29 सितंबर 2026
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IDFC फर्स्ट बैंक ₹645 करोड़ घोटाला: ED ने चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला में 14 ठिकानों पर छापेमारी

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IDFC फर्स्ट बैंक ₹645 करोड़ घोटाला: ED ने चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला में 14 ठिकानों पर छापेमारी

सारांश

₹645 करोड़ के सरकारी फंड गबन मामले में ED की ताज़ा कार्रवाई — चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में 14 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी। ज्वेलर्स के ज़रिए मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप, CBI पहले ही 6 IAS अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और ₹211 करोड़ की संपत्ति जब्त।

मुख्य बातें

ED ने 29 सितंबर 2026 को IDFC फर्स्ट बैंक के ₹645 करोड़ घोटाले में चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में 14 ठिकानों पर तलाशी ली।
छापेमारी में मलिक ज्वेलर्स, केएलजी ज्वेलर्स, एम.बी.
गोल्ड ट्रेडर्स, श्याम ज्वेलर्स और सुंदर ज्वेलर्स के ठिकाने शामिल।
आरोप है कि गबन किए गए सरकारी धन को ज्वेलर्स के खातों के ज़रिए IAS अधिकारियों तक पहुँचाया गया।
CBI ने पंचकूला स्पेशल कोर्ट में तीसरी चार्जशीट दाखिल की, 6 हरियाणा कैडर IAS अधिकारी नामजद।
ED अब तक 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और ₹211 करोड़ की संपत्ति अटैच/जब्त/फ्रीज की है।
जांच की शुरुआत फरवरी 2026 में हरियाणा पुलिस की FIR के आधार पर हुई थी।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 29 सितंबर 2026 को IDFC फर्स्ट बैंक से जुड़े ₹645 करोड़ के सरकारी फंड गबन मामले में चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में 14 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई ED के चंडीगढ़ जोनल ऑफिस-2 द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के तहत जारी जांच के अंतर्गत की गई। इस मामले में हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी खातों के धन को कथित तौर पर गबन किया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

जांच की शुरुआत हरियाणा पुलिस द्वारा फरवरी 2026 में दर्ज एक एफआईआर के आधार पर हुई थी। उस एफआईआर में हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग के IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में मौजूद बैंक खातों के बैलेंस में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ था। ED ने इसके बाद PMLA 2002 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की स्वतंत्र जांच शुरू की।

गौरतलब है कि यह घोटाला केवल एक बैंक तक सीमित नहीं है — जांच में सामने आया है कि हरियाणा सरकार के कई विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के बैंक खातों से सार्वजनिक धन को व्यवस्थित तरीके से निकालकर लेयरिंग की गई।

ताज़ा छापेमारी में किसे निशाना बनाया गया

ताज़ा तलाशी अभियान में कई बड़े ज्वेलर्स और उनसे जुड़ी कंपनियों को निशाना बनाया गया। जिन प्रतिष्ठानों पर छापे मारे गए उनमें मलिक ज्वेलर्स, केएलजी ज्वेलर्स और उसकी सहयोगी कंपनियाँ, एम.बी. गोल्ड ट्रेडर्स, श्याम ज्वेलर्स और सुंदर ज्वेलर्स शामिल हैं।

इसके अलावा गौरव कंसल के ठिकानों पर भी तलाशी ली गई, जिन पर अपराध से अर्जित धन को लेयर करने और घुमाने में बिचौलिए के तौर पर काम करने का आरोप है।

धन शोधन का तंत्र

जांच में सामने आया है कि गबन किए गए सरकारी पैसे को इन ज्वेलर्स के बैंक खातों के ज़रिए घुमाया गया और इसे व्यावसायिक लेन-देन के रूप में दर्शाया गया। अधिकारियों के अनुसार, अपराध से अर्जित धन को वैध बनाने के लिए आरोपियों की आपसी मिलीभगत से ये लेन-देन किए गए।

जांच में यह भी सामने आया है कि ज्वेलर्स के ज़रिए धोया गया यह पैसा कथित तौर पर IDFC फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी में संलिप्त आरोपी IAS अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों तक पहुँचाया गया।

CBI की चार्जशीट और अब तक की कार्रवाई

इसी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पंचकूला की स्पेशल कोर्ट में तीसरी चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें छह हरियाणा कैडर के IAS अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों को नामजद किया गया है।

ED पहले इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और जांच के दौरान कुल ₹211 करोड़ की चल व अचल संपत्तियाँ अटैच, जब्त और फ्रीज की जा चुकी हैं। एजेंसी ने पंचकूला की स्पेशल PMLA कोर्ट में 14 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दाखिल की है।

आगे क्या होगा

ताज़ा छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच जारी है। अधिकारियों के अनुसार इस तलाशी अभियान में अपराध से अर्जित धन को विभिन्न कंपनियों और बैंक खातों के ज़रिए छिपाने तथा वैध बताने से जुड़े कई नए साक्ष्य मिले हैं। मामले में आगे और गिरफ्तारियों और संपत्ति जब्ती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

या राज्य सरकार के खातों में संस्थागत सुधारों की भी जवाबदेही तय होगी।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IDFC फर्स्ट बैंक घोटाला क्या है?
यह ₹645 करोड़ के सरकारी फंड गबन का मामला है, जिसमें हरियाणा सरकार के विकास एवं पंचायत विभाग और चंडीगढ़ नगर निगम के बैंक खातों से धन कथित तौर पर निकाला गया। हरियाणा पुलिस ने फरवरी 2026 में FIR दर्ज की थी, जिसके आधार पर ED और CBI दोनों जांच कर रही हैं।
ED की ताज़ा छापेमारी में किन-किन ठिकानों को निशाना बनाया गया?
29 सितंबर 2026 को ED ने चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में 14 ठिकानों पर तलाशी ली। इनमें मलिक ज्वेलर्स, केएलजी ज्वेलर्स, एम.बी. गोल्ड ट्रेडर्स, श्याम ज्वेलर्स, सुंदर ज्वेलर्स और कथित बिचौलिए गौरव कंसल के ठिकाने शामिल हैं।
इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हो चुकी है?
ED अब तक 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और ₹211 करोड़ की चल व अचल संपत्तियाँ अटैच, जब्त और फ्रीज की हैं। पंचकूला की स्पेशल PMLA कोर्ट में 14 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की गई है। CBI ने भी पंचकूला स्पेशल कोर्ट में तीसरी चार्जशीट दाखिल की है।
इस घोटाले में IAS अधिकारियों की क्या भूमिका बताई जा रही है?
CBI की तीसरी चार्जशीट में छह हरियाणा कैडर के IAS अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों को नामजद किया गया है। जांच के अनुसार, ज्वेलर्स के ज़रिए धोया गया पैसा कथित तौर पर इन्हीं IAS अधिकारियों तक पहुँचाया गया।
ज्वेलर्स ने इस मनी लॉन्ड्रिंग में कैसे भूमिका निभाई?
जांच के अनुसार, गबन किए गए सरकारी धन को इन ज्वेलर्स के बैंक खातों के ज़रिए घुमाया गया और इसे व्यावसायिक लेन-देन के रूप में दर्शाया गया। आरोप है कि आरोपियों की आपसी मिलीभगत से अपराध से अर्जित धन को छिपाने और वैध बताने का काम किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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