10 अक्टूबर 2026
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जम्मू-कश्मीर GCC निवेश के लिए तैयार: एलजी मनोज सिन्हा बोले— स्टार्टअप 69 से 1,305 हुए, युवा प्रतिभा हमारी असली ताकत

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जम्मू-कश्मीर GCC निवेश के लिए तैयार: एलजी मनोज सिन्हा बोले— स्टार्टअप 69 से 1,305 हुए, युवा प्रतिभा हमारी असली ताकत

सारांश

जम्मू-कश्मीर GCC शिखर सम्मेलन 2026 में एलजी मनोज सिन्हा का संदेश साफ था — यह केवल निवेश का आमंत्रण नहीं, बल्कि बदलाव का प्रमाण है। 2020 में 69 स्टार्टअप से 2026 में 1,305 तक की छलाँग और 1,800% की वृद्धि बताती है कि जम्मू-कश्मीर अब सिर्फ संभावना नहीं, एक तैयार गंतव्य है।

मुख्य बातें

एलजी मनोज सिन्हा ने 10 अक्टूबर 2026 को जम्मू-कश्मीर GCC शिखर सम्मेलन 2026 के समापन सत्र को संबोधित किया।
जम्मू-कश्मीर में स्टार्टअप की संख्या 2020 के 69 से बढ़कर 1,305 हो गई — 1,800% से अधिक की वृद्धि।
भारत में वर्तमान में 2,100 से अधिक GCC केंद्र हैं, जिनमें 19 लाख से अधिक पेशेवर कार्यरत हैं।
उपराज्यपाल ने GCC निवेश के लिए छह प्रमुख लाभ और अगले पाँच वर्षों का चार-स्तंभ रोडमैप प्रस्तुत किया।
शिखर सम्मेलन का आयोजन आईआईएम जम्मू और नैसकॉम के सहयोग से किया गया।
कृषि-तकनीक, पर्यटन-तकनीक और हस्तशिल्प डिजिटलीकरण को विशिष्ट अवसर क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 10 अक्टूबर 2026 को जम्मू-कश्मीर वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) शिखर सम्मेलन 2026 के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर अपने युवा प्रतिभा, निवेशक-अनुकूल नीतियों और तेज़ी से विस्तार पाते स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के बल पर वैश्विक क्षमता केंद्रों के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य बनने की पूरी तैयारी में है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे इस बात पर विचार करें कि नई प्रतिभा और नवाचार केंद्र की तलाश कर रही कंपनियों को जम्मू-कश्मीर को ही प्राथमिकता क्यों देनी चाहिए।

शिखर सम्मेलन का संदर्भ और आयोजन

यह दो दिवसीय शिखर सम्मेलन आईआईएम जम्मू और नैसकॉम के सहयोग से आयोजित किया गया। उपराज्यपाल ने आयोजन की सफलता के लिए इन संस्थानों और संबंधित प्रशासनिक इकाइयों को बधाई दी। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब भारत में GCC केंद्रों की संख्या महानगरों की सीमाएँ लाँघकर द्वितीय और तृतीय स्तर के शहरों तक पहुँच रही है।

गौरतलब है कि भारत में वर्तमान में 2,100 से अधिक GCC केंद्र कार्यरत हैं, जिनमें 19 लाख से अधिक पेशेवर काम करते हैं और जो देश के निर्यात में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर का स्टार्टअप उभार

सिन्हा ने कहा कि 2020 में जम्मू-कश्मीर में मात्र 69 स्टार्टअप थे, जो अब बढ़कर 1,305 हो गए हैं — यह 1,800 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। उन्होंने इसे 'नए जम्मू-कश्मीर का जीवंत प्रतीक' बताया।

उन्होंने आईआईएम जम्मू, आईआईटी जम्मू, एनआईटी श्रीनगर और अन्य विश्वविद्यालयों के युवा स्नातकों की ऊर्जा को इस पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ बताते हुए कहा कि यह एक 'तैयार कार्यबल' के उभरने का स्पष्ट संकेत है।

चिनाब पुल से प्रेरणा — सहयोग का प्रतीक

चिनाब नदी पर बने विश्व के सबसे ऊँचे रेलवे मेहराब पुल से प्रेरणा लेते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि यह संरचना जम्मू-कश्मीर की महत्वाकांक्षा और आत्मविश्वास को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार चंद्र और भागा नदियों के संगम से चिनाब बनती है, उसी प्रकार GCC केंद्र बहुराष्ट्रीय कंपनियों की वैश्विक विशेषज्ञता और जम्मू-कश्मीर के युवाओं की प्रतिभा को जोड़कर नवाचार के नए अवसर पैदा करते हैं।

उन्होंने कहा, 'मैं वैश्विक क्षमता केंद्रों को भी इसी साहस और सहयोग की भावना से प्रेरित देखता हूँ और ये मिलकर अपनी अलग-अलग क्षमताओं से कहीं अधिक शक्ति उत्पन्न कर सकते हैं।'

छह प्रमुख लाभ और पाँच वर्षीय रोडमैप

उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर को GCC गंतव्य के रूप में स्थापित करने वाले छह प्रमुख लाभों की पहचान की — मजबूत वित्तीय सहायता, कम परिचालन लागत, अग्रणी बहुराष्ट्रीय निवेशकों के लिए विशेष प्रोत्साहन, स्थानीय प्रतिभा की वापसी, शुरुआती प्रवेशकों के लिए प्रथम-प्रवेश लाभ, और कृषि-तकनीक, पर्यटन-तकनीक तथा हस्तशिल्प डिजिटलीकरण जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में अवसर।

अगले पाँच वर्षों के लिए उन्होंने चार-स्तंभ वाले रोडमैप की रूपरेखा प्रस्तुत की — उद्योग-अकादमिक साझेदारी के ज़रिये प्रतिभा विकास, विश्वसनीय क्रियान्वयन से विश्वास निर्माण, जम्मू-कश्मीर के अद्वितीय गंतव्य लाभों का उपयोग, और हब-एंड-स्पोक विकास मॉडल के माध्यम से समावेशी विकास।

आगे की राह

सिन्हा ने कहा कि GCC क्षेत्र की यात्रा अब केवल 'लागत दक्षता' के प्रश्नों से आगे बढ़कर 'उत्कृष्टता और क्षमता' के प्रश्नों की ओर विकसित हो चुकी है। उनके अनुसार, जम्मू-कश्मीर आने वाले दशक में केवल GCC का गंतव्य नहीं, बल्कि वैश्विक नवाचार का केंद्र बन सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे बुनियादी ढाँचागत विकास और बेहतर कनेक्टिविटी को इस परिवर्तन का आधार बताते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि शिखर सम्मेलन में रखी गई नींव एक नवाचार-संचालित जम्मू-कश्मीर के निर्माण की दिशा में निर्णायक कदम साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या जम्मू-कश्मीर की कनेक्टिविटी, बिजली आपूर्ति और कानून-व्यवस्था की स्थिरता बहुराष्ट्रीय कंपनियों के परिचालन मानकों पर खरी उतरती है — जो महानगरीय GCC हब में स्वाभाविक रूप से उपलब्ध हैं। 1,305 स्टार्टअप का आँकड़ा प्रभावशाली है, पर यह भी देखना होगा कि इनमें से कितने राजस्व-उत्पादक और टिकाऊ हैं। GCC क्षेत्र में 'प्रथम-प्रवेश लाभ' तभी सार्थक होगा जब नीतिगत प्रोत्साहन दीर्घकालिक और पारदर्शी हों — अन्यथा यह शिखर सम्मेलन भी उन घोषणाओं की सूची में जुड़ जाएगा जो कागज़ पर बड़ी लगती हैं, ज़मीन पर कम दिखती हैं।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर GCC शिखर सम्मेलन 2026 क्या था?
यह 10 अक्टूबर 2026 को जम्मू में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन था, जिसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) के लिए एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करना था। इसका आयोजन आईआईएम जम्मू और नैसकॉम के सहयोग से किया गया।
जम्मू-कश्मीर में स्टार्टअप की संख्या कितनी बढ़ी है?
एलजी मनोज सिन्हा के अनुसार, 2020 में जम्मू-कश्मीर में केवल 69 स्टार्टअप थे, जो 2026 तक बढ़कर 1,305 हो गए — यह 1,800 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।
जम्मू-कश्मीर GCC निवेश के लिए क्यों आकर्षक है?
एलजी सिन्हा ने छह प्रमुख लाभ गिनाए — मजबूत वित्तीय सहायता, कम परिचालन लागत, बहुराष्ट्रीय निवेशकों के लिए विशेष प्रोत्साहन, स्थानीय प्रतिभा की वापसी, शुरुआती प्रवेशकों के लिए प्रथम-प्रवेश लाभ, और कृषि-तकनीक व पर्यटन-तकनीक जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में अवसर।
भारत में GCC क्षेत्र की वर्तमान स्थिति क्या है?
भारत में वर्तमान में 2,100 से अधिक GCC केंद्र हैं, जिनमें 19 लाख से अधिक पेशेवर कार्यरत हैं। ये केंद्र अब महानगरों से आगे बढ़कर द्वितीय और तृतीय स्तर के शहरों में भी विस्तार कर रहे हैं।
अगले पाँच वर्षों के लिए जम्मू-कश्मीर का GCC रोडमैप क्या है?
उपराज्यपाल ने चार-स्तंभ वाला रोडमैप प्रस्तुत किया — उद्योग-अकादमिक साझेदारी से प्रतिभा विकास, विश्वसनीय क्रियान्वयन से विश्वास निर्माण, जम्मू-कश्मीर के अद्वितीय लाभों का उपयोग, और हब-एंड-स्पोक मॉडल के ज़रिये समावेशी विकास।
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