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₹326 करोड़ बैंक फ्रॉड: ईडी ने हैदराबाद में KVPL से जुड़े 7 ठिकानों पर छापेमारी, ₹15 लाख नकद जब्त

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₹326 करोड़ बैंक फ्रॉड: ईडी ने हैदराबाद में KVPL से जुड़े 7 ठिकानों पर छापेमारी, ₹15 लाख नकद जब्त

सारांश

ईडी ने हैदराबाद में एक साथ 7 ठिकानों पर छापा मारकर KVPL से जुड़े ₹326.49 करोड़ के बैंक फ्रॉड मामले में अहम साक्ष्य जब्त किए। फर्जी इनवॉइस, डिजिटल डिवाइस और ₹15 लाख नकद बरामद — CBI की 2022 की FIR पर आधारित यह जांच अब निर्णायक मोड़ पर है।

मुख्य बातें

ईडी ने 24 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद, सिकंदराबाद और मेडचल-मलकाजगिरी में 7 ठिकानों पर PMLA के तहत छापेमारी की।
मामला ₹326.49 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें PNB, IDBI बैंक, UBI और बैंक ऑफ बड़ौदा प्रभावित हुए।
छापेमारी में ₹15 लाख बेहिसाब नकद, आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए।
KVPL ने कथित तौर पर फर्जी स्टील इनवॉइस और ट्रांसपोर्ट दस्तावेज के जरिए फंड डायवर्ट किए।
जांच CBI की 8 दिसंबर 2022 की FIR पर आधारित है; ईडी की आगे की कार्रवाई जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2026 को तेलंगाना के हैदराबाद, सिकंदराबाद और मेडचल-मलकाजगिरी जिलों में 7 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई मेसर्स कनकधरा वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड (KVPL) और इसके निदेशकों पर कथित ₹326.49 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA), 2002 के तहत की गई।

छापेमारी का दायरा

तलाशी ली गई जगहों में KVPL का रजिस्टर्ड कार्यालय, उसके निदेशकों के आवास और उन संस्थाओं व व्यक्तियों के ठिकाने शामिल रहे, जिन्होंने कथित तौर पर बैंक फंड के डायवर्जन में सहायता की थी। ईडी अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी के दौरान फंड डायवर्जन और मनी लेयरिंग से संबंधित आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस तथा अन्य रिकॉर्ड जब्त किए गए। इसके अलावा, ₹15 लाख की बिना हिसाब-किताब वाली नकदी भी बरामद की गई। कई अचल संपत्तियों और निवेशों की भी पहचान की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी की यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा 8 दिसंबर 2022 को दर्ज उस एफआईआर पर आधारित है, जो पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शिकायत पर दर्ज हुई थी। एफआईआर में KVPL के निदेशकों और अन्य व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। यह धोखाधड़ी PNB के नेतृत्व में गठित एक बैंक समूह — जिसमें IDBI बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) और बैंक ऑफ बड़ौदा शामिल हैं — के साथ हुई, जिससे कुल ₹326.49 करोड़ का नुकसान हुआ।

धोखाधड़ी का तरीका

जांच में सामने आया है कि KVPL को दी गई बैंक गारंटी और लेटर ऑफ क्रेडिट सुविधाओं का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। फंड को संबंधित संस्थाओं और बिचौलियों के जरिए दूसरी जगह भेजा गया। इस प्रक्रिया में स्टील खरीद के फर्जी इनवॉइस और ट्रांसपोर्ट दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया गया। ईडी के अनुसार, KVPL ने ऋणदाता बैंकों की जानकारी के बिना कंसोर्टियम व्यवस्था के बाहर बैंक खाते भी संचालित किए।

आगे की जांच

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में जांच अभी जारी है। बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि यह मामला उस व्यापक पैटर्न का हिस्सा है जिसमें फर्जी ट्रेड डॉक्युमेंट्स के जरिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से बड़ी धनराशि निकाली जाती है — एक ऐसी प्रणालीगत कमज़ोरी जिसे दूर करने के लिए नियामक एजेंसियाँ वर्षों से प्रयासरत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी ईडी की तलाशी 2026 में आई — इस देरी में संपत्तियाँ खिसकाने का पर्याप्त समय मिला। बरामद ₹15 लाख नकद और 'कई अचल संपत्तियों की पहचान' के बीच का अंतर बताता है कि असली वसूली अभी बाकी है। बैंकों के कंसोर्टियम की नज़र से बाहर खाते चलाना एक संरचनात्मक निगरानी विफलता है, जिसे बैंकिंग नियामकों को भी कटघरे में खड़ा करती है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

KVPL बैंक फ्रॉड मामला क्या है?
यह मामला मेसर्स कनकधरा वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड (KVPL) और इसके निदेशकों द्वारा PNB के नेतृत्व वाले बैंक समूह से ₹326.49 करोड़ की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है। आरोप है कि KVPL ने बैंक गारंटी और लेटर ऑफ क्रेडिट सुविधाओं का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेजों के जरिए फंड डायवर्ट किया।
ईडी की यह छापेमारी किस आधार पर हुई?
ईडी की जांच CBI द्वारा 8 दिसंबर 2022 को दर्ज FIR पर आधारित है, जो पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत पर दर्ज हुई थी। ईडी ने PMLA, 2002 के प्रावधानों के तहत यह तलाशी अभियान चलाया।
छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?
तलाशी के दौरान ₹15 लाख की बेहिसाब नकदी, फंड डायवर्जन और लेयरिंग से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और अन्य रिकॉर्ड जब्त किए गए। इसके अलावा, कई अचल संपत्तियों और निवेशों की भी पहचान की गई है।
इस धोखाधड़ी में किन बैंकों को नुकसान हुआ?
PNB के नेतृत्व में बने बैंक समूह में IDBI बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा शामिल थे। इन सभी बैंकों को मिलाकर कुल ₹326.49 करोड़ का नुकसान हुआ।
इस मामले में आगे क्या होगा?
ईडी ने बताया कि जांच अभी जारी है। जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद संपत्तियों की कुर्की और आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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