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मनी लॉन्ड्रिंग: ईडी ने जीपीआईएल के 139 बैंक खाते फ्रीज किए, ₹3,590 करोड़ के बैंक फ्रॉड की जांच

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मनी लॉन्ड्रिंग: ईडी ने जीपीआईएल के 139 बैंक खाते फ्रीज किए, ₹3,590 करोड़ के बैंक फ्रॉड की जांच

सारांश

प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल की कंपनी जीपीआईएल के 139 बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं — यह कार्रवाई ₹3,590 करोड़ के कथित बैंक फ्रॉड की जांच का हिस्सा है। दो राज्यों में 9 स्थानों पर छापे, म्यूचुअल फंड, शेयर और तीन लग्ज़री कारें भी जब्त।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (जीपीआईएल) के 139 बैंक खाते पीएमएलए, 2002 के तहत फ्रीज किए।
5 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 9 स्थानों पर छापेमारी की गई।
बैंक कंसोर्टियम का कुल एक्सपोज़र लगभग ₹3,590 करोड़ ; केनरा बैंक का हिस्सा ₹1,174 करोड़ ।
कंपनी पर बकाया रकम में ₹1,115.15 करोड़ का अंतर पाए जाने का आरोप; ₹280 करोड़ के स्टॉक को कथित रूप से 'योग्य' दिखाया गया।
म्यूचुअल फंड, शेयर और दो मर्सिडीज व एक बीएमडब्ल्यू सहित तीन लग्ज़री कारें जब्त।
जांच सीबीआई की एफआईआर पर आधारित; वित्तीय लेन-देन की जांच जारी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में पश्चिम बंगाल की कंपनी गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (जीपीआईएल) के 139 बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। यह कार्रवाई 10 अक्टूबर 2026 को सामने आई, जब एजेंसी ने इस संबंध में विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक किया। इसके साथ ही कंपनी और उससे जुड़े व्यक्तियों के म्यूचुअल फंड, शेयर और तीन महंगी लग्ज़री कारें भी जब्त की गई हैं।

छापेमारी और तलाशी अभियान

ईडी के कोलकाता स्थित पूर्वी क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों ने 5 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्य ओडिशा में 9 स्थानों पर एक साथ छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया। ये स्थान जीपीआईएल, उससे जुड़ी अनुषांगिक कंपनियों और कंपनी के प्रबंधन से संबंधित व्यक्तियों से जुड़े थे।

ईडी के बयान के अनुसार, तलाशी के दौरान प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए गए। जब्त की गई सामग्री और वित्तीय लेन-देन की जांच अभी जारी है।

क्या जब्त किया गया

ईडी के दावे के अनुसार, 139 बैंक खातों को फ्रीज करने के अलावा कंपनी और उससे संबंधित व्यक्तियों के नाम पर दर्ज अनेक म्यूचुअल फंड और शेयर भी फ्रीज किए गए। इसके साथ ही तीन लग्ज़री कारें — जिनमें दो मर्सिडीज और एक बीएमडब्ल्यू शामिल हैं — भी जब्त की गई हैं।

बैंक फ्रॉड का आरोप: ₹3,590 करोड़ का मामला

ईडी की यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि जीपीआईएल ने बैंकों के एक समूह (कंसोर्टियम) से भारी मात्रा में फंड-बेस्ड और नॉन-फंड-बेस्ड वर्किंग-कैपिटल सुविधाएं हासिल की थीं। इस कंसोर्टियम में केनरा बैंक अग्रणी (लीड) बैंक था।

ईडी के अनुसार, कंसोर्टियम का कुल एक्सपोज़र लगभग ₹3,590 करोड़ था, जिसमें केनरा बैंक का स्वीकृत एक्सपोज़र अकेले लगभग ₹1,174 करोड़ था। एजेंसी का दावा है कि जीपीआईएल ने अपनी ड्रॉइंग पावर और उधार लेने की क्षमता में कथित तौर पर हेरफेर किया।

किस तरह हुई कथित धोखाधड़ी

ईडी के बयान के अनुसार, जीपीआईएल ने बैंकों को बताए गए स्टॉक को अपने ऑडिटेड वित्तीय विवरणों में दर्ज स्टॉक की तुलना में काफी अधिक दर्शाया। इसके अलावा, वर्किंग कैपिटल सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए लगभग ₹280 करोड़ के प्रोजेक्ट और ईपीसी स्टॉक को 'योग्य स्टॉक' के रूप में शामिल किया गया।

ईडी ने यह भी कहा कि विवादित और संदिग्ध बकायों — जिनमें न्यायिक मंच द्वारा खारिज किए गए दावे भी शामिल हैं — को 'योग्य बकायों' के रूप में दर्शाया जाता रहा। एजेंसी का दावा है कि जीपीआईएल की ओर से बताई गई बकाया रकम में लगभग ₹1,115.15 करोड़ का अंतर पाया गया, जिससे संकेत मिलता है कि कंपनी ने अपनी मौजूदा संपत्ति को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और इस कारण उधार लेने की सीमा अनुचित रूप से बढ़ गई।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि पीएमएलए के प्रावधानों के तहत जब्त की गई संपत्तियों और दस्तावेज़ों की जांच जारी है। ईडी अब वित्तीय लेन-देन की कड़ी दर कड़ी जोड़ने का काम कर रही है। इस मामले में आगे और कार्रवाई, गिरफ्तारी या संपत्ति अटैचमेंट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें कॉर्पोरेट कंपनियाँ स्टॉक और बकाए को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाकर बैंकों से अरबों रुपये की वर्किंग कैपिटल निकाल लेती हैं — और बैंकिंग प्रणाली की निगरानी इस हेरफेर को रोकने में देर से जागती है। ₹3,590 करोड़ के एक्सपोज़र वाले इस मामले में केनरा बैंक के अकेले ₹1,174 करोड़ दांव पर हैं, जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बड़े कर्जदारों पर उचित सतर्कता (due diligence) को लेकर सवाल उठाता है। ईडी की कार्रवाई महत्वपूर्ण है, लेकिन असली जवाबदेही तब तय होगी जब यह स्पष्ट हो कि बैंक ऑडिटर और नियामक निगरानी प्रणाली इतने बड़े अंतर को इतने लंबे समय तक क्यों नहीं पकड़ पाई।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने जीपीआईएल के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने पश्चिम बंगाल की कंपनी गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (जीपीआईएल) के 139 बैंक खाते पीएमएलए, 2002 के तहत फ्रीज किए हैं। इसके अलावा म्यूचुअल फंड, शेयर और तीन लग्ज़री कारें भी जब्त की गई हैं।
जीपीआईएल पर बैंक फ्रॉड का आरोप क्या है?
ईडी के दावे के अनुसार, जीपीआईएल ने बैंकों को दिखाए गए स्टॉक को वास्तविक ऑडिटेड रिकॉर्ड से कहीं अधिक बताया और लगभग ₹280 करोड़ के अयोग्य स्टॉक को 'योग्य' दिखाया, जिससे उधार लेने की सीमा अनुचित रूप से बढ़ी। बकाया रकम में ₹1,115.15 करोड़ का अंतर भी पाया गया है।
इस मामले में कितना पैसा दांव पर है?
बैंक कंसोर्टियम का कुल एक्सपोज़र लगभग ₹3,590 करोड़ बताया गया है, जिसमें अकेले केनरा बैंक का स्वीकृत एक्सपोज़र लगभग ₹1,174 करोड़ है। केनरा बैंक इस मामले में लीड बैंक था।
ईडी की जांच किस आधार पर शुरू हुई?
ईडी की जांच सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें जीपीआईएल पर बैंकों के कंसोर्टियम से बड़े पैमाने पर फंड हासिल करने में धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था। इसके बाद पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू हुई।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
जब्त दस्तावेज़ों और वित्तीय लेन-देन की जांच अभी जारी है। ईडी के बयान के अनुसार, सामग्री का विश्लेषण किया जा रहा है, जिसके आधार पर आगे संपत्ति अटैचमेंट, गिरफ्तारी या और कार्रवाई संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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