हार्दिक पटेल का कांग्रेस पर तंज: 'बैलेट पेपर से भी नहीं जीत पाई, 28 एमएलसी सीटों पर खाता शून्य'
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक हार्दिक पटेल ने 28 अक्टूबर 2026 को चार राज्यों में संपन्न हुए विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों के परिणामों पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में हुए ये चुनाव बैलेट पेपर के ज़रिए कराए गए थे, फिर भी कांग्रेस 28 में से एक भी सीट नहीं जीत पाई।
हार्दिक पटेल का एक्स पर सीधा वार
हार्दिक पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, '4 बड़े राज्य, 28 एमएलसी सीटें और चुनाव बैलेट पेपर से हुए। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक। अब अंदाजा लगाइए कि इन 28 सीटों में कांग्रेस कितनी सीटें जीत पाई? कोई नारा नहीं, कोई बहाना नहीं, सिर्फ नतीजों को देखिए।' यह टिप्पणी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इसलिए मानी जा रही है, क्योंकि कांग्रेस लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग करती रही है।
भाजपा ने इन नतीजों को विपक्ष की ईवीएम-विरोधी दलीलों पर सवाल उठाने का अवसर बताया है। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस लगातार विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अपनी हार के लिए ईवीएम को ज़िम्मेदार ठहराती रही है।
राज्यवार चुनाव परिणाम
कर्नाटक में कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका लगा। राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस सभी चार विधान परिषद सीटों पर पराजित हो गई। BJP और जनता दल (सेक्युलर) के गठबंधन ने चारों सीटें अपने नाम कीं, जिनमें बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की वह सीट भी शामिल है जो पहले कांग्रेस के पास थी।
उत्तर प्रदेश में BJP ने चार सीटें जीतीं, जबकि समाजवादी पार्टी दो सीटें जीतने में सफल रही। अन्य सीटों पर मतगणना की प्रक्रिया जारी रही।
बिहार में कई स्थापित दलों को आश्चर्यजनक झटका लगा। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने विधान परिषद चुनाव में अपनी पहली जीत दर्ज की — पार्टी उम्मीदवार सुरेश राय ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बिहार प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मदन मोहन झा को पराजित किया। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से BJP के पाँच बार के एमएलसी नवल किशोर यादव को हराकर सीट छीन ली।
महाराष्ट्र की कुछ सीटों के परिणाम भी धीरे-धीरे सामने आ रहे थे।
हार्दिक पटेल का राजनीतिक सफर
हार्दिक पटेल की यह टिप्पणी उनके अपने उतार-चढ़ाव भरे राजनीतिक जीवन के संदर्भ में और अधिक तीखी लगती है। 2015 में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान वे BJP के मुखर आलोचक के रूप में उभरे थे और गुजरात की राजनीति में उनका बड़ा नाम बना। मार्च 2019 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और जुलाई 2020 में गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति के कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त हुए।
पार्टी नेतृत्व से बढ़ते मतभेदों के चलते उन्होंने 18 मई 2022 को कांग्रेस से इस्तीफा दिया और 2 जून 2022 को BJP में शामिल हो गए। गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 में BJP ने उन्हें वीरमगाम सीट से उम्मीदवार बनाया, जहाँ उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के उम्मीदवार अमरसिंह ठाकोर को 51 हजार से अधिक मतों के अंतर से हराया।
राजनीतिक निहितार्थ
गौरतलब है कि विधान परिषद के ये चुनाव प्रत्यक्ष रूप से मतदाताओं द्वारा नहीं, बल्कि विधायकों, स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों और शिक्षकों जैसे विशेष मतदाता वर्गों द्वारा लड़े जाते हैं — इसीलिए ये बैलेट पेपर से होते हैं। इन परिणामों ने कांग्रेस के उस केंद्रीय तर्क को चुनौती दी है कि ईवीएम उनकी हार का कारण है। भाजपा इन नतीजों को अपनी संगठनात्मक बढ़त के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
आगामी दिनों में महाराष्ट्र की शेष सीटों के नतीजे भी सामने आने की उम्मीद है, जो इस समग्र तस्वीर को और स्पष्ट करेंगे।