कांग्रेस की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली 1 नवंबर को रामलीला मैदान में, हरियाणा से लाखों की भागीदारी का दावा
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आह्वान पर हरियाणा के वरिष्ठ कांग्रेस नेता 28 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सांसद दीपेंद्र हुड्डा के आधिकारिक आवास पर एकत्रित हुए और पार्टी की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' मेगा रैली की तैयारियों की समीक्षा की। यह रैली 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में आयोजित होनी है। नेताओं ने दावा किया कि हरियाणा से इस रैली में लाखों समर्थक पहुँचेंगे।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
दिल्ली में आयोजित इस तैयारी बैठक में हरियाणा कांग्रेस विधायक दल के नेता भूपेंद्र हुड्डा, एआईसीसी प्रभारी संजय दत्त, हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्य और सांसद दीपेंद्र हुड्डा, तथा कई अन्य वरिष्ठ पार्टी नेता उपस्थित रहे।
बैठक में सांसदों, विधायकों और विभिन्न फ्रंटल संगठनों, विभागों एवं प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों को अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशिष्ट जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं।
नेताओं ने क्या कहा
भूपेंद्र हुड्डा ने दावा किया कि हरियाणा से लाखों लोग 1 नवंबर को रामलीला मैदान पहुँचेंगे। उन्होंने कहा, 'यह रैली हरियाणा की आवाज को पूरे देश में पहुँचाएगी और इसका संदेश राष्ट्रव्यापी स्तर पर गूंजेगा।'
हुड्डा ने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार भ्रष्ट है और बेईमानी से बनी है। उन्होंने कहा, 'हम संविधान को कमजोर या विकृत नहीं होने देंगे।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा आँकड़े घोषित किए जाने के बाद मतदान प्रतिशत में हुए बदलावों का कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है, और दावा किया कि लोग मतपत्रों के माध्यम से चुनाव की माँग कर रहे हैं।
हरियाणा कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त ने कहा कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने पिछले विरोध प्रदर्शनों में राज्य की भागीदारी की सराहना की थी, और उन्हें भरोसा है कि 1 नवंबर की रैली में हरियाणा एक बार फिर अग्रणी रहेगा। दत्त ने आरोप लगाया कि इस कथित 'वोट चोरी' का सबसे बड़ा शिकार हरियाणा रहा है और भाजपा ने चुनाव आयोग के साथ मिलीभगत करके जनता के जनादेश को चुरा लिया है — हालाँकि इन आरोपों का भाजपा या चुनाव आयोग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक खंडन या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
रैली की पृष्ठभूमि और राजनीतिक संदर्भ
यह रैली हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के बाद कांग्रेस द्वारा लगाए गए चुनावी अनियमितताओं के आरोपों की पृष्ठभूमि में आयोजित की जा रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ वोटों की गिनती तक सीमित नहीं, बल्कि राज्य सरकार के गठन की वैधता से जुड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल ईवीएम और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राष्ट्रव्यापी बहस तेज कर रहे हैं।
गौरतलब है कि रामलीला मैदान ऐतिहासिक रूप से बड़े राजनीतिक जनसमावेशों का गवाह रहा है — 2011 के अन्ना हज़ारे आंदोलन से लेकर कई प्रमुख विपक्षी रैलियों तक। कांग्रेस द्वारा इसी स्थान का चुनाव इस रैली को प्रतीकात्मक महत्व देता है।
आगे क्या होगा
पार्टी का दावा है कि 1 नवंबर 2026 की यह रैली हरियाणा में भागीदारी का नया कीर्तिमान स्थापित करेगी। हालाँकि, 'लाखों लोगों के जुटने' का दावा अभी तक केवल पार्टी नेताओं का कथन है और रैली होने के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी। रैली की सफलता या असफलता कांग्रेस की हरियाणा में राजनीतिक ताकत का एक महत्वपूर्ण पैमाना बनेगी।