ईडी का बड़ा एक्शन: पंचकूला नगर निगम-कोटक बैंक धोखाधड़ी में 12 ठिकानों पर छापा, 145 करोड़ के गबन का खुलासा
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने 22 अप्रैल 2025 को चंडीगढ़, पंचकूला, जीरकपुर, डेरा बस्सी और राजपुरा में 12 ठिकानों पर छापेमारी की।
- कोटक महिंद्रा बैंक के अधिकारियों ने पंचकूला नगर निगम के 145.03 करोड़ रुपये जाली दस्तावेजों के जरिए गबन किए।
- मुख्य आरोपी पुष्पेंद्र सिंह (डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट, कोटक बैंक), दिलीप कुमार राघव और विकास कौशिक (पूर्व एमसी अधिकारी) हैं।
- आरोपियों ने नगर निगम के नाम पर दो अनधिकृत बैंक खाते खोले और जाली ईमेल आईडी से फंड ट्रांसफर की मंजूरी ली।
- गबन की राशि रियल एस्टेट कंपनियों और निजी व्यक्तियों में लगाई गई; नगर निगम को 16 जाली एफडीआर दिखाए गए।
- यह जांच हरियाणा एसीबी की एफआईआर पर आधारित है और पीएमएलए, 2002 के तहत आगे की कार्रवाई जारी है।
चंडीगढ़, 23 अप्रैल: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोटक महिंद्रा बैंक और नगर निगम पंचकूला से जुड़े 145 करोड़ रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले में 22 अप्रैल 2025 को चंडीगढ़, पंचकूला, जीरकपुर, डेरा बस्सी और राजपुरा (पटियाला) में स्थित 12 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में खरीद-बिक्री के समझौते, जाली एफडीआर दस्तावेज और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कई अहम सबूत जब्त किए गए। यह अभियान मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत ईडी के चंडीगढ़ जोनल ऑफिस द्वारा संचालित किया गया।
मामले की जड़: कैसे रची गई आपराधिक साजिश?
ईडी की जांच हरियाणा एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो), पंचकूला द्वारा दर्ज एक एफआईआर पर आधारित है। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत कोटक महिंद्रा बैंक के अज्ञात अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध दर्ज की गई थी।
जांच में सामने आया कि दिलीप कुमार राघव (कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर, कोटक महिंद्रा बैंक) ने पुष्पेंद्र सिंह (डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट, कोटक महिंद्रा बैंक) के सहयोग और विकास कौशिक (पूर्व सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर, एमसी पंचकूला) के समर्थन से जाली और नकली दस्तावेजों के आधार पर पंचकूला नगर निगम के नाम पर दो अनधिकृत बैंक खाते खुलवाए।
इन फर्जी खातों में नगर निगम के असली खातों से फंड ट्रांसफर कराने के लिए जाली और अनधिकृत फंड ट्रांसफर पत्रों का इस्तेमाल किया गया। बैंक अधिकारियों ने लेन-देन की मंजूरी के लिए अनधिकृत ईमेल आईडी का उपयोग किया, जबकि पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों में एमसी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मंजूरी के लिए अधिकृत ईमेल आईडी अलग थीं।
145 करोड़ का गबन: पैसे कहाँ-कहाँ गए?
ईडी की प्रारंभिक जांच के अनुसार, अनधिकृत खातों में जमा कराई गई राशि को आगे रजत दह्रा, स्वाति तोमर, कपिल कुमार और विनोद कुमार जैसे फाइनेंसरों को ट्रांसफर किया गया। इसके बाद यह रकम पुष्पेंद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रीति ठाकुर के पास वापस पहुंचाई गई।
इसके अलावा, यह धनराशि रियल एस्टेट कंपनियों और कई निजी व्यक्तियों को भी ट्रांसफर की गई। गौरतलब है कि एमसी पंचकूला के आधिकारिक रिकॉर्ड में इन सभी लेन-देन का कोई उल्लेख नहीं था, जो इस साजिश की गहराई को दर्शाता है।
नगर निगम को कोटक महिंद्रा बैंक, सेक्टर-11, पंचकूला में 16 एफडी में लगभग 145.03 करोड़ रुपये के निवेश और लगभग 158.02 करोड़ रुपये की मैच्योरिटी वैल्यू दर्शाने वाले जाली एफडीआर दस्तावेज सौंपे गए थे।
छापेमारी में किन-किन के ठिकाने खंगाले गए?
ईडी ने पुष्पेंद्र सिंह, रजत दह्रा, दिलीप कुमार राघव, विकास कौशिक, सनत रियल्टर्स, सन्नी गर्ग और कपिल कुमार के ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान खरीद-बिक्री के समझौते, जाली दस्तावेज और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए।
व्यापक संदर्भ: सरकारी फंड और बैंकिंग सुरक्षा पर सवाल
यह मामला केवल एक बैंक धोखाधड़ी नहीं है — यह नगरीय निकायों की वित्तीय सुरक्षा व्यवस्था में गहरी खामियों को उजागर करता है। गौरतलब है कि देशभर में नगर निगमों के फंड के दुरुपयोग के मामले पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। इस मामले में विशेष रूप से चिंताजनक पहलू यह है कि बैंक अधिकारी, नगर निगम कर्मचारी और निजी वित्तपोषक — तीनों स्तरों पर मिलीभगत सामने आई है।
आलोचकों का कहना है कि यदि एमसी पंचकूला के आंतरिक ऑडिट तंत्र सक्रिय होते तो यह घोटाला इतने बड़े पैमाने तक नहीं पहुंच पाता। यह घटना इस बात की भी याद दिलाती है कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा के लिए डिजिटल वेरिफिकेशन और दोहरे प्राधिकरण की व्यवस्था कितनी जरूरी है।
ईडी की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां व संपत्ति कुर्की की कार्रवाई संभव है। अदालत में चार्जशीट दाखिल होने के बाद इस घोटाले की पूरी परतें सामने आने की उम्मीद है।