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हैदराबाद साइबर धोखाधड़ी: ईडी ने ₹26 करोड़ के घोटाले में 3 ठिकानों पर मारा छापा, 11 खाते फ्रीज

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हैदराबाद साइबर धोखाधड़ी: ईडी ने ₹26 करोड़ के घोटाले में 3 ठिकानों पर मारा छापा, 11 खाते फ्रीज

सारांश

टेलीग्राम के ज़रिए ऊँचे रिटर्न का लालच देकर ₹26 करोड़ से अधिक की ठगी — ईडी ने हैदराबाद में तीन ठिकानों पर छापेमारी कर ₹6.40 लाख नकद जब्त किए और 11 खाते फ्रीज किए। आरोपी ने परिवार के नाम पर कंपनियाँ बनाकर धन की लेयरिंग की और ₹5 करोड़ की अचल संपत्तियाँ खरीदीं।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 28 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में 3 ठिकानों पर पीएमएलए के तहत छापेमारी की।
कार्रवाई में ₹6.40 लाख नकद जब्त और 11 बैंक खाते फ्रीज — खातों में कुल ₹14 लाख जमा थे।
मुख्य संदिग्ध अल्लमराजू सत्यनारायण मूर्ति पर 23 मई 2023 से 27 मई 2024 के बीच शिकायतकर्ता से ₹26.02 करोड़ की ठगी का आरोप।
आरोपी ने परिवार और कर्मचारियों के नाम पर 5 कंपनियाँ बनाकर म्यूल खातों के ज़रिए फंड की लेयरिंग की।
ईडी ने करीब ₹5 करोड़ की अचल संपत्तियों — प्लॉट व विला — की पहचान की; जांच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 28 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में तीन स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया, जो एर्नाकुलम में दर्ज एक बड़े साइबर धोखाधड़ी मामले से जुड़ा है। इस कार्रवाई में ईडी ने ₹6.40 लाख नकद जब्त किए, 11 बैंक खाते फ्रीज किए — जिनमें कुल ₹14 लाख जमा थे — और महत्वपूर्ण डिजिटल एवं दस्तावेज़ी साक्ष्य अपने कब्जे में लिए। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत ईडी के कोच्चि जोनल कार्यालय द्वारा संचालित की गई।

मामले की पृष्ठभूमि

जांच की जड़ें एर्नाकुलम साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर में हैं। शिकायतकर्ता निमेश ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने टेलीग्राम ऐप के ज़रिए फोन कॉल और चैट संदेशों द्वारा उन्हें उच्च रिटर्न का लालच देकर निवेश के लिए प्रेरित किया। उन्हें बताया गया कि एक विशेष वेबसाइट के माध्यम से ट्रेडिंग करने पर भारी मुनाफा मिलेगा।

आरोपों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने विश्वास में आकर ₹24.76 करोड़ की रकम कई किश्तों में उन बैंक खातों में हस्तांतरित कर दी जो आरोपियों के थे या उनके नियंत्रण में थे। इसके बाद न तो वादा किया गया मुनाफा दिया गया और न ही मूलधन लौटाया गया।

मुख्य आरोपी और धोखाधड़ी का दायरा

ईडी की जांच में सामने आया कि 23 मई 2023 से 27 मई 2024 के बीच शिकायतकर्ता के साथ कुल ₹26.02 करोड़ की धोखाधड़ी की गई। इस मामले में मुख्य संदिग्ध के रूप में अल्लमराजू सत्यनारायण मूर्ति का नाम सामने आया है, जिनके ठिकानों पर यह छापेमारी की गई।

जांच के अनुसार, मूर्ति ने अपने परिवार के सदस्यों और कर्मचारियों के नाम पर कई कंपनियाँ बनाई थीं। इन कंपनियों में बीटीआर इंडस्ट्रीज, वेलुगु ट्रेडिंग कंपनी, आश्रिता मेगा सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, आश्रिता इंफ्रा प्रोजेक्ट्स और आश्रिता इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

मनी लॉन्ड्रिंग का जटिल जाल

ईडी के अनुसार, धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को पहले कई 'म्यूल अकाउंट्स' में स्थानांतरित किया गया और फिर जानबूझकर 'लेयरिंग' की गई ताकि पैसे के वास्तविक स्रोत का पता न लगाया जा सके। गौरतलब है कि यह रणनीति संगठित साइबर ठगी गिरोहों में आम है, जहाँ अपराध की आय को वैध दिखाने के लिए जटिल खाता-श्रृंखलाओं का उपयोग होता है।

उपरोक्त कंपनियों का उपयोग फंड की लेयरिंग के लिए किया गया। इसके अलावा, हैदराबाद में 'आश्रिता इंफ्रा प्रोजेक्ट्स' के नाम से एक विला प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया था, जिसे अपराध की आय से वित्तपोषित बताया जा रहा है।

जब्त संपत्ति और साक्ष्य

तलाशी के दौरान डिजिटल उपकरणों और दस्तावेज़ों के रूप में अहम साक्ष्य एकत्र किए गए। ईडी ने लगभग ₹5 करोड़ की अचल संपत्तियों — जिनमें भूखंड (प्लॉट) और एक विला शामिल हैं — की पहचान की है। एजेंसी का कहना है कि ये संपत्तियाँ कथित तौर पर धोखाधड़ी से अर्जित धन से खरीदी गई हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल निवेश धोखाधड़ी के मामले पूरे देश में तेज़ी से बढ़ रहे हैं और ईडी व साइबर पुलिस की संयुक्त कार्रवाइयाँ इस खतरे से निपटने की कोशिश कर रही हैं। जांच जारी है और आगे गिरफ्तारियों से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित वित्तीय तंत्र है। असली सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर खातों में ट्रांसफर होने वाली रकम बैंकिंग निगरानी तंत्र की नज़र से इतने लंबे समय तक कैसे बचती रही। ईडी की यह कार्रवाई स्वागतयोग्य है, लेकिन साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए रकम की वसूली और त्वरित न्याय का सवाल अभी भी अनुत्तरित है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हैदराबाद में ईडी की यह साइबर धोखाधड़ी छापेमारी किस मामले से जुड़ी है?
यह छापेमारी एर्नाकुलम साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर के आधार पर की गई है, जिसमें शिकायतकर्ता निमेश ने आरोप लगाया कि टेलीग्राम के ज़रिए उन्हें उच्च रिटर्न का लालच देकर ₹24.76 करोड़ की रकम ठगी गई। ईडी ने पीएमएलए, 2002 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
ईडी ने हैदराबाद छापेमारी में क्या-क्या जब्त किया?
ईडी ने ₹6.40 लाख नकद जब्त किए और 11 बैंक खाते फ्रीज किए, जिनमें कुल ₹14 लाख जमा थे। इसके अलावा डिजिटल उपकरण व दस्तावेज़ साक्ष्य के रूप में भी जब्त किए गए और लगभग ₹5 करोड़ की अचल संपत्तियों की पहचान की गई।
मुख्य आरोपी अल्लमराजू सत्यनारायण मूर्ति ने धन कैसे छुपाया?
आरोपों के अनुसार, मूर्ति ने अपने परिवार के सदस्यों और कर्मचारियों के नाम पर पाँच कंपनियाँ बनाईं और ठगी की रकम को म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर कर 'लेयरिंग' की। इन कंपनियों में बीटीआर इंडस्ट्रीज, वेलुगु ट्रेडिंग कंपनी और आश्रिता समूह की तीन कंपनियाँ शामिल हैं।
इस साइबर धोखाधड़ी में कुल कितनी रकम की ठगी हुई?
जांच के अनुसार, 23 मई 2023 से 27 मई 2024 के बीच शिकायतकर्ता से कुल ₹26.02 करोड़ की धोखाधड़ी की गई। शिकायतकर्ता ने पहले ₹24.76 करोड़ हस्तांतरित किए थे, लेकिन जांच में कुल नुकसान ₹26.02 करोड़ आंका गया है।
टेलीग्राम के ज़रिए होने वाली निवेश धोखाधड़ी से कैसे बचें?
अधिकारियों के अनुसार, टेलीग्राम या अन्य मैसेजिंग ऐप के ज़रिए असाधारण रिटर्न का वादा करने वाले किसी भी अनजान व्यक्ति पर भरोसा न करें और किसी भी लिंक या वेबसाइट पर पैसे ट्रांसफर करने से पहले सेबी (SEBI) में पंजीकृत दलाल की पुष्टि करें। किसी भी संदिग्ध संपर्क की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें।
राष्ट्र प्रेस
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