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हार्दिक पटेल का कांग्रेस पर तंज: 'बैलेट पेपर से भी नहीं जीत पाई, 28 एमएलसी सीटों पर खाता शून्य'

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हार्दिक पटेल का कांग्रेस पर तंज: 'बैलेट पेपर से भी नहीं जीत पाई, 28 एमएलसी सीटों पर खाता शून्य'

सारांश

चार राज्यों में बैलेट पेपर से हुए 28 एमएलसी चुनावों में कांग्रेस का खाता नहीं खुला — और BJP विधायक हार्दिक पटेल ने एक्स पर सीधा वार किया। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस चारों सीटें हार गई। बिहार में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने पहली जीत दर्ज की। ईवीएम विरोध की धार कुंद होती दिख रही है।

मुख्य बातें

हार्दिक पटेल ने एक्स पर लिखा कि 4 राज्यों में 28 एमएलसी सीटों पर बैलेट पेपर से हुए चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई।
कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सभी 4 विधान परिषद सीटों पर पराजित; BJP-JDS गठबंधन ने चारों सीटें जीतीं।
उत्तर प्रदेश में BJP को 4 और समाजवादी पार्टी को 2 सीटें मिलीं।
बिहार में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पहली एमएलसी जीत दर्ज की।
RJD ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से BJP के पाँच बार के एमएलसी नवल किशोर यादव को हराया।
हार्दिक पटेल ने मई 2022 में कांग्रेस छोड़ी थी और जून 2022 में BJP में शामिल हुए थे।

गुजरात भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक हार्दिक पटेल ने 28 अक्टूबर 2026 को चार राज्यों में संपन्न हुए विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों के परिणामों पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में हुए ये चुनाव बैलेट पेपर के ज़रिए कराए गए थे, फिर भी कांग्रेस 28 में से एक भी सीट नहीं जीत पाई।

हार्दिक पटेल का एक्स पर सीधा वार

हार्दिक पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, '4 बड़े राज्य, 28 एमएलसी सीटें और चुनाव बैलेट पेपर से हुए। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक। अब अंदाजा लगाइए कि इन 28 सीटों में कांग्रेस कितनी सीटें जीत पाई? कोई नारा नहीं, कोई बहाना नहीं, सिर्फ नतीजों को देखिए।' यह टिप्पणी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इसलिए मानी जा रही है, क्योंकि कांग्रेस लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग करती रही है।

भाजपा ने इन नतीजों को विपक्ष की ईवीएम-विरोधी दलीलों पर सवाल उठाने का अवसर बताया है। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस लगातार विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अपनी हार के लिए ईवीएम को ज़िम्मेदार ठहराती रही है।

राज्यवार चुनाव परिणाम

कर्नाटक में कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका लगा। राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस सभी चार विधान परिषद सीटों पर पराजित हो गई। BJP और जनता दल (सेक्युलर) के गठबंधन ने चारों सीटें अपने नाम कीं, जिनमें बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की वह सीट भी शामिल है जो पहले कांग्रेस के पास थी।

उत्तर प्रदेश में BJP ने चार सीटें जीतीं, जबकि समाजवादी पार्टी दो सीटें जीतने में सफल रही। अन्य सीटों पर मतगणना की प्रक्रिया जारी रही।

बिहार में कई स्थापित दलों को आश्चर्यजनक झटका लगा। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने विधान परिषद चुनाव में अपनी पहली जीत दर्ज की — पार्टी उम्मीदवार सुरेश राय ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बिहार प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मदन मोहन झा को पराजित किया। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से BJP के पाँच बार के एमएलसी नवल किशोर यादव को हराकर सीट छीन ली।

महाराष्ट्र की कुछ सीटों के परिणाम भी धीरे-धीरे सामने आ रहे थे।

हार्दिक पटेल का राजनीतिक सफर

हार्दिक पटेल की यह टिप्पणी उनके अपने उतार-चढ़ाव भरे राजनीतिक जीवन के संदर्भ में और अधिक तीखी लगती है। 2015 में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान वे BJP के मुखर आलोचक के रूप में उभरे थे और गुजरात की राजनीति में उनका बड़ा नाम बना। मार्च 2019 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और जुलाई 2020 में गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति के कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त हुए।

पार्टी नेतृत्व से बढ़ते मतभेदों के चलते उन्होंने 18 मई 2022 को कांग्रेस से इस्तीफा दिया और 2 जून 2022 को BJP में शामिल हो गए। गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 में BJP ने उन्हें वीरमगाम सीट से उम्मीदवार बनाया, जहाँ उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के उम्मीदवार अमरसिंह ठाकोर को 51 हजार से अधिक मतों के अंतर से हराया।

राजनीतिक निहितार्थ

गौरतलब है कि विधान परिषद के ये चुनाव प्रत्यक्ष रूप से मतदाताओं द्वारा नहीं, बल्कि विधायकों, स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों और शिक्षकों जैसे विशेष मतदाता वर्गों द्वारा लड़े जाते हैं — इसीलिए ये बैलेट पेपर से होते हैं। इन परिणामों ने कांग्रेस के उस केंद्रीय तर्क को चुनौती दी है कि ईवीएम उनकी हार का कारण है। भाजपा इन नतीजों को अपनी संगठनात्मक बढ़त के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

आगामी दिनों में महाराष्ट्र की शेष सीटों के नतीजे भी सामने आने की उम्मीद है, जो इस समग्र तस्वीर को और स्पष्ट करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

संगठनात्मक है। कर्नाटक में तो स्थिति और विचलित करने वाली है — जहाँ कांग्रेस की सरकार है, वहाँ भी विधान परिषद की सभी चार सीटें गँवा दीं। असली सवाल यह है कि पार्टी विधायकों और स्थानीय निकायों में अपना आधार मज़बूत करने में क्यों विफल हो रही है — जब तक यह संरचनात्मक कमज़ोरी दूर नहीं होगी, ईवीएम या बैलेट पेपर का सवाल महज़ एक राजनीतिक आवरण ही बना रहेगा।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बैलेट पेपर से हुए एमएलसी चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा रहा?
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में बैलेट पेपर से हुए 28 विधान परिषद सीटों के चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई। कर्नाटक में सत्तारूढ़ होने के बावजूद पार्टी चारों सीटें हार गई।
हार्दिक पटेल ने एक्स पर कांग्रेस के बारे में क्या कहा?
हार्दिक पटेल ने एक्स पर लिखा — '4 बड़े राज्य, 28 एमएलसी सीटें और चुनाव बैलेट पेपर से हुए... अब अंदाजा लगाइए कि इन 28 सीटों में कांग्रेस कितनी सीटें जीत पाई? कोई नारा नहीं, कोई बहाना नहीं, सिर्फ नतीजों को देखिए।' यह टिप्पणी कांग्रेस की ईवीएम-विरोधी माँग पर सीधा व्यंग्य था।
कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में किसने जीत हासिल की?
कर्नाटक में BJP और जनता दल (सेक्युलर) के गठबंधन ने सभी चार विधान परिषद सीटें जीतीं। इनमें बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की वह सीट भी शामिल है जो पहले कांग्रेस के पास थी।
बिहार एमएलसी चुनाव में जन सुराज पार्टी की जीत का क्या महत्व है?
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बिहार प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मदन मोहन झा को हराकर विधान परिषद में अपनी पहली जीत दर्ज की। यह नई पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पदार्पण माना जा रहा है।
हार्दिक पटेल कांग्रेस से BJP में कब और क्यों आए?
हार्दिक पटेल ने 18 मई 2022 को पार्टी नेतृत्व से मतभेदों के कारण कांग्रेस से इस्तीफा दिया और 2 जून 2022 को BJP में शामिल हो गए। इससे पहले वे 2015 के पाटीदार आरक्षण आंदोलन से उभरे थे और मार्च 2019 में कांग्रेस में शामिल हुए थे।
राष्ट्र प्रेस
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