28 अक्टूबर 2026
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एमएलसी चुनाव: अमित शाह का कांग्रेस पर तंज — 28 में से शून्य सीट, बैलेट पेपर से भी हार

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एमएलसी चुनाव: अमित शाह का कांग्रेस पर तंज — 28 में से शून्य सीट, बैलेट पेपर से भी हार

सारांश

बैलेट पेपर से हुए चुनाव, फिर भी कांग्रेस को शून्य — 4 राज्यों की 28 एमएलसी सीटों पर एनडीए की जीत के बाद गृह मंत्री अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी ने ईवीएम-विरोधी नारे को 'इतिहास के कूड़ेदान' में भेजने की बात कही। यह विपक्ष की एक पुरानी माँग के लिए राजनीतिक रूप से असहज क्षण है।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 28 अक्टूबर 2026 को एक्स पर कांग्रेस को 28 में से शून्य एमएलसी सीट जीतने पर निशाना साधा।
चुनाव उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की 28 सीटों पर बैलेट पेपर के जरिए हुए, ईवीएम से नहीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही इन नतीजों का हवाला देते हुए विपक्ष के ईवीएम-विरोधी रुख पर सवाल उठाया।
सुवेंदु अधिकारी ने प्रधानमंत्री की पोस्ट रीपोस्ट कर कहा कि ईवीएम-विरोधी नारा 'इतिहास के कूड़ेदान में चला गया।' एमएलसी चुनाव विशेष निर्वाचक मंडलों (विधायक, स्थानीय निकाय, शिक्षक-स्नातक) द्वारा होते हैं — प्रत्यक्ष मतदाताओं द्वारा नहीं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 28 अक्टूबर 2026 को हाल ही में संपन्न विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की जीत और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के निराशाजनक प्रदर्शन पर कड़ा प्रहार किया। शाह ने एक्स पर पोस्ट कर पूछा कि कांग्रेस ने 28 में से कितनी सीटें जीतीं — और खुद ही जवाब दिया: 'शून्य।'

मुख्य घटनाक्रम

चार बड़े राज्यों — उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक — की 28 एमएलसी सीटों पर हाल ही में विधान परिषद चुनाव संपन्न हुए। उल्लेखनीय यह है कि ये चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की बजाय कागज के मतपत्रों (बैलेट पेपर) के जरिए कराए गए। परिणाम में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई।

गृह मंत्री शाह ने एक्स पर लिखा कि कांग्रेस ने 28 में से शून्य सीट जीतीं और कहा — 'बैलेट बॉक्स इस्तीफा दो।' उनका यह बयान सीधे तौर पर विपक्ष की उस माँग पर कटाक्ष है, जिसमें कांग्रेस और सहयोगी दल लंबे समय से ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाते आए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए मतदाताओं से अनुमान लगाने को कहा कि बैलेट पेपर से हुए इन चुनावों में कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं। उनकी यह टिप्पणी उस पृष्ठभूमि में थी, जब विपक्ष वर्षों से ईवीएम में हेरफेर का आरोप लगाकर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग करता रहा है।

गौरतलब है कि विपक्ष की यह माँग हर बड़े चुनाव परिणाम के बाद जोर पकड़ती रही है, और इस बार बैलेट पेपर से हुए एमएलसी चुनावों में कांग्रेस के शून्य प्रदर्शन ने सत्तारूढ़ गठबंधन को इस मुद्दे पर पलटवार का मौका दिया।

सुवेंदु अधिकारी का समर्थन

पश्चिम बंगाल के विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने एक्स पर प्रधानमंत्री की पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बिल्कुल सटीक बात कही है। उन्होंने लिखा कि चार प्रमुख राज्यों की 28 एमएलसी सीटों पर कांग्रेस पार्टी को 'एक भी सीट नहीं मिली — और सबसे बड़ा मजाक तो यही है: ये चुनाव ईवीएम के बजाय कागज के मतपत्रों से कराए गए।'

अधिकारी ने आगे कहा कि जब भी मतदाताओं ने कांग्रेस को नकारा है, तो उनकी 'बहाने बनाने की आदत सक्रिय हो जाती है और वे ईवीएम को दोष देते हैं, बेबुनियाद साजिशों को हवा देते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि 'अब जब मतदान कागज के मतपत्रों से हुआ और फिर भी शून्य सीट मिली, तो ईवीएम-विरोधी नारा इतिहास के कूड़ेदान में चला गया।'

ईवीएम बनाम बैलेट पेपर की बहस

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में ईवीएम की विश्वसनीयता पर बहस वर्षों से जारी है। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के कई दलों ने बार-बार माँग की है कि चुनाव पुनः बैलेट पेपर से कराए जाएँ। इन एमएलसी चुनावों के नतीजे — जो बैलेट पेपर से हुए — ने सत्तारूढ़ दल को यह तर्क देने का अवसर दिया है कि परिणाम मतदाताओं की वास्तविक पसंद को दर्शाते हैं, न कि किसी तकनीकी हेरफेर को।

आलोचकों का कहना है कि एमएलसी चुनाव प्रत्यक्ष मतदाताओं के बजाय विधायकों, स्थानीय निकायों या शिक्षकों-स्नातकों जैसे विशेष निर्वाचक मंडलों द्वारा होते हैं, इसलिए इनकी तुलना सीधे लोकसभा या विधानसभा चुनावों से नहीं की जा सकती।

आगे क्या

इन नतीजों के राजनीतिक निहितार्थ निकट भविष्य में कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। एनडीए इस जीत को जमीनी समर्थन के प्रमाण के रूप में पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में विपक्ष की रणनीति और ईवीएम बहस पर उनका रुख स्पष्ट होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन तस्वीर पूरी नहीं। विधान परिषद चुनाव विशेष निर्वाचक मंडलों — विधायकों, स्थानीय निकायों और शिक्षक-स्नातक मतदाताओं — द्वारा होते हैं, जहाँ पार्टी व्हिप और सत्ता का प्रभाव अधिक होता है; इसे सीधे जनादेश कहना भ्रामक होगा। असली सवाल यह है कि क्या कांग्रेस अपनी जमीनी कमजोरियों को ईवीएम बहस की आड़ में छुपाती रही है — और इन नतीजों ने उस आड़ को हटा दिया है। मुख्यधारा की कवरेज ने इस संस्थागत अंतर को प्रायः नजरअंदाज किया, जो इस राजनीतिक प्रहार की वास्तविक सीमाओं को समझने के लिए जरूरी है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमएलसी चुनाव में कांग्रेस को कितनी सीटें मिलीं?
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की 28 एमएलसी सीटों पर हुए विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली। ये चुनाव बैलेट पेपर के जरिए हुए थे।
अमित शाह ने एमएलसी नतीजों पर क्या कहा?
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेस पर तंज कसा और लिखा — 'कांग्रेस ने 28 में से कितनी सीटें जीतीं... शून्य, बैलेट बॉक्स इस्तीफा दो।' उनका यह बयान विपक्ष की ईवीएम-विरोधी माँग पर सीधा प्रहार था।
ये एमएलसी चुनाव ईवीएम बहस से कैसे जुड़े हैं?
कांग्रेस और विपक्षी दल लंबे समय से ईवीएम में हेरफेर का आरोप लगाकर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग करते आए हैं। इन एमएलसी चुनावों में बैलेट पेपर का उपयोग हुआ, और फिर भी कांग्रेस शून्य सीट पर सिमट गई — इसे भाजपा ने विपक्ष के तर्क को खारिज करने के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया।
सुवेंदु अधिकारी ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
सुवेंदु अधिकारी ने प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए कहा कि बैलेट पेपर से चुनाव होने के बावजूद कांग्रेस को शून्य सीट मिलना यह साबित करता है कि 'ईवीएम-विरोधी नारा इतिहास के कूड़ेदान में चला गया।' उन्होंने यह भी पूछा कि अब राहुल गांधी किसे दोष देंगे — 'मतपत्र की स्याही को?'
एमएलसी चुनाव क्या होते हैं और ये सामान्य चुनावों से कैसे अलग हैं?
विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव प्रत्यक्ष मतदाताओं द्वारा नहीं, बल्कि विशेष निर्वाचक मंडलों — जैसे विधायक, स्थानीय निकाय प्रतिनिधि, शिक्षक और स्नातक — द्वारा होते हैं। यही कारण है कि इनके नतीजों की तुलना लोकसभा या विधानसभा चुनावों से करना राजनीतिक विश्लेषकों के बीच विवादित माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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