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ईडी की 5 शहरों में बड़ी छापेमारी: ऑनलाइन सट्टेबाजी-साइबर ठगी सिंडिकेट के 20 ठिकाने ध्वस्त

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ईडी की 5 शहरों में बड़ी छापेमारी: ऑनलाइन सट्टेबाजी-साइबर ठगी सिंडिकेट के 20 ठिकाने ध्वस्त

सारांश

ईडी ने एक साथ पाँच शहरों में 20 ठिकानों पर छापा मारकर ऑनलाइन सट्टेबाजी और साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया। 200 से अधिक शेल कंपनियाँ, दुबई से संचालन और क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए धन शोधन — यह मामला डिजिटल वित्तीय अपराध की नई और खतरनाक परतें उजागर करता है।

मुख्य बातें

ईडी मुंबई जोन-2 ने 13 अक्टूबर 2024 को मुंबई, पुणे, मेहसाणा, सूरत और हैदराबाद में 20 ठिकानों पर छापेमारी की।
जाँच 'ऑल पैनल एक्सचेंज' और 'एमजीएम91' नामक ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से जुड़े धोखाधड़ी के दो मामलों से संबंधित है।
एडसम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक राम यू.
रामधानी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वे न्यायिक हिरासत में हैं।
नेटवर्क में 200 से अधिक शेल कंपनियाँ , म्यूल बैंक खाते और सहकारी बैंकों का दुरुपयोग शामिल था।
अपराध की रकम ओवरइनवॉइसिंग, एपीएमसी म्यूल खातों और क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए विदेश भेजी गई।
जाँच में दुबई स्थित व्यक्तियों से संचालन-निर्देश मिलने का कनेक्शन भी सामने आया है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोन-2 ने 13 अक्टूबर 2024 को ऑनलाइन सट्टेबाजी, अवैध गेमिंग और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े एक बड़े सिंडिकेट के खिलाफ एक साथ पाँच शहरों — मुंबई, पुणे, मेहसाणा, सूरत और हैदराबाद — में 20 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई और इसमें आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण तथा अन्य साक्ष्य जब्त किए गए। कई बैंक खातों को भी फ्रीज़ करने के आदेश दिए गए हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी की जाँच दो अलग-अलग मामलों से जुड़ी है। जाँच एजेंसी के अनुसार, ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म 'ऑल पैनल एक्सचेंज' और 'एमजीएम91' के ज़रिए लोगों को कथित तौर पर पैसे जमा करने के लिए प्रेरित किया गया और बाद में उनके साथ धोखाधड़ी की गई। इन प्लेटफॉर्म के पीड़ितों से जुटाई गई रकम को विभिन्न माध्यमों से घुमाकर पुणे स्थित एक इकाई के बैंक खातों में पहुँचाया गया।

यह इकाई राम यू. रामधानी द्वारा स्थापित एडसम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड थी। रामधानी को ईडी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

कैसे काम करता था नेटवर्क

जाँच में सामने आया कि एडसम फिनटेक ने 'आईपैसा' नाम से एक भुगतान मध्यस्थता प्लेटफॉर्म विकसित किया था। इस प्लेटफॉर्म से 200 से अधिक शेल कंपनियों और मुखौटा इकाइयों को जोड़ा गया था, जिन्हें आंतरिक तौर पर 'मर्चेंट' कहा जाता था। ऑपरेटरों के एजेंटों को 'चैनल पार्टनर' या 'कैरी एंड फॉरवर्ड एजेंट' के रूप में संदर्भित किया जाता था।

गौरतलब है कि पीड़ितों की रकम कई म्यूल बैंक खातों के नेटवर्क के ज़रिए आगे भेजी जाती थी। इस पूरे नेटवर्क को कुछ सहकारी बैंकों के बैंकिंग ढाँचे का भी सहारा मिला, जिनका उपयोग अवैध रकम जुटाने और उसे कई स्तरों पर घुमाने के लिए किया गया।

धन शोधन के तीन रास्ते

ईडी के अनुसार, अपराध से अर्जित रकम को मुख्यतः तीन तरीकों से ठिकाने लगाया गया। पहला — व्यापारिक लेनदेन का दिखावा करते हुए ओवरइनवॉइसिंग के ज़रिए रकम विदेश भेजी गई। दूसरा — कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) की इकाइयों के नाम पर खोले गए म्यूल खातों से नकदी निकाली गई। तीसरा — रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर भारत से बाहर भेजा गया।

यह ऐसे समय में सामने आया है जब साइबर वित्तीय अपराधों में क्रिप्टोकरेंसी के दुरुपयोग को लेकर नियामक एजेंसियाँ पहले से ही सतर्क हैं।

दुबई कनेक्शन और आगे की जाँच

जाँच में यह भी उजागर हुआ कि ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग प्लेटफॉर्म के संचालन में शामिल कई लोगों को दुबई में मौजूद व्यक्तियों से निर्देश मिल रहे थे। यह अंतरराष्ट्रीय आयाम इस सिंडिकेट की जटिलता को और बढ़ाता है।

ईडी इससे पहले पुणे, मुंबई और बेंगलुरु में भी कई स्थानों पर तलाशी ले चुकी है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि अवैध वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने और उसे ध्वस्त करने के साथ-साथ पीएमएलए के सख्त अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए उसकी कार्रवाई जारी रहेगी और मामले में आगे की जाँच की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सहकारी बैंक, शेल कंपनियाँ और क्रिप्टोकरेंसी एक ही अपराध-श्रृंखला में गुँथे हुए हैं। चिंताजनक यह है कि दुबई से संचालन के संकेत बताते हैं कि इस तरह के नेटवर्क अब सीमा-पार संरक्षण में काम कर रहे हैं, जो घरेलू प्रवर्तन की सीमाओं को उजागर करता है। 200 से अधिक शेल कंपनियों का अस्तित्व यह भी सवाल उठाता है कि कॉर्पोरेट पंजीकरण और बैंकिंग अनुपालन तंत्र में कहाँ चूक हुई। जब तक इन संरचनात्मक खामियों को दूर नहीं किया जाता, गिरफ्तारियाँ और छापे इस हिमशैल की केवल ऊपरी परत ही खुरच पाएँगे।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने किन शहरों में और कितने ठिकानों पर छापेमारी की?
ईडी के मुंबई जोन-2 ने 13 अक्टूबर 2024 को मुंबई, पुणे, मेहसाणा, सूरत और हैदराबाद — पाँच शहरों में कुल 20 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई पीएमएलए, 2002 के तहत की गई।
'ऑल पैनल एक्सचेंज' और 'एमजीएम91' क्या हैं?
ये दोनों ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म हैं, जिनके ज़रिए लोगों को कथित तौर पर पैसे जमा करने के लिए प्रेरित किया गया और बाद में उनके साथ धोखाधड़ी की गई। ईडी की जाँच इन्हीं दो मामलों से जुड़ी है।
एडसम फिनटेक और 'आईपैसा' की इस मामले में क्या भूमिका थी?
एडसम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड ने 'आईपैसा' नामक भुगतान मध्यस्थता प्लेटफॉर्म विकसित किया था, जिससे 200 से अधिक शेल कंपनियाँ और मुखौटा इकाइयाँ जोड़ी गई थीं। इस प्लेटफॉर्म के ज़रिए सट्टेबाजी और साइबर धोखाधड़ी के ऑपरेटरों के लिए अवैध रकम का प्रवाह सुनिश्चित किया जाता था।
अपराध से अर्जित रकम को कैसे छुपाया जाता था?
जाँच के अनुसार रकम को तीन तरीकों से ठिकाने लगाया गया — ओवरइनवॉइसिंग के ज़रिए विदेश भेजना, एपीएमसी इकाइयों के नाम पर म्यूल खातों से नकदी निकालना, और क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर भारत से बाहर स्थानांतरित करना।
इस मामले में दुबई का क्या संबंध है और आगे क्या होगा?
जाँच में सामने आया है कि नेटवर्क के कई संचालकों को दुबई में मौजूद व्यक्तियों से निर्देश मिल रहे थे। ईडी ने कहा है कि अवैध वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने की कार्रवाई जारी रहेगी और मामले में आगे की जाँच की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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