कर्नाटक विधान परिषद क्रॉस-वोटिंग: कुमारस्वामी बोले — 'चारों विधायकों को जानता हूं, युवा नेतृत्व तैयार करूंगा'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री तथा जनता दल (सेक्युलर) के प्रदेश अध्यक्ष एच.डी. कुमारस्वामी ने शुक्रवार, 19 जून को मैसूरु में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में जेडी(एस) प्रत्याशी की हार उनके लिए कोई अचंभे की बात नहीं है, क्योंकि उन्हें पहले से ही क्रॉस-वोटिंग की आशंका थी। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के जिन चार विधायकों ने पार्टी-लाइन के विरुद्ध मतदान किया, उनकी पहचान उनके पास है।
क्या हुआ चुनाव में
कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस के सभी पाँच उम्मीदवार विजयी रहे, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को दो सीटें मिलीं। उनकी सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) [जेडी(एस)] अपना उम्मीदवार जिताने में असफल रही। चुनाव परिणाम के बाद भाजपा और जेडी(एस) दोनों ने क्रॉस-वोटिंग को गंभीर मुद्दा बताते हुए दोषी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
कुमारस्वामी का दावा — 'पर्दे के पीछे की पूरी जानकारी'
कुमारस्वामी ने कहा, 'मुझे पहले से अंदेशा था कि कुछ विधायक क्रॉस-वोटिंग करेंगे। इसलिए न तो परिणाम ने मुझे चौंकाया और न ही कोई आश्चर्य हुआ। दो दिन पहले जब मैं मंदिर गया था, तभी मुझे मालूम था कि चुनाव का नतीजा क्या होने वाला है।' उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें यह पता है कि 'किसने किससे बात की, कब बात की और किस तरह की चर्चाएं या लेन-देन हुए।'
उन्होंने स्पष्ट किया कि जेडी(एस) का उम्मीदवार उतारना दरअसल पार्टी के प्रति वफादारी की परीक्षा थी। उनके शब्दों में, 'मैंने प्रतीकात्मक रूप से अपनी पार्टी का उम्मीदवार इसलिए उतारा ताकि यह पता चल सके कि कौन हमारे साथ खड़ा रहता है।'
क्रॉस-वोटिंग के कारण और असंतुष्ट विधायक
कुमारस्वामी ने क्रॉस-वोटिंग के कारणों को सार्वजनिक रूप से साझा करने से परहेज किया, लेकिन संकेत दिया कि कुछ विधायकों ने अपने विधानसभा क्षेत्रों में पर्याप्त विकास न होने की शिकायत की है और अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर अलग निर्णय लिए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इनमें से कुछ विधायकों ने जेडी(एस) छोड़ने की संभावना पर भी चर्चा की है।
यह ऐसे समय में आया है जब जेडी(एस) कर्नाटक में भाजपा के साथ गठबंधन में है, और पार्टी के भीतर अंदरूनी असंतोष की खबरें पहले भी सामने आती रही हैं। गौरतलब है कि कुमारस्वामी के अनुसार वह पिछले तीन वर्षों से पार्टी के भीतर हो रहे घटनाक्रम पर नज़र रखे हुए हैं।
युवा नेतृत्व पर भरोसा
इस पूरे विवाद के बीच कुमारस्वामी ने पार्टी के भविष्य को लेकर आशावादी रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अब 'जेन-ज़ी' का दौर है और बड़ी संख्या में युवा सार्वजनिक जीवन में आने के लिए तैयार हैं। उनके शब्दों में, 'मैं मानसिक रूप से तैयार हूं कि पार्टी में युवाओं को अवसर दूं और नई पीढ़ी का नेतृत्व तैयार करूं।'
उन्होंने विधायकों को यह भी सलाह दी कि वे चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादों को पूरा करें। उनका कहना था, 'यदि कुछ नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं तो नए चेहरे सामने आएंगे।' आने वाले दिनों में जेडी(एस) की आंतरिक कार्रवाई और पार्टी पुनर्गठन की दिशा पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।