नहीं। विधान परिषद के ये चुनाव केवल स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के सीमित मतदाता आधार पर होते हैं। ये चारों राज्यों के समग्र मतदाताओं की राय का प्रतिनिधित्व नहीं करते, हालाँकि इन्हें राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
कांग्रेस EVM पर सवाल क्यों उठाती है?
कांग्रेस लंबे समय से चुनावी हार के बाद EVM की विश्वसनीयता पर संदेह जताती रही है और 'वोट चोरी' के आरोप लगाती है। जोशी ने इस बार इसी तर्क को चुनौती दी, यह कहते हुए कि बैलेट पेपर से हुए मतदान में भी पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा।
इन नतीजों का कांग्रेस पर क्या राजनीतिक असर होगा?
28 सीटों पर शून्य प्रदर्शन कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। इससे पार्टी पर EVM-आधारित तर्क पर पुनर्विचार करने और जमीनी संगठन को मज़बूत करने का दबाव बढ़ेगा, विशेषकर आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए।
राष्ट्र प्रेस
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